Media24Media.com: #आजीविका मिशन

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कबीरधाम के गंडईखुर्द से वीबी-जी राम जी योजना का हुआ राज्य स्तरीय शुभारंभ

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रायपुर : ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका की नई गारंटी देने वाली विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण(वीबी-जी राम जी) योजना का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया।


कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर पर योजना का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति से किया। इस दौरान वे वर्चुअल माध्यम से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित राज्य स्तरीय शुभारंभ समारोह से भी जुड़े रहे। 

     केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) योजना लागू हो रही है। इस योजना का उद्देश्य है कि देश का कोई भी गरीब काम के अभाव में बेरोजगार न रहे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से जहां ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, वहीं गांवों में विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। चौहान ने कहा कि मजदूरों के पसीने का सम्मान हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गरीबों की सेवा ही हमारे लिए भगवान की सेवा है। 

उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज पूरे देश में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जीरामजी) योजना का शुभारंभ हो रहा है और छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में योजना के तहत पहले कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि विकसित गांव से विकसित भारत के निर्माण का अभियान है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक गांव और पंचायत का समग्र विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 3,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे और रोजगार की कोई कमी नहीं रहेगी।

       उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि योजना के तहत 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। इनमें जल संरक्षण से जुड़े 107, ग्रामीण अधोसंरचना के 90, आजीविका संवर्धन के 86 तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित 35 प्रकार के कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब जॉब कार्ड के स्थान पर जीआरजी कार्ड जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जॉब कार्ड में केवाईसी कराने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत डबरी, चेकडैम, बोल्डर चेकडैम, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन, नहर लाइनिंग, ग्रामीण सड़क (धरसा), मुरमीकरण जैसे कार्य कर जल स्तर बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रत्येक पंचायत को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर अटल डिजिटल सेवा केंद्र, मुक्तिधाम में शेड, ग्रामीण अधोसंरचना सहित प्राथमिकता वाले कार्य शुरू करने होंगे।

        उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत बाउंड्री वॉल, किचन शेड, शौचालय, सामुदायिक पशु शेड, सोलर एवं स्ट्रीट लाइट, ग्रामीण चौपाल, हाईमास्ट लाइट, स्व-सहायता समूहों के लिए वर्क शेड, कोल्ड स्टोरेज, खाद एवं खाद्यान्न गोदाम, सामुदायिक आटा चक्की, कृषि प्रसंस्करण केंद्र और हैंडलूम प्रोसेसिंग केंद्र जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे। इससे रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे। इसी उद्देश्य से गांवों को ए, बी और सी श्रेणी में विभाजित कर योजनाबद्ध विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया गया है, जो ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से अपील की कि वे व्यापक सोच के साथ अपने गांवों की विकास कार्ययोजना तैयार करें, ताकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

        पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है और सभी लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। इस योजना के तहत मनरेगा में अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा तथा अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। 

       कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेष पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

गंडईखुर्द को मिली पहली सौगात, शेड निर्माण प्रस्ताव को स्वीकृति

      उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत प्रदेश के पहले विकास कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि योजना की शुरुआत विकास कार्यों के साथ हो रही है। इस स्वीकृति के साथ ही गंडईखुर्द वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रदेश की पहली ग्राम पंचायत बन गई, जहां विकास कार्य का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसी प्रकार प्रत्येक पंचायत की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए योजना का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।

मानव श्रृंखला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण

         कार्यक्रम के दौरान वीबी-जी राम जी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी, कर्मचारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर योजना का संदेश दिया। इस दौरान सभी ने ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों को योजना के उद्देश्यों, लाभों एवं इसमें जनभागीदारी के महत्व से भी अवगत कराया गया।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वृहद स्तर पर हुआ पौधरोपण

      पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत वृहद स्तर पर पौधरोपण किया गया। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

बिहान योजना से बदली सिवनी की रूखमणी पाण्डेय की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ और महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

कोरोना काल एवं लॉकडाउन के दौरान पशुपालन व्यवसाय में हुए आर्थिक नुकसान के बाद परिवार की आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं। इस कठिन समय में रूखमणी पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

आरबीके दीदी के सहयोग से ग्राम सिवनी में महिलाओं को संगठित कर उन्होंने ‘जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह’ का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी तथा बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से संबद्ध है। समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा अतिरिक्त समूह ऋण प्राप्त कर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय को पुनः प्रारंभ किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि हुई।

आज रूखमणी पाण्डेय न केवल अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं, बल्कि स्व सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं।

रूखमणी पाण्डेय ने कहा कि ‘लखपति दीदी पहल’ ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि प्रभावी मार्गदर्शन, समूह की सामूहिक शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।

खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ केंद्र का किया भ्रमण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह केंद्र का खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण उद्यमिता, लघु उद्योगों की कार्यप्रणाली तथा महिला सशक्तिकरण की जमीनी हकीकत से अवगत कराना था।

विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत की और उनकी कार्यशैली को का अध्ययन किया। यह समूह ‘बिहान’ मिशन के अंतर्गत संगठित होकर विभिन्न उद्यमों का संचालन कर रहा है। इस दौरान विद्यार्थियों ने मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट, बेकरी यूनिट तथा चिप्स निर्माण इकाई का भी अवलोकन किया। इन इकाइयों की संचालन प्रणाली भी सीखा।

मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट में विद्यार्थियों ने कोदो, कुटकी जैसे मोटे अनाजों की सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग तथा मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया को देखा। वहीं बेकरी यूनिट में केक, कुकीज़ तथा ब्रेड आदि के निर्माण की जानकारी प्राप्त की। चिप्स निर्माण इकाई में कच्चे माल की तैयारी से लेकर पैकेजिंग तक की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. सेंगर ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है और वे ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता की संभावनाओं को भी पहचान पाते हैं। साथ ही, यह भ्रमण महिला सशक्तिकरण, खाद्य प्रसंस्करण तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को समझने की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है।


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