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अम्बेडकर अस्पताल में टोटल हिप रिप्लेसमेंट एवं टोटल नी रिप्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध6ऊ कीकोल

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रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग में अब टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) एवं टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) जैसी अत्याधुनिक सर्जिकल सुविधाएं पूर्व की भाँति सुचारु रूप से मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। अस्थि रोग विभाग की इस सुविधा से कूल्हे एवं घुटने की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।

अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आर. के. दास के अनुसार, गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, दुर्घटना या लम्बे समय से जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए यह सर्जरी अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। सर्जरी के पश्चात मरीज सामान्य जीवन की ओर तेजी से लौट पा रहे हैं।

उन्होंने मरीजों से अपील की है कि हिप (कूल्हे) या नी (घुटने) की पुरानी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय पर ऑर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी में परामर्श लेकर उपचार कराएं।

अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि अम्बेडकर अस्पताल में टोटल हिप रिप्लेसमेंट एवं टोटल नी रिप्लेसमेंट की सुविधा पूर्व मेंकिंग की भाँति पूरी तरह उपलब्ध है। अत्याधुनिक तकनीक, मानक प्रोटोकॉल एवं अनुभवी चिकित्सकों की टीम द्वारा यह सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा रही है। विगत कुछ दिनों में करीब 8 मरीजों की जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी की जा चुकी है।

इन सर्जरी के माध्यम से मरीजों को लम्बे समय से चले आ रहे असहनीय दर्द से स्थायी राहत मिलती है तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। शासकीय अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को आयुष्मान योजना के द्वारा निशुल्क उच्चस्तरीय इलाज मिल रहा हैं।


छाती के दुर्लभ कैंसर का सफल ऑपरेशन, अम्बेडकर अस्पताल रायपुर में बची मरीज की जान

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रायपुर। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के कैंसर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कैंसर सर्जरी विभाग की टीम ने छाती के एक दुर्लभ एवं जटिल कैंसर; मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर एक बार फ़िर एक 29 वर्षीय पुरुष मरीज की जान बचाई। मरीज छाती में गांठ, सांस लेने में तकलीफ और लगातार दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था। 

कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने केस की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि- पूर्व में मरीज का उपचार एम्स रायपुर के कैंसर विभाग में चल रहा था, जहां बायोप्सी जांच में मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर की पुष्टि हुई। प्रारंभिक जांच में छाती के बीच स्थित गांठ का आकार लगभग 13x18x16 सेंटीमीटर पाया गया, जो हृदय के समीप बड़ी रक्त नलियों से चिपकी हुई थी। उच्च जोखिम को देखते हुए एम्स रायपुर के चिकित्सकों ने पहले कीमोथेरेपी देने का निर्णय लिया।

जनवरी 2025 से जून 2025 तक मरीज को छह चक्र (cycle) कीमोथेरेपी दी गई, जिससे गांठ का आकार घटकर 4x3x4 सेंटीमीटर रह गया। इसके बाद मरीज को एम्स रायपुर से रेफर कर डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता के पास भेजा गया।

डॉ. गुप्ता ने सभी जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण करने के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। गांठ की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए हृदय सर्जरी विभागाध्यक्ष से परामर्श लिया गया तथा निश्चेतना विभाग से सर्जरी की फिटनेस प्राप्त की गई। लगभग 3 से 4 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में गांठ को बाएं फेफड़े के एक हिस्से सहित अत्यंत निपुणता से निकाला गया। 

सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को कुछ दिनों के उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उपचार के बाद मरीज समय- समय पर फॉलोअप के लिए चिकित्सालय आ रहा है। 

इस जटिल ऑपरेशन में डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. के. के. साहू, डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सुश्रुत अग्रवाल, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. सोनम एवं डॉ. अनिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर छाती के मध्य भाग में जर्म कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाला दुर्लभ कैंसर है, जो सामान्यतः 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों में पाया जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द शामिल हैं। इस कैंसर का उपचार कीमोथेरेपी एवं सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, जिसमें सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट मिलकर कार्य करते हैं।

यदि इस कैंसर का समय रहते पता चल जाए और उचित उपचार किया जाए तो पांच वर्षीय सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत से अधिक होता है।

10 दिन में 83 हार्ट प्रक्रियाएँ, हृदय रोगियों की सेवा के लिए कार्डियोलॉजी विभाग हाई अलर्ट पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों शीतलहर का दौर जारी है, जिसके कारण हृदयघात (हार्ट अटैक) के मामलों में संभावित वृद्धि को देखते हुए अम्बेडकर अस्पताल का कार्डियोलॉजी विभाग हाई अलर्ट पर है। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों, हृदय रोगियों सहित अन्य किसी को भी हार्ट अटैक का जोखिम अधिक रहता है, ऐसे में किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

डॉ. सोनकर ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हृदय रोग विभाग में 24 घंटे त्वरित एवं निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। गंभीर हृदयघात के मरीजों के लिए आपात एंजियोप्लास्टी की व्यवस्था भी निरंतर जारी है।

तीन ज़िंदगियाँ बचीं

एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआई) के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत 10 दिनों में आपातकालीन अवस्था में आए 3 गंभीर हृदयघात मरीजों की आपात एंजियोप्लास्टी कर सफलतापूर्वक जान बचाई गई है।

01 से 11 दिसंबर 2025 के बीच कार्डियोलॉजी विभाग में की गई प्रमुख प्रक्रियाओं का विवरण निम्नानुसार है :-

एंजियोग्राफी – 52, एंजियोप्लास्टी – 24, पेसमेकर प्रत्यारोपण – 04, टावी (TAVI) प्रक्रिया – 01, आपात एंजियोप्लास्टी – 03 कुल मिलाकर 83 हृदय संबंधी प्रक्रियाएं संपन्न की गईं।

अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि शीत ऋतु में अत्यधिक ठंड से बचें, नियमित स्वास्थ्य की जांच कराते रहें और हृदय से संबंधित किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।


अम्बेडकर अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में एक और विदेशी युवती का सफल ऑपरेशन

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रायपुर, प्रदेश का सबसे बड़ा पं.नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं इससे संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय लगातार अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं से न केवल प्रदेश और देश बल्कि विदेशों से आए मरीजों का भी भरोसा जीत रहा है। अनुभवी डॉक्टरों की टीम एवं उपचार प्राप्त करने की सरलतम प्रक्रिया के कारण यह अस्पताल सर्वाधिक विश्वसनीय संस्थान के रूप में अपनी पहचान व्यापक स्तर पर दर्ज कर चुका है। इसी क्रम में हाल ही में अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में रवांडा (ईस्ट अफ़्रीका) की 20 वर्षीय युवती के लेफ्ट ब्रेस्ट के बेनाइन फाइब्रो एपिथीलियल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में हुए इस ऑपरेशन की विशेषता यह रही कि ब्रेस्ट के ट्यूमर को निकालने के बाद मरीज के भावी जीवन, विशेषकर मातृत्व अवस्था पर इस सर्जरी का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

डॉ. मंजू सिंह के अनुसार वर्तमान में युवती पूरी तरह ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दी जा रही है। ऑपरेशन के संदर्भ में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एक 20 वर्षीय विदेशी युवती लेफ्ट ब्रेस्ट में दर्द की समस्या के साथ अस्पताल के ब्रेस्ट क्लिनिक में आई थी। जहां पर जांच के बाद पता चला कि उसके ब्रेस्ट में बेनाइन फाइब्रो एपिथेलियल ट्यूमर है। मरीज की बायोप्सी हुई। उसके बाद ब्रेस्ट की कॉस्मेसिस (Cosmesis) मेंटेन करते हुए ऑपरेशन किया गया । 

ब्रेस्ट के ट्यूमर एवं उसके आसपास के टिश्यू को हटाते हुए वाईड लोकल एक्सीजन किया गया। इस बात का ध्यान रखा गया कि ब्रेस्ट के शेप और साइज में कोई अंतर नहीं आये। साथ ही साथ सर्जरी के बाद निशान (scar) भी दिखाई नहीं दे। 

पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के कहा है कि चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ न केवल देश बल्कि विदेश से भी मरीज उपचार हेतु आ रहे हैं और स्वस्थ होकर लौट रहे हैं। जनरल सर्जरी विभाग द्वारा युवती का सफल उपचार हमारी चिकित्सा टीम की दक्षता, निष्ठा और समर्पण का प्रमाण है। मैं पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई देता हूँ और विश्वास दिलाता हूँ कि हमारा संस्थान आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता रहेगा।

अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग की इन उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों की सेवाएँ न केवल सुलभ और किफायती हैं बल्कि उच्चस्तरीय गुणवत्तापरक भी हैं। यही कारण है कि अब विदेशी मरीज भी यहाँ उपचार के लिए आ रहे हैं।

अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने जानकारी देते हुए कहा है कि अम्बेडकर अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में ब्रेस्ट क्लीनिक का संचालन नियमित तौर पर किया जा रहा है। यहां पर प्रतिमाह 300 से 400 ब्रेस्ट से संबंधित समस्याओं के केस महिला डॉक्टरों के द्वारा देखे जाते हैं। आवश्यकतानुसार जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है। वर्तमान में यहां जनरल सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट की रीडक्शन सर्जरी भी की जा रही है जिसमें स्तनों के असामान्य आकार को ऑपरेशन के जरिए सामान्य स्थिति में लाया जाता है। 

मरीज का ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. मंजू सिंह के साथ डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ. कृतिका एवं डाॅ. तपिश, एनेस्थीसिया से डॉ. प्रतिभा शाह एवं डॉ. मंजुलता टंडन एवं अन्य शामिल रहे।  गौरतलब है कि इससे पहले भी जनरल सर्जरी विभाग में दक्षिण अफ्रीका की एक युवती का सफल उपचार किया जा चुका है।


अम्बेडकर अस्पताल में एक ही साथ कोरोनरी बाईपास सर्जरी एवं हृदय के तीनों वॉल्व का सफल ऑपरेशन संपन्न

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रायपुर- पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अंतर्गत डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 58 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस सर्जरी में एक साथ ऑफ पंप बीटिंग हार्ट कोरोनरी बाईपास सर्जरी के साथ-साथ हृदय के दोनों वॉल्व का रिपेयर एवं माइट्रल वॉल्व का प्रतिस्थापन किया गया। यह मरीज दुर्ग जिले के जेवरा सिरसा गांव की निवासी हैं, जिन्हें पिछले तीन वर्षों से सांस फूलने और छाती में दर्द की शिकायत थी।

जांच में पता चला  था ब्लॉकेज 

मरीज की जांच में यह सामने आया कि मरीज की कोरोनरी आर्टरी में 95% ब्लॉकेज है तथा हृदय के तीन प्रमुख वाल्व :- माइट्रल, एओर्टिक और ट्राइकस्पिड क्षतिग्रस्त हैं। ईकोकार्डियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोग्राफी के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का निर्णय लिया। इसमें पहले ऑफ पंप बीटिंग हार्ट बाईपास सर्जरी की गई, जिसमें हृदय के धड़कन को बंद किये बिना हार्ट के कोरोनरी आर्टरी की बायपास सर्जरी की गई। इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की सहायता से हृदय और फेफड़ों को अस्थायी रूप से रोका गया। आपरेशन के दौरान हृदय के चैम्बर्स को खोलकर माइट्रल वाल्व को मेटालिक कृत्रिम वाल्व से बदला गया, एओर्टिक वाल्व को विशेष तकनीक से रिपेयर किया गया और ट्राइकस्पिड वाल्व को रिंग लगाकर सुधारा गया।

सर्जरी की ख़ास बातें 

यह एक उच्च जोखिम वाली सर्जरी थी, क्योंकि मरीज की ई.एफ. (ejection fraction) कम तो थी ही एवं एक ही साथ बहुत सारी अन्य सर्जरी भी शामिल थी। इस बाईपास में आर्टेरियल ग्राफ्ट का प्रयोग किया गया, जो अधिक टिकाऊ होता है। एओर्टिक वाल्व रिपेयर केवल चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में संभव होता है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वे शीघ्र ही अस्पताल से डिस्चार्ज लेकर घर लौटने वाली हैं।

मेडिकल कालेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉ. डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम को इस सफल सर्जरी की उपलब्धि के लिए बधाई दी है। गौरतलब है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग को सतत् उत्कृष्ट कार्य, नवाचार एवं मरीजों की सेवा के लिए जाना जाता है।


साउथ अफ्रीका के मरीज की हुई अम्बेडकर अस्पताल में सफल सर्जरी

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 रायपुर ; पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने राजधानी रायपुर में पढ़ाई कर रही साऊथ अफ्रीकी छात्रा के गाल ब्लैडर के स्टोन (पित्ताशय की पथरी) की सफल लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी सर्जरी कर विगत छह महीनों से मरीज को रह-रहकर उठने वाले पेट दर्द की समस्या से निजात दिलाई है। हालांकि यह सर्जरी विभाग में रूटीन में होती है लेकिन विगत दिनों की गई लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी इसलिए विशेष है कि छात्रा ने सर्जरी के लिए अपने देश वापस जाने की बजाय अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों पर भरोसा करते हुए यहीं सर्जरी कराने का निश्चय किया। मरीज के अटेंडर सिबोनेलो सनेलिस जुंगु का कहना है कि भारत के डॉक्टर साउथ अफ्रीका में मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज कर रहे तो हम भी भारत में क्यों नहीं इलाज करा सकते? हमें यहां के डॉक्टरों पर पूरा भरोसा है।

अम्बेडकर अस्पताल


जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के अनुसार, राज्य के निजी विश्वविद्यालय में बीएससी साइकोलॉजी में अध्ययनरत 21 वर्षीय छात्रा को 06 मई 2025 की रात को पेट में तीव्र दर्द की शिकायत हुई। साथ में उल्टी और भूख नहीं लग रही थी। छात्रा निजी अस्पताल में गई जहां उसकी जांच में पित्ताशय की पथरी होने की पुष्टि हुई। मरीज के परिजनों ने विगत कुछ समय से चिकित्सा महाविद्यालय एवं अम्बेडकर अस्पताल में हुई कई सफल ऑपरेशन के बारे में सुना था। इसके साथ ही दक्षिण अफ्रीका के कई अस्पतालों में भारतीय डॉक्टर सेवा दे रहे हैं जिससे मरीज के घरवालों का विश्वास भी यहां के डॉक्टरों के प्रति बरकरार है। अंततः उनके घरवालों को विश्वविद्यालय द्वारा सूचना दी गई और उनके अटेंडर ने अम्बेडकर अस्पताल का चयन किया और मरीज को यहां लेकर आये। जहां पर सर्जरी विभाग में मरीज का उपचार चला। सभी जांचें हुईं और मरीज की लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी मिनिमल इनवेसिव सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद मरीज का कहना है कि वह पहले से बहुत अच्छा महसूस कर रही है और उसे अब पेट में दर्द भी नहीं हो रहा है।

डॉ. मंजू सिंह के अनुसार, जब ये छात्रा यहां भर्ती हुई तब हमने नियमानुसार सबसे पहले इसकी सूचना चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर को दी। डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने मरीज की सर्जरी से संबंधित समस्त औपचारिकताओं को अतिशीघ्र पूर्ण कराकर विदेशी छात्रा के इलाज को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। साथ ही छात्रा के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। सर्जरी के बाद मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गई है।

सर्जरी विभाग में नियमित रूप से होती है लेप्रोस्कोपिक सर्जरी - डॉ. सोनकर

अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर (जो स्वयं सर्जरी विभाग के सर्जन हैं) के अनुसार सर्जरी विभाग में सभी प्रकार के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी जैसे - हर्निया सर्जरी, हाइडैटिड सिस्ट, लेप्रोस्कोपिक एपेंडेक्टोमी, डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपिक, लेप्रोस्कोपिक रेक्टोपेक्सी, लेप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी, लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी, लेप्रोस्कोपिक वेंट्रल और इंसिज़नल हर्निया सर्जरी नियमित रूप से होते हैं। ये सभी सर्जरी शासन की स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत निशुल्क होते हैं।

क्या है लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी

लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें गाल ब्लैडर (पित्ताशय) को शरीर से हटाया जाता है। यह प्रक्रिया लेप्रोस्कोप नामक एक पतली कैमरा लगी हुर्द ट्यूब की सहायता से की जाती है जो पेट के भीतर का दृश्य स्क्रीन पर दिखाती है। पित्ताशय की पथरी हो जाने पर गाल ब्लैडर को हटाया जाता है। मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। एक चीरे से लेप्रोस्कोप डाला जाता है और अन्य चीरे से सर्जिकल उपकरण। स्क्रीन पर देखते हुए गाल ब्लैडर को काटकर निकाल दिया जाता है। चीरे बंद कर टांके लगाए जाते हैं। इस सर्जरी में कम चीरे, कम दर्द, जल्दी रिकवरी हो जाती है और अस्पताल में कम समय लगता है। लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है जब तक की मरीज को कोई अन्य जटिलता न हो।

मरीज का ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ.मंजू सिंह के साथ डॉ.अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ.अंजलि जालान, डॉ. आयुषी गोयल, डॉ.पूजा जैन एवं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रतिभा शाह एवं डॉ. मंजुलता टंडन एवं शामिल रहीं।

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