Media24Media.com: राहुल साहू

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राहुल साहू को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशीलता की हुई सराहना

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नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय दिव्यांग सलाहकार बोर्ड की बैठक में छत्तीसगढ़ की समाज कल्याण विभाग की मंत्री अनिला भेंड़िया ने शिरकत की। इस मौके पर बोर्ड के सदस्यों द्वारा बोरवेल में गिरे एक दिव्यांग बच्चे यानी राहुल साहू के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से की गई पहल की सराहना की गई। बैठक में मंत्री भेंड़िया ने जिला पुनर्वास केन्द्रों को जिला अस्पताल के अनुरूप विकसित करने, कोरोना से प्रभावित दिव्यांगजनों के ऋण माफ करने समेत अन्य मुद्दों की ओर बोर्ड का ध्यान आकर्षित कराया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने की। इस मौके पर विभिन्न राज्यों के मंत्री भी उपस्थित रहे।

बोर्ड की बैठक में मंत्री अनिला भेंड़िया ने कहा कि जिला पुनर्वास केंद्र दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत संवेदनशील और आवश्यक संस्थान है। इसे जिला चिकित्सालय के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा अगर केंद्र सरकार सहयोग देती है तो इसके लिए राज्य शासन निशुल्क भूमि और संसाधन उपलब्ध कराएगी। बैठक में मंत्री अनिला भेंड़िया ने दिव्यांगजनों से दबाव डाल कर ऋण की राशि वसूलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कोविड जैसी आपदा में कई दिव्यांगजनों के रोजगार प्रभावित हुए हैं। नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंशियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा राज्य एजेंसियों पर दबाव बनाकर राशि की वसूली की जा रही है। ऐसे प्रकरण में उन्होंने ऋण राशि समाप्त किए जाने की मांग की।

मंत्री भेंड़िया ने जानकारी दी कि दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक स्थलों को सुगम बनाने के लिए प्रदेश की राजधानी में 100 से अधिक सार्वजनिक भवनों को बाधा रहित बनाया गया है। साथ ही नया रायपुर को दिव्यांगजनों के लिए पूर्णत बाधारहित विकसित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन के समन्वय से अधिक से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन कराया जाए, ताकि प्रदेश के दिव्यांगजनों को इसका अधिक लाभ मिल सके। बैठक में छत्तीसगढ़ से समाज कल्याण विभाग के अधिकारी राजेश तिवारी समेत अन्य शामिल रहे।

CM भूपेश को राहुल की माँ बोलीं-आप हमारे लिए हैं भगवान !

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रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राहुल को देखने जब बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल पहुँचे तो भावनाओं का समंदर उमड़ पड़ा । जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डॉक्टर, स्टाफ, हर किसी की आंखें नम हो गयीं। वजह, मुख्यमंत्री को देखकर राहुल की माँ गीता के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे । गीता ने मुख्यमंत्री से कहा-आप हमारे लिये भगवान समान हैं । आपकी टीम ने पत्थरों को चीरकर मेरे बेटे की जान बचायी है । किसी ने ना भूख देखी, ना प्यास और ना ही एक पल के लिए कोई सोया । जब तक राहुल बाहर नहीं आ गया सभी लोग ऐसे लगे रहे जैसे उनका बेटा फंसा हो । आप सब को, आपके बच्चों को  हमारा परिवार जीवन भर दुआएं देगा । 

मुख्यमंत्री करीब 5 मिनट तक आईसीयू में रुके और मां गीता की बातें ध्यान से सुनते रहे । पूरे समय गीता के आंसू नहीं रुके और हाथ जोड़े खड़ी रहीं । मुख्यमंत्री ने राहुल की मां के सर पर स्नेह पूर्वक हाथ रखकर सांत्वना दी और कहा कि ये हमारा फर्ज था । हमारे लिए एक एक नागरिक जान का अनमोल है । श्री बघेल ने राहुल से भी बात करने की कोशिश की और हालचाल जाना । 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में पूरी रेस्क्यू टीम ने असाधारण काम किया है । लेकिन ये हमारा फर्ज था । श्री बघेल ने  कहा कि राहुल की पढ़ाई की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी , आप लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है । मुख्यमंत्री ने डॉक्टर्स को राहुल का बेहतर इलाज करने के निर्देश भी दिये ।

Braking News: 5 दिन बाद राहुल साहू को बोरवेल के गड्ढे से निकाला गया बाहर, सांप और मेंढक के बीच था बच्चा

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जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल के गड्ढे में फंसे हुए राहुल साहू को 105 घंटे और 5 दिन के बाद रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया है। जांजगीर कलेक्टर जीतेंद्र शुक्ला ने कहा है कि टीम ने 60 फीट नीचे फंसे राहुल को टनल के जरिए बाहर निकाल लिया है। कलेक्टर जीतेंद्र शुक्ला ने बताया कि राहुल की स्थिति ठीक है। उन्होंने बताया कि राहुल जिस जगह पर था वहां पर एक सांप और मेंढक भी था। इसके बाद भी बच्चा निडरता के साथ लड़ता रहा। पांच दिन तक जिला प्रशासन, पुलिस से लेकर NDRF, सेना, SDRF सहित कई सुरक्षा संस्थानों के सैकड़ों लोग राहुल के रेस्क्यू के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे थे।

NDRF जवानों को आराम देने के लिए जवानों ने कमान संभाली थी। यह एक ज्वाइंट ऑपरेशन है और इसमें ऐसा ही किया जाता है। सवाल यहां बच्चे की जिंदगी का था, ऐसे में चट्‌टान तोड़ने के लिए सख्त रुख नहीं अपना सकते थे। राहुल की लोकेशन का अंदाजा लगाकर अब चट्टान तोड़ने के बाद सेना के जवान हाथों से मिट्टी निकाल रहे थे और कोहनी के सहारे आगे बढ़ रहे थे। धीरे-धीरे मिट्टी हटाते-हटाते आखिरकार वह क्षण आ ही गया जब बनाई गई टनल बोरवेल से मिल गई। वहां पहली बार अंदर चट्टान के हिस्से पर सोए राहुल की पहली झलक सेना के जवानों को मिली। वहां से बाहर जानकारी दी गई और बाहर जमा भीड़ भारतमाता की जय के नारे लगाने लगी।

मूक-बधिर है बच्चा

राहुल साहू का शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद से कुछ पता नहीं चला। जब घर के ही कुछ लोग बाड़ी की तरफ गए तो राहुल के रोने की आवाज आ रही थी। गड्‌ढे के पास जाकर देखने पर पता चला कि आवाज अंदर से आ रही है। बोरवेल का गड्‌ढा 80 फीट गहरा है। ये भी बताया गया है कि बच्चा मूक-बधिर है, मानसिक रूप से काफी कमजोर है, जिसके कारण वह स्कूल भी नहीं जाता था। घर पर ही रहता था। राहुल अपने मां-बाप का बड़ा बेटा है। उसका छोटा भाई 2 साल छोटा है। पिता की गांव में बर्तन की दुकान है। CM भूपेश बघेल इस ऑपरेशन में नजर बनाएं हुए थे। 

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