Media24Media.com: Israel US Iran War : भारत के पड़ोस तक पहुंची खाड़ी की जंग, श्रीलंका के पास अमेरिकी हमला, 87 की मौत

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Israel US Iran War : भारत के पड़ोस तक पहुंची खाड़ी की जंग, श्रीलंका के पास अमेरिकी हमला, 87 की मौत

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 Israel US Iran War : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब हिंद महासागर क्षेत्र तक असर दिखाने लगा है। युद्ध के छठे दिन एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। यह हमला Sri Lanka के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ। इस घटना में कम से कम 87 ईरानी सैनिकों की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।


अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो दागे, जिससे जहाज तुरंत डूब गया। उन्होंने इसे “शांत लेकिन निर्णायक” सैन्य कार्रवाई बताया। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इस ऑपरेशन में मार्क-48 प्रकार के भारी टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया है।

क्या हुई थी पूरी घटना?

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 5 बजे जहाज से संकट संदेश मिला। इसके बाद Sri Lanka Navy ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार जहाज से पहले विस्फोट की सूचना मिली थी। चूंकि घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई लेकिन यह श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र में आता है, इसलिए वहां की नौसेना को राहत अभियान चलाना पड़ा।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अब हिंद महासागर क्षेत्र तक फैल सकता है। इससे India की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

पूर्व नौसेना प्रमुख Arun Prakash ने कहा कि श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत का डूबना बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

युद्ध को लेकर भारत ने क्या कहा?

भारत ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने तथा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में शांति और संवाद ही समाधान का रास्ता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी लगातार कर रहा है। अब तक युद्ध प्रभावित देशों से सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

रणनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और भारत के बीच हुए LEMOA समझौते के कारण इस क्षेत्र में भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ है, इसलिए इसे सीधे भारत के क्षेत्र से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।

फिर भी इस घटना ने यह संकेत दे दिया है कि मध्य-पूर्व का संघर्ष अब हिंद महासागर तक असर डाल सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार दोनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

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