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भाजपाइयों की गुंडागर्दी से मकान मालिक घर बेचने को मजबूर, मामला दर्ज

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भोपाल : मध्यप्रदेश के इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र के क्लर्क कालोनी का है. यहां पर दो परिवारों में बीच एक मामूली सी बात को लेकर जमकर झगड़ा हुआ. दरअसल यहां पर सुशील यादव और उनके भतीजे चीकू यादव रहते हैं इन्ही के पड़ोस में थोड़ी ही दूर पर मुनमुन मिश्रा रहते हैं. दोनों ही पास में बने मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रम करवाते रहते हैं. कुछ वक्त पहले ही सुशील यादव और उनके भतीजे ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी ही दीवार में कील ठोक रहे थे. 


पुलिस कार्रवाई पर खड़े किए सवाल कील ठोकने की वजह से बाजू में रहने वाले मुनमुन मिश्रा की दीवार हिल रही थी. जिसके बाद दोनों पक्षों का इस मुद्दें पर विवाद शुरू हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई. दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में मामला दर्ज भी कराया गया. जब लंबे वक्त तक पुलिस की ओर से पुख्ता कार्रवाई नहीं की गई तो मुनमुन मिश्रा ने अपने घर पर पोस्टर लगाकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं. मुनमुन मिश्रा ने अपने घर पर बेचने के लिए पोस्टर लगाया है. हालांकि इस पोस्टर पर उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सीधे सवाल खड़े न करते हुए राजनीति मुद्दा बनाया है. 

राजनीति से जुड़ रहे तार मुनमुन ने पोस्टर पर लिखा है कि वह बीजेपी के द्वारा पोषित गुंडों की वजह से मकान बेचना चाहते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने इस पोस्टर पर खुद का नाम लिखने की जगह अपना नंबर देते हुए पुराने जनसंघी लिखा हुआ है. दरअसल मुनमुन मिश्रा का आरोप है कि उनके पड़ोसी सुशील यादव क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोल के समर्थन पर हैं और इसलिए पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. जब मामला पुलिस के सामने आया तो पुलिस ने दोनों ही पक्षों को चेतावनी दी है कि अगर दोनों के बीच अब विवाद हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी और जेल भेजा जाएगा.

एमआईजी पुलिस ने अजय मिश्रा पर मारपीट का मामला दर्ज किया है। वे खुद को पुराना जनसंघी बताते हैं और ये बात मकान बेचने वाले बोर्ड पर भी लिखी है। बताते हैं कि यह घटना गुरुवार दोपहर में एलआईजी कॉलोनी की है। अजय मिश्रा ने सुधीर यादव के खिलाफ केस दर्ज करवाया। उन्होंने पुलिस को बताया कि सुशील के साथ उसका भाई सुधीर, भतीजा चीकू यादव सहित कई गुंडे थे।



आम खाने के बाद बिगड़ी महिला की तबियत, अस्पताल में मौत

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इंदौर : मध्यप्रदेश के इंदौर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला की आम खाने के बाद तबीयत खराब हो गई। घरवालों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


जानकारी के मुताबिक, मामला इंदौर के राजेंद्र नगर थाना के बिजलपुर का है। यहां रहने वाले अर्चना अलेरिया ने देर शाम खाना खाने के बाद आम खाए थे। इसके बाद अचानक ही उसकी तबीयत खराब होने लगी। सिर में काफी तेज दर्द होने लगा। काफी देर बाद भी जब उसे आराम नहीं मिला तो घरवाले इलाज के लिए अस्पताल ले गए। जहां उसका बीपी लगातार कम होते जा रहा था फिर आचानक ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला

राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के बिजलपुर में रहने वाली अर्चना अलेरिया नाम की महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई. महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. महिला के ससुर बंसीलाल अटेरिया ने बताया कि उनकी बहू अर्चना ने दोपहर में भोजन किया और उसके बाद आम खाए थे. शाम 5 बजे से उसका सिरदर्द होने लगा और चक्कर आने लगे. उसके बाद उसे हास्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई.

सुसर बोले-आम जहरीला हो सकता है

इधर इस मामले में जब लोगों और पुलिस ने ससुराल पक्ष से जानकारी लेना चाही तो अर्चना अलेरिया के ससुर बंसीलाल अलेरिया बोले कि आजकल फलों को जहरीले केमिकल से पकाया जाता है. जिस दिन ये घटना हुई उसी दिन हमारे मोहल्ले में कुछ मामले और भी सामने आए थे इसलिए लग रहा है संभवतः जहरीला आम खाने के बाद बहू की तबीयत बिगड़ी है.

पुलिस कर रही जांच

इधर राजेंद्र नगर थाना के सहायक उप निरीक्षक राघवेंद्र सिंह चौहान ने बताया 23 साल की अर्चना अटेरिया ने 8 जुलाई को आम खाए थे. उसके बाद 10 जुलाई को उसकी मौत हो गई. पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. हालांकि पुलिस पूरे मामले को संदिग्ध मान रही है.

पेड़ से टकराने के बाद कार में लगी आग, जिंदा जल गए एक ही परिवार के 3 लोग समेत 4 की मौत

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 मध्यप्रदेश। हरदा जिले में एक कार के पेड़ से टकराने के बाद उसमें आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने फायर ब्रिगेड की मदद से आग को बुझाया लेकिन तबतक 4 लोगों की जान चली गई।


टिमरनी थाना इलाके के पोखरनी गांव के पास बुधवार सुबह एक कार बेकाबू होकर पेड़ से टकरा गई। इसके बाद उसमें आग लग गई जिसके कारण गाड़ी में बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। कार में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 3 एक ही परिवार के सदस्य थे। बताया जा रहा है कि मृतक राकेश कुशवाहा पेट्रोल पंप पर काम करता था।

उसका छोटा भाई अखिलेश चारखेड़ा में फोटो स्टूडियो चलाता था। उन्हीं के गांव का रहने वाला आदर्श चौधरी भी फोटोग्राफी का काम करता था। आदर्श और अखिलेश फोटोग्राफी का काम करने के लिए सीहोर के दीपगांव गए थे। वहां से बुधवार सुबह लौटते समय इन लोगों ने राकेश और उसकी पत्नी शिवानी को साथ ले लिया था। राकेश की 6 माह पूर्व ही नसरुल्लागंज निवासी शिवानी से शादी हुई थी।

शवों को मर्चुरी में भिजवाया गया

घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने फायर टीम को मौके पर बुलाया। कार में लगी आग को बुझाया गया। शवों को मर्चुरी में भिजवाया गया है। मामले में जांच की जा रही है।

काफी तेज थी कार की स्पीड

जानकारी के मुताबिक, कार की स्पीड काफी ज्यादा थी। अचानक उसका टायर फट गया और अनियंत्रित कार सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। पेड़ से टकराते ही कार में आग लग गई। कार में सवार चार लोग जिंदा जल गए। सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि कार में बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला।

 

खेलो इंडिया यूथ गेम्स: छत्तीसगढ़ के मलखंब खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक जीतकर राज्य का नाम किया रोशन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मलखंब खिलाड़ियों ने मध्यप्रदेश के उज्जैन में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022’ में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल ने छत्तीसगढ़ मलखंभ टीम के सभी खिलाड़ियों, कोच, मैनेजर एवं पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है।

उल्लेखनीय है कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022 में 7 फरवरी को सर्वश्रेष्ठ खेल का प्रदर्शन करते हुए 201.25 अंक अर्जित कर छत्तीसगढ़ के महिला एवं पुरूष खिलाड़ियों ने टीम चैंपियन का खिताब अपने नाम करते हुए इतिहास रच दिया था। खेलो इंडिया यूथ गेम्स की व्यक्तिगत उपकरण रोप मलखंभ में 9 फरवरी को बालक वर्ग के खिलाड़ी राकेश कुमार वरदा ने 8.50 अंक लेकर रजत और संतोष सोरी ने 8.30 अंक  के साथ कांस्य पदक जीता है।

आल ओव्हर इंडिया उपकरण चैंपियनशिप में शुक्रवार 10 फरवरी को राकेश कुमार वरदा ने 8.85 अंक के साथ स्वर्ण पदक तथा मोनू नेताम ने 8.70 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ के महिला एवं पुरूष मलखंभ खिलाड़ियों ने बेहतर खेल प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण, 1 रजत और 14 कांस्य पदक जीतकर कुल 16 पदकों की झड़ी लगाकर छत्तीसगढ़ की झोली भर दी।

पदक विजेता खिलाडियों के नाम इस प्रकार है-बालक वर्ग में मानू ध्रुव, मोनू नेताम, श्यामलाल पोटाई, राकेश वरदा, संतोष सोरी और रविन्द्र कुमार। बालिका वर्ग में सरिता पोयाम, दुर्गेश्वरी कुमेटी, संताय पोटाई, जयंती कचलाम, हिमांशी उसेंडी और शिक्षा दिनकर शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वन मेला : छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के मध्य 34.50 करोड़ रूपए का व्यवसायिक अनुबंध

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रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय वन मेला में लघु वनोंपज आधारित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ और मध्यप्रदेश लघु वनोपज संघ के मध्य 6 करोड़ रूपए का व्यवसायिक अनुबंध हुआ। छतीसगढ़ वनोपज संघ के विशेष प्रबंध संचालक एस.एस. बजाज और विन्ध हर्बल्स की ओर से एमपीएमएफपी के सीईओ डॉ. दिलीप कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा 28 करोड़ 50 लाख रूपये का एमएफपीपीएआरसी और विभिन्न संस्थाओं के बीच व्यापारिक अनुबंध भी किए गए। इस प्रकार कुल 34.50 करोड़ रूपए का एमओयू हुआ। यह अंतर्राष्ट्रीय वन मेला मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 20 से 26 दिसम्बर तक आयोजित किया गया।

लघु वनोंपज आधारित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में बस्तर फूड छतीसगढ़ से महुआ एक्सपोर्ट के लिये एमओयू हुआ। इससे आने वाले समय में जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में शामिल प्राथमिक संग्राहक और उत्पादकों की आर्थिक समृद्धि में मददगार साबित होंगे। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन मध्यप्रदेश के सेवा निवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही.आर. खरे के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इसमें प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से 140 सहभागी ने प्रत्यक्ष रूप से और 300 प्रतिभागी वीडियो कॉन्फ्रेंस से संवाद किया गया। छत्तीसगढ़ लघु वन उपज संघ के विशेष प्रबंध संचालक एस. एस. बजाज ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिक संस्था मैसूर के साथ मिल कर महुआ से गुड़ बनाने पर अनुसंधान कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने मध्यप्रदेश से लाए जाएंगे बाघ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश से बाघ लाए जाएंगे। जिन्हें अचानकमार टायगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही साथ बारनवापारा अभ्यारण्य में भी बाघों के लिए अनुकूल परिस्थितियों के चलते टायगर छोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत किए गए इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही साथ वन्य प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण, वन्य प्राणी मानव द्वंद रोकने के अनेक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वन मंत्री मोहम्मद अकबर, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा और डॉ. लक्ष्मी धु्रव बैठक में उपस्थित थीं।



मुख्यमंत्री बघेल ने वन्य प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वनों की 10 किलोमीटर की परिधि के गांवों में आजीविका मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने, वन्य प्राणियों की सुरक्षा की दृष्टि से वन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क को मजबूत बनाने, हाथी मानव द्वंद रोकने जागरूकता अभियान को गति देने और वन्य प्राणियों के लिए पानी और चारागाह विकसित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में इनसे संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या चार गुना करने के लिए ग्लोबल टायगर फोरम (जीटीएफ) द्वारा प्रस्ताव दिया गया था, जिसके क्रियान्वयन की अनुमति बैठक में दी गई। जिसके तहत अचानकमार टायगर रिजर्व में बाघ मध्यप्रदेश से लाकर छोड़े जाएंगे। 

अधिकारियों ने बताया कि अचानकमार टायगर रिजर्व में वन्यप्राणियों के लिए जल स्त्रोतों, चारागाह को विकसित किया गया है, जिससे शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या में वृद्धि हो सके। छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा अभ्यारण्य में फिर से टायगरों को पुनर्स्थापित करने के लिए टायगर छोड़ने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक सहमति दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बारनवापारा अभ्यारण्य में वर्ष 2010 तक टायगर पाए जाते थे।  टायगर रि-इंट्रोडक्शन एवं टायगर रिकव्हरी प्लान के तहत ख्याति प्राप्त वन्यप्राणी संस्थान से हैबिटेट सुटेबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी, जिसकी स्वीकृति राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली से प्राप्त होने के बाद इस अभ्यारण्य में बाघ पुनर्स्थापना का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि शाकाहारी वन्य प्राणियों को विभिन्न प्रजनन केन्द्रों एवं अन्य स्थानों से लाकर प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों के प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 49 चीतल, बारनवापारा अभ्यारण्य में 39 काला हिरण, गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में 113 चीतल, अचानकमार टायगर रिजर्व में 20 चीतल, तमोर पिंगला अभ्यारण्य में 14 चीतल विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों के नैसर्गिक रहवास में शाकाहारी वन्यप्राणियों को छोड़ा गया है।  बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में हाथियों के लिए चारागाह, पानी आदि की व्यवस्था करने से हाथी मानव द्वंद की घटनाओं में काफी कमी हुई है। लगभग 11 हजार 314 हेक्टेयर चारागाह विकसित किए गए हैं। लगभग 80 हजार हेक्टेयर में खाद्य घास की प्रजातियां लगाई गई हैं। वन्यप्राणियों के पेयजल के लिए 12 स्टॉप डेम, 40 तालाब, 65 अर्दनडेम, 98 तालाबों का गहरीकरण किया गया है, इसी तरह 52 नालों में भू-जल संवर्धन और भू-जल संरक्षण के लिए संरचनाएं निर्मित की गई हैं।

 छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में भारत माला परियोजना अंतर्गत प्रस्तावित रायपुर-विशाखापटनम इकोनॉमिक कॉरिडोर निर्माण के लिए उदन्ती-सीतानदी टायगर रिजर्व में केशकाल एवं कांकेर वनमंडल के लगभग 64 वन क्षेत्र तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा चिन्हांकित इन्द्रावती-उदन्ती-सीतानदी-सुनाबेड़ा टायगर कॉरिडोर के 7 वन कक्षों से गुजरने वाले लगभग 3.5 किलोमीटर राजमार्ग में प्रस्तावित इकानॉमिक कॉरिडोर निर्माण के लिए अनुमति दी गई। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा जाएगा। इस तरह भोपालपटनम से जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में चिंतावागु नदी पर नवीन पुल निर्माण की अनुमति दी गई। यह प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को अनुमति के लिए भेजा जाएगा। इस नवीन पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण इन्द्रावती टायगर रिजर्व के बफर जोन के 1.177 हेक्टेयर रकबे के अंतर्गत आता है।

बैठक में सूरजपुर के ग्राम नेवारी पारा से ग्राम खोड़ में विद्युतीरकण हेतु 0.35 हेक्टेयर वन भूमि और सूरजपुर के ग्राम टमकी से कोटवारीपारा तक 5.148 कि.मी. विद्युतीकरण करने हेतु 0.88 हेक्टेयर के व्यपवर्तन, लहपीपारा ग्राम पंचायत शोभा में 11 केव्ही विद्युत लाईन विस्तारीकरण, राजापड़ाव क्षेत्र के शुक्लाभाठा से झोलाराव तक तथा केरापारा से भाठापानी में 11 केव्ही विद्युत लाईन विस्तारीकरण, ग्राम लिलांज में विद्युतीकरण कार्य हेतु एनओसीफरसेगढ़-पिल्लूर-सेण्ड्रा-चेरपल्ली मार्ग का डी.जी.पी.एस सर्वे कार्य की अनुमति दी गई। इस मार्ग पर छत्तीसगढ़ की सीमा पर इन्द्रावती नदी पर एक सेतु तथा छत्तीसगढ़ की ओर आने वाले पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाना है।

वन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क मजबूत होगा

बैठक में वन क्षेत्रों में बेहतर संचार की सुविधा के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने और मोबाइल टॉवर लगाने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इससे जहां वन प्राणी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। वहीं वन क्षेत्रों के गांवों में पीडीएस सिस्टम, धान खरीदी, वृद्धावस्था पेंशन, बैंकिंग और ऑनलाइन पढ़ाई में आसानी होगी। बैठक में वनभैंसों में कृत्रिम गर्भाधान करने की अनुमति भी प्रदान की गई। इस प्रस्ताव के अनुसार वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया तथा  LaCONES, CCMB हैदराबाद के विशेषज्ञों एवं वन विभाग में पदस्थ पशु चिकित्सकों के देख-रेख में वीर्य निकालने का कार्य किया जाएगा तथा इस उपयोग मादा वनभैंसों के कृत्रिम गर्भाधान हेतु किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय शुक्ला, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) पी.व्ही. नरसिंहराव सहित छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। 

विशेष आलेख : न्याय के चार साल : प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण: 6 नए जिलों की सौगात

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रायपुर। छत्तीसगढ़ मध्य भारत का हिस्सा है, जिसकी राजधानी रायपुर है। छत्तीसगढ़ पहले मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था 1 नवम्बर सन् 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ। छत्तीसगढ़ 1,35,192 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह प्रदेश पहाड़ों, नदियों, घने जंगलों और प्राचीन मंदिरों के लिए भी विख्यात है यहां की बोली भाषा हो या लोक संस्कृति, पर्व भी बड़े अद्भुत हैं। यह आदिवासी बहुल राज्य है और यहां की अर्थव्यवस्था वनोपज कृषि पर निर्भर है। 17 दिसम्बर 2018 को छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भूपेश बघेल ने किसानों, आदिवासियों, ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार अनेक योजनाएं शुरू की



साथ ही प्रदेश में प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण की दिशा में भी अनेक कार्य किए। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ अंचल में रायपुर दुर्ग, राजनांदगांव रायगढ़, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा जिले ही अस्तित्व में थे छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले इस अंचल में वर्ष 1998 को बिलासपुर जिले के कुछ हिस्से तथा राजनांदगांव जिले के हिस्से के साथ कबीरधाम जिला बनाया गया। फिर बिलासपुर जिले के कुछ हिस्से को तोड़कर कोरबा, जांजगीर-चांपा जिला बनाया गया। इसी तरह रायपुर जिले से महासमुद, धमतरी को नया जिला का दर्जा मिला। बस्तर जिले से कांकेर, दंतेवाड़ा और सरगुजा जिले से कोरिया जशपुर को अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार ने नया जिला बनाया था।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश में मात्र 16 जिले बस्तर कांकेर, दंतेवाड़ा, रायपुर, महासमुंद, धमतरी दुर्गे, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कोरबा, सरगुजा, कोरिया और जशपुर ही थे। वर्ष 2007 में जिला बस्तर व कांकेर के कुछ भाग को जोड़ते हुए नारायणपुर जिला और दंतेवाड़ा के कुछ भाग को शामिल करते हुए बीजापुर जिला बनाया गया। इस तरह 16 से बढ़कर 18 जिले वाला छत्तीसगढ़ राज्य कहलाया। वर्ष 2012 में 9 जिलों का गठन हुआ इसमें बस्तर के कुछ भाग को जोड़ते हुए कोंडागांव, दंतेवाड़ा जिले के कुछ भाग को सुकमा जिले में शामिल किया गया।

इसी तरह रायपुर जिले में आने वाले बलौदाबाजार-भाटापारा एवं गरियाबंद को जिला बनाया गया। बिलासपुर जिले के अंतर्गत मुंगेली को जिला बनाया गया तो दुर्ग जिले से बालोद व बेमेतरा को नए जिले का दर्जा मिला। सरगुजा जिले से बलरामपुर-रामानुजगंज एवं सूरजपुर को जिला बनाया गया। इस तरह प्रदेश में जिलों की संख्या 18 से बढ़कर 27 हो गई।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रशासिनक विकेन्द्रीकरण करते हुए आम लोगों को जो राहत दी है यह काबिले तारीफ है। मुख्यमंत्री बने महज 14 माह ही हुए थे कि अंचल की बहुप्रतीक्षित मांग य सपने को पूरा करते हुए गौरेला पेंड्रा मरवाही को फरवरी 2020 में जिला बनाकर एक इतिहास रच दिया। 

इस तरह जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा मरवाही) जिला बनने से करीब साढ़े तीन लाख लोगों को शासन-प्रशासन की विभिन्न योजनाओं, कार्याे, जरूरतों को पूरा करने के लिए समय की बचत, शारीरिक, मानसिक व आर्थिक परेशानियों से छुटकारा भी मिला। सामान्य भाषा में विकेन्द्रीकरण का अर्थ है कि शासन सत्ता को एक स्थान पर केन्द्रीत करने के बजाय उसे स्थानीय स्तर पर विभाजित किया जाए ताकि आम आदमी की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित हो सके और वह अपने हितों व आवश्यकताओं के अनुरूप शासन संचालन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके। यही सत्ता विकेन्द्रीकरण का मूल आधार हैअर्थात् आम जनता तक शासन सत्ता की पहुंच को सुलभ बनाना ही विकेन्द्रीकरण है। 

इस तरह 48 माह के मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण को और तबज्जो देते हुए गौरेला पेन्ड्रा-मरवाही के अलावा मोहला-मानपुर-चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गडई सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर तथा सक्ती को नए जिले बनाकर क्षेत्रवासियों को एक महत्वपूर्ण सौगात दी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिला निर्माण तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि नई तहसीलों एवं अनुविभागों का भी गठन किया। विगत चार सालों में 77 तहसीलों तथा 19 नए अनुविभागों का गठन करके अंचल के जरूरतों को पूरा किया और आम लोगों की परेशानियों को दूर भी किया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महज चार सालों में जिन 6 जिलों का निर्माण किया है, वहां रहने वाले आदिवासी, अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्गों के सर्वांगीण विकास तो हो ही, साथ ही सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक विकास के साथ खनिज संसाधनों का समुचित लाभ भी इन जिलेवासियों को मिल सके। सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, राशन दुकान जैसी अधोसंरचना के साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी आसानी से मिल सके। निश्चय ही इन तहसीलों, अनुविभागों तथा जिलों के गठन से विकास की रफ्तार गति पकड़ेगी और आम लोगों के विश्वास को बरकरार रखते हुए शासन-प्रशासन तेजी से जनहितकारी काम भी करेगा।

(एल. डी. मानिकपुरी, सहायक सूचना अधिकारी, जनसम्पर्क)

 

मकान मे रखे 135 बल्क लीटर गोवा शराब जब्त

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रायपुर। राज्य सरकार अवैध शराब के विरूद्ध लगातार कार्यवाही कर रही है। इसी कड़ी में बिलासपुर जिला कलेक्टर रजत बंसल के निर्देश पर आबकारी विभाग द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार गश्त एवं कार्रवाई की जा रही है। आबकारी विभाग की टीम द्वारा 6 दिसम्बर को गश्त के दौरान सर्कल सिमगा क्षेत्र के शंकर नगर वार्ड सिमगा में आबकारी विभाग की टीम द्वारा की गई कार्यवाही में मकान की विधिवत तलाशी लेने पर शयन कक्ष में 15 पेटी, मध्यप्रदेश निर्मित एवं विक्रय हेतु गोवा मदिरा पाव,

 


प्रत्येक में 50 नग कुल 135 बल्क लीटर बरामद कर आरोपी अरुण गौतम पिता संतोष गौतम उम्र 20 वर्ष निवासी शंकर नगर वार्ड सिमगा थाना सिमगा एवं अजय वैष्णव पिता अशोक दास उम्र 20 वर्ष निवासी शंकर नगर वार्ड सिमगा थाना सिमगा के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 (1) (क), 34 (2), 36, 59 (क) का प्रकरण कायम कर जेल भेज दिया गया। उक्त कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी डॉ. समीर मिश्रा आबकारी उपनिरीक्षक जलेश सिंह, डॉ. सुकांत पांडेय, विपिन पाठक आबकारी मुख्य आरक्षक राधागिरी गोस्वामी, देवीप्रसाद तिवारी तथा ड्राइवर नीलकंठ की महत्वपूर्ण योगदान रही।

अग्निपथ योजना के तहत सैन्य पुलिस भर्ती की तैयारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सभी जिलों के लिए अग्निपथ योजना के तहत महिला सैन्य पुलिस रैली आगामी उन्नीस से बाईस अक्टूबर तक जबलपुर में आयोजित की जाएगी। इस रैली में शामिल होने के लिए ‘‘ज्वॉइन इंडियन आर्मी’’ वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। अभ्यर्थियों को इस वेबसाइट पर सात सितंबर तक अपना पंजीयन कराना होगा। इस   संबंध में और अधिक जानकारी नवा रायपुर स्थित सेना भर्ती कार्यालय से ली जा सकती है।



वहीं, भारतीय थल सेना द्वारा अग्निपथ योजना के तहत युवाओं की भर्ती के लिए आगामी तेरह से बाईस नवंबर तक रायपुर में रैली का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आवेदकों को ‘‘ज्वॉइन इंडियन आर्मी’’ वेबसाइट पर तीन सितंबर तक पंजीयन कराना अनिवार्य है। इसमें विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आठवीं से बारहवीं पास की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। इस रैली में भाग लेने के लिए एक अक्टूबर 1999 से एक अप्रैल 2005 के बीच जन्म लेने वाले अभ्यर्थी ही पात्र होंगे। इस रैली के माध्यम से सामान्य ड्यूटी सैनिक के साथ ही क्लर्क, स्टोर कीपर और ट्रेडमैन के पदों पर भर्ती की जाएगी।

अजब-गजब : बारिश के लिए जिंदा आदमी की निकाली अर्थी

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इंदौर. इस साल मानसून की बेरुखी से किसान खासे परेशान हैं. एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हो रही है, तो वहीं मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में फिलहाल बारिश का इंतजार किया जा रहा है.  धार जिले में बारिश नहीं होने से अब ग्रामीण परेशान नजर रहे हैं. इतना ही नहीं ग्रामीण अच्छी बारिश के लिए जहां एक ओर भगवान से प्रार्थना करते नजर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अब टोटके का सहारा लिया जाना भी शुरू हो चुका है,

जिसके तहत ग्रामीणों ने एक अनोखा तरीका अपनाते हुए अजीबो-गरीब कारनामे को अंजाम दिया. जिसमें ग्रामीणों ने एक जिंदा आदमी को अर्थी पर लेटा कर गाजे-बाजे के साथ उसकी अर्थी निकाली। इस दौरान बच्चे और युवा आतिशबाजी करते भी नजर रहे हैं. दरअसल, यह पूरा वाक्या एक तरह का टोटका था, जो अच्छी बारिश के लिए किया गया.                    

अलग-अलग टोटकों का सहारा

मालवा-निमाड़ अंचल में यदि बारिश देरी से होती है, या फिर कम होती है, तो अलग-अलग तरह के टोटकों का सहारा लेते हैं. जहां इन टोटकों के सहारे इंद्र देवता को प्रसन्न करने की कवायद की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि इस तरह के टोटके करने से इंद्र देवता प्रसन्न होते हैं, और अच्छी बारिश होती है. यही कारण है कि अच्छी बारिश के लिए कहीं जिंदा व्यक्ति की अर्थी निकाली जाती है, तो कहीं मेंढक-मेंढकी की शादी भी करा दी जाती है.

किसान भी परेशान बारिश का है इंतजार                

मानसून के मालवा निमाड़ अंचल में पहुंचने की तारीख 15 जून के आसपास रहती है, लेकिन इस बार फिर मानसून थोड़ा लेट होता नजर रहा है, जिसके चलते किसानों के चेहरे पर जहां चिंता की लकीरें हैं, तो वहीं किसान भी अब बारिश का इंतजार करते नजर रहे हैं. किसानों को उम्मीद है कि, अब जल्द ही मानसून मध्यप्रदेश में दस्तक देगा, जिसके चलते इंदौर और मालवा निमाड़ अंचल में भी झमाझम बारिश होगी. जल्द खत्म होगा मानसून का इंतजार मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अब जल्द ही मानसून का इंतजार खत्म होने जा रहा है, जहां आने वाले समय में 5 जुलाई के बाद अच्छा खासा सिस्टम तैयार होता नजर रहा है, जिसके चलते मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में जहां झमाझम बारिश होगी, तो वहीं इंदौर और मालवा निमाड़ में भी बारिश का इंतजार समाप्त होगा.

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