Media24Media.com: खेती-किसानी

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इंजीनियर की नौकरी छोड़ किसान बना शख्स, खेती से लाखों की कर रहा कमाई

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 धमतरी : आजकल जहां युवा पीढ़ी पढ़-लिखकर विभिन्न नौकरियों की ओर अग्रसर हो रही है, वहीं जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित ग्राम दुधवारा के युवा एकलव्य साहू ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर खेती-किसानी की ओर रूख किया। शिक्षित होने के साथ-साथ उन्हें खेती-किसानी की तकनीकी जानकारी हासिल करने में दिलचस्पी रही। यही वजह थी कि एकलव्य ने अपने खेतों में कम लागत और कम पानी के साथ ही अधिक उपज प्राप्त होने वाली मसाला क्षेत्र विस्तार के तहत मिर्ची की फसल ली।


ग्राम दुधवारा के युवा किसान एकलव्य साहू बताते हैं कि वे वर्ष 2017-18 में इंजीनियरिंग पास कर खेती-किसानी करना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग से सम्पर्क किया। एकलव्य बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत ड्रिप सिंचाई, पैक हाउस, बीज पैक योजना इत्यादि की जानकारी मिल और इसके लिए मिलने वाले अनुदान के बारे में भी पता चला।

अनुदान का लाभ लेकर एकलव्य अपने 12 एकड़ क्षेत्र में मिर्च की फसल लेना शुरू कर दिए। वे बताते हैं कि उन्हें मिर्ची की खेती से प्रति एकड़ 100 से 110 क्विंटल उपज प्राप्त होती है और प्रति एकड़ दो लाख रूपये की शुद्ध आमदनी हासिल कर रहे हैं। एकलव्य कहते हैं कि वैसे तो उनके द्वारा तैयार मिर्ची जिले में ही हाथों-हाथ बिक जाती हैं, किन्तु वे अन्य जिलों में भी मिर्ची को बिक्री के लिए भेजते हैं। शासन की योजनाओं के तहत मिले अनुदान और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन के लिए एकलव्य शासन-प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं।

विकसित भारत बनाने में किसानों का योगदान महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित भारत बनाने में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है। खेती-किसानी को आधुनिक बनाने के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाना छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों से धान की खेती के साथ-साथ आमदनी बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन, पशुपालन एवं उद्यानिकी फसलों के उत्पादन से जुड़ने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेले एवं प्रदर्शनी के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिन पर हमने 13 लाख किसानों को धान के बकाये बोनस की राशि 3716 करोड़ रुपए अंतरित कर दी। हमने अपने वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान का मूल्य दिया और 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की। पिछले साल 145 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और राज्य सरकार द्वारा घोषित उपार्जन मूल्य तथा दो साल का बकाया बोनस के माध्यम से किसानों के खाते में लगभग 49 हजार करोड़ रुपए अंतरित किये हैं। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ मौसम में अच्छी फसल को देखते हुए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए राज्य में बेहतर से बेहतर व्यवस्था की जाएगी। इस वर्ष 14 नवम्बर से धान खरीदी का काम शुरू होगा। इस साल भी रिकार्ड धान खरीदी का अनुमान है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेती-किसानी में युवाओं को जोड़कर इसे आधुनिक खेती की ओर आगे बढ़ाने के लिए आज कृषि मेले एवं उन्नत कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों के विकास एवं इसे किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है। एग्रीकल्चर की पढ़ाई की सुविधा अधिकाधिक युवकों को मिले और प्रदेश की खेती और संवर सकें, इसके लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। 


कृषि मंत्री रामविचार नेताम बताया कि कृषि में स्वरोजगार के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल चक्र परिवर्तन, कृषि उत्पाद की पैकेजिंग एवं मार्केटिंग के लिए विशेष प्रयास की आवश्यकता है। बृजमोहन अग्रवाल, सांसद रायपुर ने बताया कि हमारे मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री जी स्वयं कृषक हैं इसलिए छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में निरंतर उन्नति हो रही है। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं के कारण वर्तमान में धान की खेती फायदे का सौदा है और फसल चक्र अपनाकर उद्यानिकी फसलों को शामिल कर कृषकों को आय बढ़ाने का सुझाव दिया।


कार्यक्रम में विधायक धरसींवा अनुज शर्मा, विधायक दुर्ग गजेन्द्र यादव सहित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, प्रबंध मण्डल के सदस्यगण, विमल चावड़ा, रामसुमन उइके एवं मती जानकी सत्यनारायण चन्द्रा उपस्थित थे।

उद्घाटन कार्यक्रम में 6 किसानों को मसूर की नई किस्म के मिनी किट प्रदान किये गये। एग्री कार्नीवाल में जॉब फेयर से चयनित 6 कृषि स्नातक विद्यार्थियों को भी विभिन्न कम्पनियों द्वारा आफर लेटर प्रदान किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कॉफी टेबलबुक ‘‘अग्रसर’’ सहित अन्य कृषक उपयोगी प्रकाशनों का अतिथियों द्वारा विमोचन भी किया गया। कृषि स्टार्टअप के युवा उद्यमियों को अनुदान राशि का चेक भी प्रदान किया गया। एग्री कार्नीवाल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 4 हजार किसान भाई-बहनों एवं लगभग 1 हजार विद्यार्थियों ने प्रक्षेत्र भ्रमण एवं प्रदर्शनी द्वारा कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।


इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय एग्री कार्नीवाल-2024 ‘‘राष्ट्रीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’’ में दूसरे दिन आज 23 अक्टूबर को ‘‘छत्तीसगढ़ से कृषि उत्पादों के निर्यात’’ पर संगोष्ठी एवं ‘‘आधुनिक पादप प्रजनन तकनीक एवं डाटा एनालिसिस’’ पर कार्यशाला तथा ‘‘जैव विविधता पर प्रदर्शनी’’ एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।


‘‘आधुनिक पादप प्रजनन तकनीक एवं डाटा एनालिसिस’’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में ईस्ट अफ्रीका अंतर्राष्ट्रीय राइस ब्रीडिंग प्रोगाम के कार्यक्रम प्रमुख डॉ. एस.के. कटियार, उपस्थित हैं। इसमें छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के 211 वैज्ञानिकों एवं अनुसंधान कर्ताओं को मॉर्डन राइस ब्रीडिंग, स्पीड ब्रीडिंग, डेटा एनालिसिस पर जीवन्त प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे भविष्य की आवश्यकतानुसार नयी फसलों, किस्मों का विकास संभव हो सकेगा। इस कार्यशाला में इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, मनीला, फिलीपींस, घाना, ईस्ट अफ्रीका के अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा नवीन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एग्री कार्नीवाल-2024 ‘‘राष्ट्रीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी’’ में ‘‘छत्तीसगढ़ से कृषि उत्पादों के निर्यात’’ पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 400 उन्नतशील किसानों, युवा उद्यमियों, अनुसंधानकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। 


कृषक उन्नति योजना: खेती-किसानी से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

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 धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक (जी.एस. केशरवानी, उप संचालक )


छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार का असर अब दिखने लगा है। राज्य के किसानों के बैंक खातों में इस महीने की 12 तारीख को धन वर्षा होने जा रही है। कृषक उन्नति योजना में लगभग 24.72 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे राशि पहुंचेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्य के किसानों को दी गई गारंटी के अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषक उन्नति योजना में समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए उपार्जन मूल्य की अंतर की राशि किसानों को देने का निर्णय लिया है।

कृषक उन्नति योजना में राज्य के किसानों को समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान में प्रति क्विंटल 917 रूपए के मान से अंतर की राशि दी जाएगी। अंतर की राशि भुगतान के बाद किसानों को धान की प्रति क्विंटल 3100 रूपए की कीमत मिलेगी। किसानों को धान के प्रति क्विंटल के मान से भुगतान की जा रही यह राशि देश में सर्वाधिक है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस साल के बजट में 10 हजार करोड़ और पिछले साल के अनुपूरक बजट में 3 हजार करोड़ इस प्रकार कुल 13 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।

छत्तीसगढ़ की अर्थ व्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय हैं। राज्य में लगभग 32 लाख हेक्टेयर में धान की बोनी होती है और 24 लाख से अधिक किसान समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया है। इस वर्ष 144.92 लाख मीट्रिक टन की समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी किसानों से की गई है। किसानों से समर्थन मूल्य पर की गई धान खरीदी के एवज में 31,913 करोड़ की राशि भुगतान की गई है।

छत्तीसगढ़ के किसानों को धान की कीमत प्रति क्विंटल 3100 रूपए की राशि मिलने से राज्य की अर्थव्यवस्था भी गतिमान होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलेंगे। खेती-किसानी को मजबूती मिलेगी। किसान खेती के आधुनिक तौर तरीको की ओर अग्रसर होंगे। राज्य में व्यापार और वाणिज्य में तेजी आएगी। राज्य सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, जिसका लाभ यहां के लोगों को मिलेगा। किसानों के साथ-साथ आम लोगों के जनजीवन में तेजी से बदलाव आएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान हितैषी निर्णय लेते हुए समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की है। साथ ही किसानों को दो साल का बकाया बोनस राशि के रूप में 3716 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खाते में दी है। इसके अलावा कृषि मजदूरों को भी राहत देने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूर को साल में 10 हजार रूपए की राशि दी जाएगी।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 23 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 74 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।

छत्तीसगढ़ फिल्म माटी पुत्र के पोस्टर का हुआ विमोचन

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 रायपुर। खेती-किसानी के साथ किसानों को हो रही परेशानियों पर बनी छत्तीसगढ़ फिल्म माटी पुत्र के पोस्टर का विमोचन सोमवार को प्रेस क्लब रायपुर में हुआ। फिल्म में यह दिखाया गया है कि जिस धरती पर हम जन्म लिए है उसकी हमें हमेशा रक्षा करनी चाहिए और जब कोई परेशानी या समस्या आए तो उसे सभी को मिलकर डटकर सामना करना है और इस माटी के लिए जान भी देनी पड़ जाए तो देने के लिए हम हमेशा तैयार है। 


पत्रकारों से चर्चा करते हुए फिल्म के निर्देशक संतोष देशमुख, अभिनेता शिवा साहू व मुस्कान साहू ने बताया कि फिल्म की पूरी शूटिंग राजनांदगांव जिले में हुई है और इसमें 5 गाने है तथा फिल्म 2 घंटा 30 मिनट की है। मात्री पुत्र पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी परंपरा और रीति-रिवाज पर बनी है जिसमें कहीं पर फुहड़पना दिखाई नहीं देगा। मात्री पुत्र 12 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के सभी सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज होगी। 

फिल्म की निर्मात्री तनु साहू है जबकि सहनिर्माता निरंजन जायसवाल, उमेश साहू, तारेश देवांगन, डिलेंद देवांगन है। सहायक निर्देशक तुषार सिंह, कौशल उपाध्याय, प्रकाश पटेल है। कलाकारों की बात करें तो क्रांति दीक्षित, पुष्पेंद्र सिंह, अजय पटेल, अंजलि चौहान, मनोज जोशी, राजू पांडे, नरेंद्र देवड़ा, राजेश बोनिक, नवीन देशमुख, हर्षा सहारे, सुब्रत शर्मा, भानुमति कोसले व दादू साहू ने अभिनय किया है। सुनील सोनी, अनुराग शर्मा, अलका चंद्राकर, दीक्षा धनकर ने स्वर दिया है, पी. नवीन अर्जुन का संगीत, प्रफुल्ल बहेरा ने संगीत से संजोया है तो वहीं नवीन देशमुख ने गीत व पटकथा लिखी है।


आज मैं जिस मुकाम पर पहुँचा हूँ उसमें मेरे गुरुजनों का योगदान - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। आज मैं जिस मुकाम पर पहुँचा हूँ उसमें मेरे गुरुजनों का योगदान रहा है। जिस स्कूल परिसर में हम खड़े हैं। वो बहुत पुराना है। यहाँ विनोबा भावे का आगमन हुआ था और यहाँ उन्होंने भूदान के लिए लोगों को प्रेरित किया था। आज जिस अवसर पर मैं यहाँ आया हूँ। वो शिक्षक दिवस का है। मैं पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षक डा. राधाकृष्णन को भी नमन करता हूँ। 

यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पाटन ब्लाक के ग्राम मर्रा में संत विनोबा भावे महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के नवनिर्मित महाविद्यालय का लोकार्पण करने और शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान कार्यक्रम के दौरान कही। इसके साथ ही इस महाविद्यालय में हाइटेक नर्सरी, टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला, इंप्लीमेंट शेड, बीज भंडार गृह, कृषक विश्राम गृह, तीन खाद गोदाम व महाविद्यालय के 2 अतिरिक्त कक्षों को लोकार्पण किया। शिक्षक दिवस के अवसर पर यहाँ 1500 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि मर्रा में स्थापित कृषि महाविद्यालय के तकनीक से खेती-किसानी में सुधार होगा। आधुनिक खेती से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। प्रदेश में 10 हजार गौठान बनाये गए है। जिसमें आज 6 हजार गौठान स्वावलम्बी हो गए है। प्राथमिक शिक्षा विस्तार के लिए 700 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल ख़ोले गए है। स्कूल जतन योजना के तहत स्कूलों का जीर्णाेद्धार किया गया है। 30 हजार टीचरों की भर्ती की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर वातावरण बनाना सरकार की मंशा है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति, यहाँ के रहन सहन, खान-पान  को पहचान दिला कर स्वाभिमान को बढ़ावा देने का काम सरकार कर रही है। पुरखो के बनाये परम्परा को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 30 हजार शिक्षक भर्ती हुई है। प्रदेश में 23 कृषि महाविद्यालय खोले जा चुके है। कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना सरकार की सोच है। कृषि मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरकार का पूरा फोकस किसान और किसानी को बढ़ावा देना है। कृषि को उन्नत तकनीक से क्षेत्र के साथ प्रदेश के किसानों को लाभान्वित करने में यह महाविद्यालय सहायक होगी। कार्यक्रम को शिक्षा विद सैयद फाजिल ने भी सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने महाविद्यालय परिसर में लगे कृषि विभाग के प्रदर्शनियों का अवलोकन किया

पाँच करोड़ रुपए की लागत से बना है कृषि महाविद्यालय- संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र मर्रा (पाटन) को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगभग 87 एकड़ भूमि आबंटित की गई है जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान हेतु नवीन महाविद्यालय भवन जो कि समस्त शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित है एवं 3730 वर्गमीटर में विस्तारित है, जिसकी लागत लगभग 5 करोड़ 25 लाख रूपये है। 

यहां पर कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान कार्य हेतु स्मार्ट क्लास रूम, सम्मुनत प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेलकूद एवं एन.एस.एस., पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति आदि की सुविधाएं विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही है। कालेज कैम्पस पूर्णतः वाई-फाई एवं इंटरनेट से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में अनुसंधान हेतु 72 एकड़ में कृषि प्रक्षेत्र का विकास किया गया है, जहां हाइटेक नर्सरी का निर्माण किया गया है। जिसकी लागत लगभग 1 करोड़ रूपये की है जो कि लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विस्तारित है। 

हाइटेक नर्सरी में विभिन्न प्रकार के फलों एवं सब्जियों तथा फूलों का पौधा तैयार करके कृषकों को वितरण किया जाता है ताकि कृषकगण इनका प्रयोग करके आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। टिशू कल्चर प्रयोगशाला का निर्माण लगभग 2.50 करोड़ की लागत से किया गया है, जहां केला, गन्ना, बांस, गुलाब एवं अन्य पौधों का टिशू कल्चर के माध्यम से विकास कर किसानों का वितरित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड के सहयोग से बीज भंडार गृह इम्प्लीमेंट शेड एवं कृषक प्रशिक्षण हेतु कृषक विश्राम गृह का निर्माण लगभग 2.37 करोड़ में किया गया है। 200 मेट्रिक टन क्षमता वाले 3 खाद खोदामों का भी निर्माण 32.93 लाख की लागत से किया गया है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देश के दूसरे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है। वह देश के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में दूसरे स्थान पर है। सर्वे में 59.1 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज पर संतुष्टि जताई है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट इंडिया टूडे ने अभी हाल ही में प्रकाशित की है। इंडिया टूडे समूह द्वारा देश भर में आम नागरिकों से मुख्यमंत्रियों के कामकाज के संबंध में किये गये सर्वे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है।

उनकी सरकार के कामकाज पर 59.1 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है। इंडिया टूडे द्वारा मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता के लिए जनवरी 2023 में कराए गए सर्वे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कामकाज पर 55.7 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई थी। इसके पूर्व वर्ष में हुए सर्वे में 53.3 प्रतिशत ने मुख्यमंत्री बघेल के कामकाज को सराहा था। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित विभिन्न न्याय योजनाओं की बदौलत  पौने पांच सालों में राज्य के 40 लाख लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाएं गरीबी को दूर करने में बेहद असरकारक साबित हुई हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते पौन पांच सालों में अपनी न्याय योजनाओं जैसे- राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, बेरोजगारी भत्ता, राजीव मितान क्लब, के माध्यम से राज्य के ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं, वनोपज संग्राहकों सहित सभी वर्ग के हितग्राहियों को पौने दो लाख करोड़ रूपए की सीधी मदद दी है, जिसके चलते लोगों के जीवन में बदलाव आया है और वह आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाओं बदौलत पौने पांच सालों में प्रति व्यक्ति का 88,793 रूपए से बढ़कर 1,33,898 रूपए हो गई है। इस अवधि में छत्तीसगढ़ का जीएसडीपी 3,27,106 करोड़ रूपए से बढ़कर 5,09,043 करोड़ रूपए हो गयी है। मार्च 2020 से निरंतर दो वर्ष तक कोविड-19 आपदा के कारण आर्थिक गतिविधियां मद होने के बावजूद राज्य शासन की नीतियों और न्याय योजनाओं के चलते अर्थव्यवस्था के आकार में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में कृषि, औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा रही है।

छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। राज्य के लगभग 74 प्रतिशत लोगों का जीवनयापन का आधार खेती-किसानी पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते पौने पांच सालों में खेती-किसानी को समृद्ध और किसानों की खुशहाली के लिए जो फसले लिए हैं और योजनाएं संचालित की है। उससे राज्य में खेती-किसानी के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ा है। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक मिसाल कायम की है। छत्तीसगढ़ देश का एक मात्र राज्य है, जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के साथ ही सरकार खरीफ फसलों के उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी दे रही है। वर्ष 2019-20 से लेकर अब तक इस योजना के तहत किसानों को लगभग 22 हजार करोड़ रूपए की सीधी मदद उनके बैंक खातों में भेजी गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी विकास कार्यक्रम और गोधन न्याय योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के साथ ही लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में कारगर रही है। नरवा विकास कार्यक्रम के चलते राज्य के लगभग 14 हजार बरसाती नालों के ट्रीटमेंट से जल संरक्षण में मदद मिली है, जिसके चलते भू-जल स्तर सुधरा है। सिंचाई की सुविधा और दोहरी फसलों का रकबा बढ़ा है। गरवा कार्यक्रम के माध्यम से पशुधन का संरक्षण-संवर्धन हुआ है। पशुपालन से लोगों की आय बढ़ी है। घुरवा और बाड़ी विकास कार्यक्रम ने राज्य में जैविक खेती और पोषण स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना से रोजगार और आत्मनिर्भरता के बहुआयामी विकल्प सृजित हुए है। इस योजना के तहत सरकार द्वारा दो रूपए में किलो में गोबर और चार रूपए लीटर में गौमूत्र की खरीदी ने ग्रामीण पशुपालकों को अतिरिक्त आय का जरिया दिया है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य सामग्रियों का निर्माण, गौमूत्र से जैविक कीटनाशक, ब्रम्हास्त्र और जीवामृत का उत्पादन, गोबर से प्राकृतिक पेंट का निर्माण और विक्रय से लोगों की आय में वृद्धि हुई है। गौठानों से जुड़ी 12 हजार से अधिक स्व-सहायता की दो लाख महिलाएं विभिन्न आयमूलक अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और जन्नोमुख बनाने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना, दाई-दीदी क्लिनिक योजना, डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना, धनवंतरी मेडिकल स्टोर योजना से भी लोगों को काफी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली बिल हाफ योजना और किसानों के सिंचाई पंपों को निःशुल्क एवं रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराये जाने की योजना से बिजली बिल में लगभग 15 हजार करोड़ की मदद दी गई है।

वनांचल में वनवासियों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को 2500 रूपए से बढ़ाकर 4000 रूपए प्रति मानक बोरा किया जाना तथा 67 प्रकार के लघुवनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और वैल्यूएडिशन के चलते संग्राहकों की आय दोगुने से ज्यादा करने में कामयाबी मिली है। राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के माध्यम से राज्य के पौने 6 लाख परिवारों को प्रतिवर्ष 7000 रूपए की मदद, राजीव मितान क्लबों के माध्यम से गांवों में शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में लोगों को जागरूक कर उसका लाभ दिलाने की पहल के सकारात्मक परिणाम रहे हैं। इससे भी लोगों को गरीबी से बाहर लाने में मदद मिली है।  

छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले कृषकों की संख्या 12 लाख से बढ़कर आज 24 लाख से ज्यादा हो गई है। धान उर्पाजन 55 लाख टन से बढ़कर 107 लाख टन से ज्यादा हो गया है। बीते पांच सालों में छत्तीसगढ़ में धान बेचने वाले किसानों और धान उर्पाजन की मात्रा दोगुनी हो गई है। धान का रकबा 24 लाख 46 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 31 लाख 17 हजार हेक्टेयर हो गया है। प्राथमिक कृषि साख समितियां 1,333 थीं, आज बढ़कर 2,058 हो गई। छत्तीसगढ़ में मछली पालन, लाख पालन और रेशम पालन और मधुमक्खी पालन को भी कृषि का दर्जा दिया गया है। छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन और कोदो-कुटकी, रागी की समर्थन मूल्य पर खरीदी और इसके उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी के चलते राज्य के वनांचल क्षेत्रों में मिलेट उत्पादक कृषकों की आय बढ़ी है।

छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी एवं आम जनता की भलाई के लिए संचालित योजनाओं से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के बड़े तबके में जबरदस्त खुशहाली आई है जिससे बघेल की लोकप्रियता बढ़ी है। सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से शहरी अर्थव्यवस्था भी समृद्ध हुई है। इसके साथ ही नागरिक सुविधाओं में बेहतरी के लिए किये गये कार्यों से शहरी क्षेत्रों में अच्छा माहौल है जिसका असर भूपेश सरकार की लोकप्रियता में दिख रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि बघेल ने छत्तीसगढ़िया अस्मिता पर लगातार बात की, यह बात लोगों के दिलों में घर कर गई है। वे जनता की भाषा में जनता की रुचि की ही बातें करते हैं इसके चलते उनकी लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हो रहा है। इंडिया टूडे के सर्वे में लोकप्रियता के मामले में ओडिशा के मुख्यमंत्री पहले स्थान पर, दिल्ली के मुख्यमंत्री तीसरे स्थान पर हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री चौथे, असम के मुख्यमंत्री पांचवे स्थान पर हैं।

विशेष लेख : हरेली तिहार से खेती-किसानी के साथ-साथ छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की होगी शुरूआत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर लोक महत्व के इस पर्व पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। 

लोक संस्कृति इस पर्व में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की भी शुरूआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के परंपरागत तीज-त्यौहार, बोली-भाखा, खान-पान, ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने लोगों तक गेड़ी की उपलब्धता के लिए जिला मुख्यालयों में स्थित सी-मार्ट में किफायती दर में गेड़ी बिक्री के लिए व्यवस्था की है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। वन विभाग के सहयोग से सी-मार्ट में गेड़ी किफायती दर पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि बच्चे, युवा गेड़ी चढ़ने का अधिक से अधिक आनंद ले सके।

मुख्यमंत्री की पहल पर पिछले वर्ष शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को काफी लोकप्रियता मिली। इसको देखते हुए इस बार हरेली तिहार के दिन शुरू होने वाली छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 2023-24 को और भी रोमांचक बनाने के लिए एकल श्रेणी में दो नए खेल रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी शामिल किया गया है। हरेली पर्व के दिन से ही प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल की शुरूआत भी होने जा रही है, जो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है।

एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है  जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को विभिन्न रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

हरेली के दिन बच्चे बांस से बनी गेड़ी का आनंद लेते हैं। पहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

मानसून के आगमन के साथ, नैनो यूरिया लेने किसानों में बढ़ा रुझान

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कोरबा। मानसून के आगमन के साथ ही कोरबा जिले के किसान खेती-किसानी के कार्य में व्यस्त हो गए हैं। जिले में धान सहित अन्य फसल किसान खरीफ सीजन में लेते हैं। शासन द्वारा किसानों को समय पर खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट वितरण की कार्यवाही की जा रही है। कलेक्टर कोरबा संजीव कुमार झा द्वारा भी अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि जिले के किसानों को समय पर खाद बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उनके द्वारा खाद-बीज वितरण एवं भण्डारण की जानकारी भी लगातार ली जा रही है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक कोरबा के नोडल अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद का भण्डारण है।           
                        

अधिकारियों ने बताया कि 05 जुलाई की स्थिति में कोरबा जिले के डबल लॉक केन्द्रों में 309 मीट्रिक टन नीम यूरिया भण्डारित है, जिसमें से कटघोरा खाद भण्डारण केन्द्र में 240 मीट्रिक टन एवं उरगा खाद भण्डारण केन्द्र में 70 मीट्रिक टन नीम यूरिया उर्वरक उपलब्ध है। 7 और 8 जुलाई को मेसर्स एन.एफ.एल. द्वारा अकलतरा रेक प्वाईंट पर लगने वाली नीम यूरिया उर्वरक की रेक से 250 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की जाएगी। 8 जुलाई को मेसर्स इफको द्वारा बिलासपुर रेक प्वाईंट पर लगने वाली नीम यूरिया उर्वरक की रेक से 100 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की जाएगी।

जिले के किसानों को समय पर खाद का वितरण किया जा रहा है। यूरिया दानेदार के वैकल्पिक रूप में नैनो यूरिया समितियों में भण्डारित है। इसे प्राप्त करने किसानों द्वारा रूचि भी दिखाई जा रही है। नोडल अधिकारी ने बताया कि खरीफ वर्ष 2023 अंतर्गत कोरबा जिले में 10200 मीट्रिक टन रासायनिक खाद लक्ष्य के विरुद्ध 84 प्रतिशत खाद का भण्डारण 41 सहकारी समितियों में अब तक किया जा चुका है। साथ ही जिले में यूरिया दानेदार के वैकल्पिक रूप में नैनो यूरिया (लिक्विड) 5700 लीटर भण्डारित किया गया है। यूरिया दानेदार के वैकल्पिक रूप में उपलब्ध नैनो यूरिया (लिक्विड) के प्रति किसानों का रूझान बढ़ रही है। समितियों में पर्याप्त मात्रा में सभी रासायनिक खाद उपलब्ध है, जिसका उठाव कृषकों द्वारा अपनी सुविधा एवं आवश्यकता अनुसार किया जा रहा है, जिन समितियों में यूरिया एवं अन्य खाद की कमी है उन समितियों में भंडारण हेतु आरओ/आरडी जारी करवाये जा रहे हैं। विगत वर्ष इसी समय तक 68 प्रतिशत खाद भण्डारित था, जबकि वर्तमान में लक्ष्य के विरूद्ध 84 प्रतिशत खाद का भण्डारण समितियों में अब तक किया जा चुका है। किसी कृषक को खाद नहीं मिलने जैसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

सीएम ने किसानों से की अपील : आगामी खरीफ सीजन में जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का अधिक से अधिक करें उपयोग

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों से आगामी खरीफ सीजन में खेती-किसानी में जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत गौठनों में जैविक खाद और जैविक कीटनाशक महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। गौठनों में ये उत्पाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। इनके उपयोग से जमीन की उर्वरता बढ़ेगी और खेती की लागत भी कम होगी।

मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि के ऑनलाइन अंतरण के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस की प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले मानसून में ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करें और अपने गांव, गौठान, खेतों और जंगलों को खूब हरा-भरा बनाएं। मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह, नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना के नोडल अधिकारी  डॉ अयाज तंबोली, संचालक कृषि श्रीमती रानू साहू भी कार्यक्रम में उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में गोधन योजना के हितग्राहियों के खाते में ऑनलाईन 21.31 करोड़ रूपए की राशि अंतरित की। इस राशि में 16 मई से 31 मई तक गौठानों में क्रय किए गए गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालकों 4.91 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों को 8.98 करोड़ एवं स्व-सहायता समूहों को 6.29 करोड़ रूपए की लाभांश राशि तथा गौठान समितियों ने अध्यक्षों और सदस्यों के मानदेय की 1.13 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।

गौरतलब है कि गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को आज वितरित की गई राशि को मिलाकर अब तक हितग्राहियों को 538 करोड़ 89 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इसमें से योजना के प्रारंभ होने के बाद से अब तक गोबर विक्रेताओं को 237.28 करोड़ रूपए तथा स्व- सहायता समूहों एवं गौठान समितियों को 223.60 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्षों और सदस्यों को मिलाकर समिति के कुल 21 हजार 360 सदस्यों की मानदेय की 1.13 करोड़ रुपए की राशि जारी की। स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्ष को 750 रुपए और अशासकीय सदस्यों को 500 रुपए का मानदेय दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश में 10 हजार 409 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, इनमें से 98 प्रतिशत, 10 हजार 235 गौठानों का निर्माण पूरा हो गया है। 4 हजार 584 गौठान ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले 15 दिनों में 30 क्विंटल या उससे अधिक गोबर की खरीदी की है। इससे पूर्व के पखवाड़े की तुलना में इतनी अधिक मात्रा में गोबर खरीदने वाले गौठानों की संख्या में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार पिछले वर्ष 16 से 31 मई 2022 की तुलना में इस वर्ष इसी अवधि में गोबर खरीदी में 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदेश के 05 हजार 911 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। इन गौठानों द्वारा अब तक गोबर खरीदी के एवज में कुल 53 करोड़ 80 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। आज गोबर खरीदी के एवज में जारी की गई 04 करोड़ 91 लाख रुपए की राशि में से 03 करोड़ 05 लाख रुपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा विभाग द्वारा 01 करोड़ 86 लाख रुपए का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में चल रही विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से 15 हजार 905 स्व सहायता समूहों की 01 लाख 89 हजार 614 सदस्यों को अब तक 144 करोड़ 22 लाख रुपए की आय हुई है। बघेल ने इस योजना की सफलता के लिए योजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हमारी गोधन न्याय योजना का एक उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन करना भी है। राज्य सरकार द्वारा सुराजी गांव योजना, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना, वृक्ष संपदा योजना, कृष्ण कुंज योजना, नदी तट वृक्षारोपण, फलदार पौधा रोपण जैसी योजनाओं के माध्यम से अपने पर्यावरण को लगातर बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है।

भूपेश है तो भरोसा है : किसानों के मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल, रामरतन को अगले दिन ही मिली धान की राशि

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार को यूं ही किसानों की सरकार  और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यूं ही किसानों का मुख्यमंत्री नही कहा जाता। प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल की किसानों के प्रति संवेदनशीलता इतनी है कि खेती-किसानी और किसानों के बात आते ही सभी काम एक तरफ हो जाते है। ऐसे ही बानगी भेंट-मुलाकात के एक कार्यक्रम में देखने मिली और मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक किसान को डेढ़ माह से लंबित धान की राशि 24 घंटे में ही मिल गई।

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा विकासखंड के मांठ गांव में 22 जनवरी को भेंट-मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री बघेल से नगर गांव के किसान रामरतन ने सोसायटी में धान का लगभग डेढ़ माह से भुगतान लंबित रहने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने धैर्यपूर्वक रामरतन की बात सुनी। किसान रामरतन ने बताया कि सब कुछ तो ठीक है। सरकार की योजनाएं लोंगो को फायदा पहुंचा रही है, परंतु सोसायटी में 30 नवबंर को धान बेचने के बाद भी अभी तक उन्हें पैसा नहीं मिला है।

मुख्यमंत्री बघेल ने इस पर विस्तार से रामरतन से पूछा। रामरतन ने आगे बताया कि उनकी बेटी कुसुम सगरवंशी ने 30 नवबंर को नगरगांव सोसायटी में धान बेचा था। उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल के पूछने पर आगे बताया कि 38 डिसमिल खेत में इस साल धान लगाया था। कटाई-मिंझाई के बाद नगरगांव सोसायटी में 30 नवबंर को धान बेचा था पर धान का लगभग साढ़े ग्यारह हजार रूपये अभी तक खाते में नही आया है।

मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए पहले तो अधिकारियों पर नाराजगी जताई और तत्काल रामरतन के धान का पैसा उनके बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे ने स्वयं प्रकरण की जानकारी नगरगांव सोसायटी के प्रबंधक और जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के अधिकारियों से ली। अगले ही दिन 23 जनवरी को रामरतन के बैंक खाते में बेची गई धान की राशि 11 हजार 424 रूपये जमा करा दी गई। अपनी धान का पैसा मिल जाने पर रामरतन ने मुख्यमंत्री श्री बघेल का आभार वयक्त किया और कहा कि भूपेश है तो भरोसा है।

किसान पहले साहूकार के घर जाते थे, अब बैंक जाते हैं : भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसान खेती की जमीन खरीद रहे हैं, खेती-किसानी में निवेश कर रहे हैं और अपने बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं। पहले किसान साहूकार के घर जाते थे, अब बैंक में उनका पैसा जमा रहता है। किसानों को योजनाओं के माध्यम से दिया जा रहा पैसा बैंकिंग सिस्टम में आ रहा है, इससे विकास तेज होगा, ये किसानों की समृद्धि लाने का बड़ा परिवर्तन है। मुख्यमंत्री श्री बघेल आज भेंट-मुलाकात में बेमेतरा जिले की नवागढ़ विधानसभा के ग्राम-दाढ़ी में आम जनता को संबोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से छत्तीसगढ़ के किसानों की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है, हमारा प्रदेश धान का कटोरा है, फिर भी कुछ समय पहले तक हमारे प्रदेश में यह स्थिति थी कि लोगों को खेती छोड़नी पड़ रही थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। खेती में निवेश कर रहे हैं। बाइक ले रहे हैं। ये खुशहाली का सिलसिला जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नवागढ़ विधानसभा के दाढ़ी गांव में आया हूँ। यहां आने का उद्देश्य यह देखना है कि हमारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों को किस प्रकार से मिल पा रहा है। मंत्रालय के अधिकारी और विधानसभा के सदस्य भी साथ हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता से संवाद करना है। और इस तरह से प्रदेश को निरंतर विकास के रास्ते में ले जाना है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कर्ज माफी और धान खरीदी पर चर्चा करते हुए कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किश्त 31 मार्च को देंगे। कोरोना के बाद भी हमने आपके लिए हितकारी योजनाओं को जारी रखा। बहुत कठिन स्थिति थी फिर भी हमने किश्त देना जारी रखा। राजीव गांधी जी के शहादत के दिन पहला किश्त दिया, तीजा के समय, फिर धान लुवाई के समय और उन्हारी के समय चौथी किश्त मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेमेतरा में यह समय बहुत खूबसूरत होता है,पपीता, गन्ना, केला की फसल होती है। मैंने नवागढ़ में देखा कि कहीं भी पैरा नहीं जलाया गया। मैंने आपसे अपील की और आपने सम्पूर्णतः इसे माना, इसके लिए आपको बधाई।

मुख्यमंत्री की घोषणाएं

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राम दाढ़ी में आयोजित भेंट-मुलाकात में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होेंने ग्राम दाड़ी को पूर्ण तहसील का दर्जा देने, ग्राम दाड़ी में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, साहड़ा देव चौक से मुख्य प्रवेश द्वार तक सीसी रोड का निर्माण, ग्राम दाड़ी में सामुदायिक भवन का निर्माण, सेमरिया से भैंसबोड़ होते हुए सेंदरी तक सड़क का निर्माण, राजा बाड़ा के जीर्णाेद्धार, ग्राम प्रतापपुर में जिला सहकारी बैंक की शाखा प्रारंभ करने तथा चरगवां में हाई स्कूल व तरके में प्राथमिक स्कूल के लिए नवीन भवन के निर्माण की घोषणा की।

गौठान समिति स्वयं की राशि से कर रही है गौठान का रखरखाव

भेंट-मुलाकात में दमेडीह गौठान समिति के अध्यक्ष प्रभुराम ने बताया कि हमारी समिति में 6 लाख रुपया आया है। गौठान के रखरखाव का खर्च उसी में होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे समाजवादी नेता कहते थे कि एसी रूम में बैठकर नीति नहीं बनती। आप लोग गांव में बैठकर योजना बना रहे हैं और यहीं पर खर्च कर रहे हैं। हम सब यह सपना देखते थे। हमारे पुरखे भी यही सपना देखते थे। महात्मा गांधी का भी यही सपना था। आज यह सपना पूरा हो रहा है। आप लोग गांव का पैसा, गांव के ही विकास में लगा रहे हैं।

दिव्यांगजनों द्वारा अधिकृत व्यक्ति भी राशन दुकान से राशन ले सकेंगे

भेंट-मुलाकात में दिव्यांगजनों को राशन दुकान जाकर राशन लेने में आ रही दिक्कत की समस्या एक हितग्राही ने रखी, इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका निर्देश आ गया है कि ऐसे मामले में नियमानुसार अधिकृत व्यक्ति भी राशन ले सकते हैं। जब दुकान तक आने में गंभीर दिक्कत हो।

गेंद सिंग का 90 हजार रूपए का कर्ज हुआ माफ

भेंट-मुलाकात में गेंदसिंग वर्मा ने बताया कि उनकी साढ़े चार एकड़ जमीन है। 90 हजार का कर्ज माफ हुआ। पैसे का बोर खनन कराया। तार फेंसिंग की है ताकि रबी फसल ले पाऊं। मुख्यमंत्री से बात करते हुए इन्द्रू साहू ने बताया कि ऋण माफी में उनका एक लाख का कर्ज माफ हुआ है, धान भी बेच दिया हूँ, पैसा खाते में आ गया है।  इसे सुनकर मुख्यमंत्री ने पूछा - पत्नी के लिए क्या लिया, उत्तर में इन्द्रू ने बताया कि पत्नी और 2 बहू दोनों के लिए करधन लिया हूँ। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की हितग्राही अनिता साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि योजना से जो पैसा मिला, उससे बच्चों को पढ़ा रही हूं। इस पर उनकी तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा भविष्य गढ़ रही हैं अपने बच्चों का।

मुख्यमंत्री जी भूमिहीन योजना बहुत बढ़िया हे

भेंट-मुलाकात में ग्राम दाढ़ी की रहने वाली नीलम साहू ने बताया कि हमारे परिवार में 4 सदस्य हैं, 40 किलो चावल, दो किलो नमक निःशुल्क मिलता है। शक्कर के बस 17 रुपए देना पड़ता है। आशीष सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी भूमिहीन योजना बहुत बढ़िया हे, थोड़किन पैसा अऊ बढ़ा देतेव। इस पर मुख्यमंत्री खूब मुस्कुराए और कहा राहुल जी आये थे, उन्होंने भी कहा, तब राशि बढ़ाई।

दुलापा को गोधन योजना से घर चलाने में मिली बड़ी मदद

भेंट-मुलाकात में गोधन न्याय योजना के बारे में पूछने पर मुख्यमंत्री श्री बघेल को दुलापा यादव ने बताया कि 500 क्विंटल गोबर बेच चुकी हूं। 50 हजार आ चुका है। 50 हजार और आने हैं। खेती नहीं है। अब गोधन योजना से घर चलाने में बड़ी मदद मिल रही है। श्रीमती लीला साहू ने बताया कि हमारा समूह 2020 में बना, हम लोगों ने 2 लाख 82 हजार रुपये वर्मी बेचकर कमाए। कोदो का भी काम कर रहे हैं। इसे सुनकर मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई दी। टेकचंद बंजारे ने कहा कि मेरा गांव झाझडीह है, सड़क नहीं है इस कारण आवाजाही में समस्या होती है। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनकर गांव में सड़क कनेक्टिविटी के निर्देश दिए। सहबीन ने बताया कि गोधन न्याय योजना का लाभ मिल रहा है।गोबर बेचकर अब तक 40 हजार रुपए आमदनी की है। इन पैसों का उपयोग अब बच्चों की पढ़ाई के लिए कर रही हूं।

राजीव युवा मितान क्लब को अगली किश्त 12 जनवरी को

भेंट-मुलाकात में राजीव युवा मितान क्लब उमरिया के पन्ना लाल ने मुख्यमंत्री को राजीव युवा मितान क्लब की गतिविधियों बारे में बताते हुए कहा कि पहले इतनी सुंदर योजना नहीं थी। हम लोगों ने इसकी राशि से रामायण कराया। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के बारे में राधिका ने बताया कि मैंने बरसों बाद खेल खेला, फुगड़ी खेली। मेरे बच्चों ने भी खेला। बहुत आनंद आया। प्रदीप पाठक ने बताया कि हम लोगों ने गांव में खेल कराया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव युवा मितान क्लब को 12 जनवरी को किश्त देंगे।

 

विशेष लेख: प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व : हरेली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन-जीवन में रचा-बसा खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्यौहार है, हरेली। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार वास्तव में प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती माता का सभी प्राणियों केे भरण-पोषण के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सभी लोग बारिश के आगमन के साथ चारो ओर बिखरी हरियाली और नई फसल का उत्साह से स्वागत करते हैं। हरेली पर्व को छोटे से बड़े तक सभी उत्साह और उमंग से मनाते है। 


गांवों में हरेली के दिन नागर
, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत खेती-किसानी से जुड़े सभी औजारों, खेतों और गोधन की पूजा की जाती है। सभी घरों में चीला, गुलगुल भजिया का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद गांव के चौक-चौराहों में लोगों को जुटना शुरू हो जाता है। यहां गेड़ी दौड़, नारियल फेक, मटकी फोड़, रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं देर तक चलती रहती हैं। लोग पारंपरिक तरीके से गेड़ी चढ़कर खुशियां मनाते हैं। माना जाता है कि बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ से बचने के लिए गेड़ी चढ़ने का प्रचलन रहा है, जो समय के साथ परम्परा में परिवर्तित हो गया।


इस अवसर पर किया जाने वाला गेड़ी लोक नृत्य भी छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। हरेली में लोहारों द्वारा घर के मुख्य दरवाजे पर कील ठोककर और नीम की पत्तियां लगाने का रिवाज है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार अनिष्ट से बचे रहते हैं। 
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर माटी से जुड़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निवास सहित पूरे राज्य में लोकपर्वों के धूम-धाम से सार्वजनिक आयोजन कर इसकी शुरूआत की है।


इससे नई पीढ़ी के युवा भी अपनी पुरातन परम्पराओं से जुड़ने लगे हैं। सरकार ने हरेली त्यौहार के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस साल से प्रदेश के स्कूलों में हरेली तिहार को विशेष रूप से मनाने की शुरूआत की जा रही है। 
इससे बच्चे न सिर्फ अपनी कृषि संस्कृति को समझेंगे, उसका सक्रिय हिस्सा बनेंगे बल्कि अपनी संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात भी कर सकेंगे। साथ ही स्कूलों में गेड़ी दौड़, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी जैसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होगा।   


छत्तीसगढ़ में पारंपरिक लोक मूल्यों को सहेजते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पारंपरिक संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो साल पहले सन्
2020 में हरेली के दिन गो-धन न्याय योजनाशुरू की थी। शुरूआत में किसी ने कल्पना नहीं की थी, कि गोबर खरीदी की यह योजना गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। आज यह ग्रामीण अंचल की बेहद लोकप्रिय योजना साबित हुई है। 

इस अनूठी योजना के तहत सरकार ने गोबर को ग्रामीणों की आय का नया जरिया बनाया और किसानों और पशुपालकों से दो रूपए की दर से गोबर खरीदी शुरू की। पशुपालक ग्रामीणों ने गोबर बेचकर पिछले दो सालों में 150 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में स्व-सहायता समूहों ने 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया है, जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक महिला समूह और गौठान समितियां 143 करोड़ से अधिक की राशि वर्मी खाद के निर्माण और विक्रय से प्राप्त कर चुकी हैं। 

इसके साथ ही गौठानों में गोबर से दिए, गमले सहित विभिन्न सजावटी समान बनाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का नया साधन मिला है। गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए राज्य सरकार इस साल हरेली तिहार से गौठानों में 4 रूपए प्रति लीटर की दर से गो-मूत्र की खरीदी की शुरूआत करने जा रही है। इस गो-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह द्वारा जीवामृत और कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किये जाएंगे। इससे रोजगार और आय का नया जरिया मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और कृषि लागत कम होगी। 

गौ-मूत्र से बने कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी। इन नवाचारों ने हरेली को प्रदेश में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अध्यायों का प्रतीक बना दिया है। इससे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज का सपना अब आत्मनिर्भर गांवों के रूप में छत्तीसगढ़ में साकार हो रहा है। 

छत्तीसगढ़ में परंपराओं को सहेजते हुए उसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की जो शुरूआत की गई है, उसे जरूरत है सबके सहयोग से आगे बढ़ाने की। प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का हमारा यह कदम बेहतर कल के लिए सर्वोत्तम योगदान होगा।

 

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