Media24Media.com: शुक्रवार को कैसे रखें मां संतोषी का व्रत, जानिए व्रत-विधि और महत्व

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शुक्रवार को कैसे रखें मां संतोषी का व्रत, जानिए व्रत-विधि और महत्व

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शुक्रवार के दिन मां संतोषी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता (Santoshi Mata vrat vidhi) और वैभवलक्ष्मी देवी (Vaibhavalakshmi Devi) का भी पूजन किया जाता है। इसीलिए शुक्रवार का व्रत 3 तरह से किया जाता है। इन तीनों व्रतों की विधियां भी अलग-अलग होती हैं। वहीं आज हम आपकों संतोषी मां (Santoshi maa) के व्रत की विधि बताने वाले हैं।









यह है धार्मिक मान्यता





धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माता संतोषी भगवान श्रीगणेश (Lord Shree Ganesh) की पुत्री हैं। संतोष हमारे जीवन में बहुत जरूरी है। संतोष ना हो तो इंसान मानसिक और शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो जाता है। संतोषी मां हमें संतोष दिला हमारे जीवन में खुशियों का प्रवाह करती हैं।









मान्यता के मुताबिक सच्चे मन से माता का व्रत करने वाले व्यक्ति के सभी दु:ख दर्द दूर हो जाते है। बता दें कि शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत करने के साथ ही उनकी कथा का पाठ करना भी काफी जरूरी होता है। मान्यता के अनुसार कथा पढ़े बिना संतोषी माता के व्रत को अधूरा माना जाता है।





संतोषी मां के व्रत का महत्व (Importance of vrat for Santoshi Maa)





संतोषी माता की अनुकम्पा से व्रत करने वाले स्त्री-पुरुषों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माता संतोषी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतानादि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है। वहीं इस व्रत से अविवाहित लड़कियों को जल्द सुयोग्य वर मिलता है. यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है।









व्रत विधि (Santoshi Mata vrat vidhi)





  • सूर्योदय से पूर्व उठें।
  • घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
  • घर के ही किसी पवित्र स्थान पर संतोषी मां की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • पूरी पूजन सामग्री और किसी बड़े पात्र में शुद्ध जल भरकर रखें।
    जलभरे पात्र पर गुड़ और चने से भरकर दूसरा पात्र रखें।
  • संतोषी मां की विधि-विधान से पूजा करें।
  • पूजा करने के बाद संतोषी मां की कथा सुनें।
  • कथा सुननें के बाद आरती कर सभी को गुड़-चने का प्रसाद बांटें और खुद भी खाएं.
  • आखिर में बड़े पात्र में भरे जल को घर में जगह-जगह छिड़क दें और बाकी बचे जल को तुलसी के पौधे में डाल दें।




व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये काम





  • इस दिन व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष खट्टी चीज को बिल्कुल भी न छूए और न ही कोई खट्टी चीज खाएं।
  • खाने में कोई खट्टी चीज, अचार और खट्टा फल नहीं खाना चाहिए।
  • व्रत करने वाले स्त्री-पुरुषों के परिजन भी इस दिन खट्टे का सेवन बिल्कुल भी न करें।




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पौराणिक मान्यता





पौराणिक मान्यता के मुताबिक शुक्रवार के दिन मां संतोषी की पूजा करते समय अगर उनके मंत्रों पाठ मन लगाकर किया जाए तो माता संतोषी जल्द ही प्रसन्न होकर घर को धन-धान्य से भर देती हैं.









व्रत के दिन इन मंत्रों का करें उच्चारण





  • ॐ श्री संतोषी महामाया गजानंदम दायिनी
  • शुक्रवार प्रिये देवी नारायणी नमोस्तुते!
  • जय माँ संतोषी देवी नमो नमः




संतोषी मां महामंत्र





  • श्री संतोषी देव्व्ये नमः
  • ॐ श्री गजोदेवोपुत्रिया नमः
  • ॐ सर्वनिवार्नाये देविभुता नमः
  • ॐ संतोषी महादेव्व्ये नमः
  • ॐ सर्वकाम फलप्रदाय नमः
  • ॐ ललिताये नमः




इस तरह करें उद्यापन





16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें। इसके बाद अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें। विसर्जन के दिन विधि विधान से संतोषी मां की पूजा कर 8 बच्चों (लड़कों) को खीर-पूरी का भोजन कराएं। साथ ही दक्षिणा और केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें। आखिर में खुद भी भोजन ग्रहण करें।






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