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डिजिटल सुरक्षा को जनआंदोलन बनाएं, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ें- मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक रायपुर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संस्था के ऑडिटोरियम में किया गया। संगोष्ठी का विषय था- “साइबर और डिजिटल सुरक्षा, डिजिटल युग में चुनौतियाँ और अवसर।”

डिजिटल युग में सजगता और कौशल ही सुरक्षा की कुंजी -मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

प्रदेश के मंत्री, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन गुरु खुशवंत साहेब ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि डिजिटल युग में हमारा व्यवहार भी ⁸⁹ हो गया है, इसलिए डिजिटल सुरक्षा अब हमारी जिम्मेदारी बन गई है। हमें तकनीक का उपयोग समझदारी, संवेदनशीलता और सुरक्षा के साथ करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राज्य का अपना ‘नवा अंजोर 2047 विज़न डॉक्यूमेंट’ जारी किया गया है, जो राज्य को नवाचार, आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ाने का रोडमैप है। 

हमारे युवा नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें

गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा ज्ञान, विज्ञान, कौशल और तकनीक के बल पर राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं। अब समय है कि हमारे युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। मंत्री ने छात्राओं को आह्वान किया कि वे साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों की बारीकियों को समझें। उन्होंने कहा भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के युवा इस क्रांति के हिस्सेदार बनें। 

भारत का बैंकिंग सिस्टम विश्व में सबसे मजबूत

उन्होंने डिजिटल ट्रांजैक्शन के संदर्भ में सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि भारत का बैंकिंग सिस्टम आज विश्व का सबसे मजबूत सिस्टम है, लेकिन इसके सुरक्षित उपयोग की जिम्मेदारी हमारी है। हर व्यक्ति को डिजिटल साक्षर और साइबर जागरूक बनना चाहिए। कार्यक्रम की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को जागरूक, कुशल और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। यह पहल ‘सुरक्षित डिजिटल छत्तीसगढ़’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तकनीकी शिक्षा के नए आयामों पर चर्चा- डॉ. एम. एल. अग्रवाल

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. एम. एल. अग्रवाल, अतिरिक्त संचालक, तकनीकी शिक्षा संचालनालय छ.ग., ने अपने वक्तव्य में तकनीकी शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में चार सीजीआईटी संस्थानों की शुरुआत की गई है और तीन नए संस्थान प्रस्तावित हैं, जो युवाओं को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

विशेषज्ञों के व्याख्यान से समृद्ध हुए तकनीकी सत्र

संगोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. डॉ. नरेश नागवानी (एनआईटी रायपुर) ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर जानकारी दी और डिजिटल सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध टूल्स की जानकारी साझा की। द्वितीय सत्र में प्रो. डॉ. संजय कुमार (पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर) ने डिजिटल युग में उभरती चुनौतियों एवं उनके समाधान पर व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम में 150 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, राष्ट्रीय स्तर के 18 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु संस्था की प्राचार्य डॉ. वर्षा चौरसिया ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं आयोजन टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया।

अपने ही घर की छत पर बनेगी बिजली : ’प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना बनी लाभप्रद’

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रायपुर। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जिले में लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। अब तक जिले के 450 से अधिक उपभोक्ता आवेदन कर चुके हैं। सीएसपीडीसीएल के चेयरमैन डॉ. रोहित यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक लोगों को इस योजना से जोड़ा जाए, ताकि हर घर को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

उपभोक्ताओं को मिल रहा लाभ’

खैरागढ़ निवासी  शिवादित्य सिंह ने अपने मकान की छत पर 5 किलोवाट का सोलर रूफटॉप प्लांट लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके घर के मासिक बिजली बिल में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आई है और उन्हें करीब 5 हजार रुपए की मासिक बचत हो रही है। इसी तरह जालबांधा, पाण्डदाह और अन्य क्षेत्रों के कई उपभोक्ताओं ने सोलर प्लांट लगाकर आर्थिक लाभ प्राप्त किया है।

खैरागढ़ निवासी  शिवादित्य सिंह ने अपने मकान की छत पर 5 किलोवाट करा सोलर रूफटॉप प्लांट लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके घर के मासिक बिजली बिल में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आई है।

आकर्षक सब्सिडी और आसान भुगतान

इस योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को अधिकतम 1.08 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही उपभोक्ता केवल 10 प्रतिशत राशि अग्रिम देकर शेष भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज दर पर 10 वर्षों तक की आसान किस्तों में कर सकते हैं। अतिरिक्त बिजली उत्पादन से उपभोक्ता अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं।

’हर गांव-शहर तक अभियान’

ग्रामीण अंचलों में शिविरों और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की विस्तृत जानकारी दी जा रही है और पोर्टल www.pmsuryaghar.gov.in पर त्वरित पंजीयन भी कराया जा रहा है।

’हरित ऊर्जा की ओर बढ़ता जिला’

यह योजना न केवल मुफ्त और स्वच्छ ऊर्जा का माध्यम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र लाभान्वित होंगे और जिला हरित ऊर्जा की ओर मजबूती से आगे बढ़ेगा।


सरगुजा अंचल के विद्यार्थियों को मिल रहा एडवांस ड्रोन का प्रशिक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचल के विद्यार्थियों को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज लखनपुर के पीएम स्कूल में आज प्रशिक्षण की शुरूआत की। इस प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी पर 30 घंटे का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़ना है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के कौशल विकास से जुड़ी नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का आने वाला भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को नई दिशा देकर रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर व प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पर्यटन मंत्री अग्रवाल ने कार्यक्रम में सरस्वती साइकिल योजना अंतर्गत 53 बालिकाओं को निःशुल्क साइकिल प्रदान की। इस मौके पर उन्होंने उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया और विद्यालय में नए वाटर कूलर का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


रितु रजक कपड़े का व्यवसाय अपनाकर बनी आत्मनिर्भर

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 रायपुर : बिहान योजना अंतर्गत स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएँ अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं और परिवार की जिम्मेदारियाँ भी सफलता पूर्वक निभा रही हैं। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखण्ड की निवासी रितु रजक इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने दीपक स्व-सहायता समूह से जुड़कर समूह गतिविधियों के माध्यम से शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। प्रारंभ में उन्होंने ग्राम संगठन से 10 हजार रुपए तथा अपने समूह को बैंक से प्राप्त ऋण में से 40 हजार रुपए का ऋण लेकर कपड़े का व्यवसाय प्रारंभ किया। व्यवसाय में सफलता मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत साधन संस्था की तकनीकी सहायता से ग्रामीण बैंक दुलदुला से 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर कारोबार का विस्तार किया।

रितु रजक
रितु रजक कहती हैं कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व एवं राज्य शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में नई पहचान बना रही हैं। आज रितु रजक का कपड़े का व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इससे उन्हें प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये की आय हो रही है। मेहनत और आत्मनिर्भरता से आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी है। श्रीमती रितु रजक ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।



स्व सहायता समूह की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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 रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहान योजना उल्लेखनीय भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड की रीमा स्व सहायता समूह ने आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है। मात्र 100-100 रुपये की मासिक बचत से शुरू हुआ यह समूह आज 35 शासकीय विद्यालयों को मध्यान्ह भोजन हेतु राशन उपलब्ध कराने का कार्य कर रहा है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सविता चौहान ने बताया कि इस कार्य से समूह को प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है, जिससे सभी 10 सदस्य महिलाएं आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रही हैं।

रीमा स्व सहायता समूह ने 1.5 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने सदस्यों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ ही उनकी आजीविका को और मज़बूती प्रदान की है। श्रीमती चौहान ने बताया कि अब समूह की किसी भी सदस्य को आर्थिक मदद के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। महिलाएं स्वरोजगार से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और आत्मनिर्भरता का वास्तविक उदाहरण बनी हुई हैं

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