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जीवनभर चिकित्सक बन की सेवा, मरणोपरांत भी बने मानवता की मिसाल

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रायपुर। शंकर नगर निवासी एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ. सुगन चंद छाजेड़, जिन्होंने अपना पूरा जीवन चिकित्सा सेवा को समर्पित किया, मरणोपरांत भी मानवता की सेवा की मिसाल बन गए। डॉ. छाजेड़ का पार्थिव शरीर शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से पं. जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज रायपुर को प्राप्त हुआ है।

जीवनकाल में डॉ. छाजेड़ शरीर के महत्व और चिकित्सा शिक्षा में उसकी आवश्यकता को भली-भांति समझते थे। यही कारण था कि उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद भी शरीर को चिकित्सीय अनुसंधान और शिक्षा के लिए समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की थी। उनकी इस महान इच्छा का सम्मान करते हुए छाजेड़ परिवार ने उनका देहदान किया, जिससे भावी चिकित्सकों को प्रशिक्षण और शोध में अमूल्य सहयोग मिलेगा। यह प्रेरणादायी कदम समाज में देहदान के महत्व को नई दिशा देता है।

मरणोपरांत उनके इस अमूल्य योगदान के लिए पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के एनाटॉमी अर्थात शरीर रचना विज्ञान विभाग के द्वारा उनके परिवार को देहदान का सर्टिफिकेट भी प्रदान किया गया।


शिक्षा की गुणवत्ता ही बना सकती है भारत को विश्व में सिरमौर: शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

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रायपुर। भारत को विश्व सिरमौर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जरूरत है, शिक्षण संस्थाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्रों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना होगा। शिक्षण संस्थाओं को नवाचार को बढ़ावा देकर छात्रों को रचनात्मक सोच के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ये बातें छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रतिभा सम्मान समारोह और वार्षिकोत्सव के अवसर पर कही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री अग्रवाल ने कहा कि जिन छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है, उनमें से कई को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती है। जिस कारण वे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। उच्च शिक्षण संस्थाओं को छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्हें छात्रों को अनुसंधान में भाग और नवाचार के लिए हमेशा प्रोत्साहित करना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ ही खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों पर जोर देना चाहिए।

इस दौरान शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने महाविद्यालय में आयोजित पुरातात्विक प्रतिकृति कार्यशाला का भी निरीक्षण कर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया। कार्यक्रम में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष श्रीमती मीनल चौबे, प्राचार्या डॉ. किरण गजपाल सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय के शिक्षक और छात्राएं उपस्थित थी।

शिक्षकों ने जाना स्वस्थ जीवन शैली के लिए योगाभ्यास का महत्व

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रायपुर। शिक्षकों को स्वस्थ जीवन शैली और योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली का महत्व समझाने और योगासनों की जानकारी के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था के द्वारा रायपुर के निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल सिंह ग्रामीण विकास संस्थान प्रशिक्षण केंद्र में संभागीय योग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

वर्तमान में दुर्ग संभाग के विभिन्न जिलों से आए लगभग 106 शिक्षकों को 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के चौथे दिन को योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए तथा शिक्षकों को योग का महत्व समझाया। इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा योगाभ्यास और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति दी। प्रशिक्षण केन्द्र में बस्तर, बिलासपुर, अंबिकापुर तथा रायपुर संभाग के शासकीय स्कूलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण सम्पन्न हो चुका है।

कौशल विकास से मिलेगा रोजगार : राजेश सिंह राणा

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रायपुर। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा है कि शिक्षा की उपयोगिता तभी सिद्ध होगी जब हम उसे व्यवसाय से जोड़ेंगे। बच्चों में विभिन्न प्रकार के कौशलों का विकास करेंगे तो वे जब शिक्षा ग्रहण करने निकलेंगे तब उनके हाथ में रोजगार होगा। राणा राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में व्यवसायिक शिक्षा पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला में कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के पाठ्यपुस्तकों में दिए गए विषयवस्तु को व्यवसाय से किस प्रकार संबद्ध किया जा सकता है, विषयवार उन कौशलों की पहचान करें जिन्हें बच्चों में विकसित किया जाना है। कार्यशाला का आयोजन शिक्षा को गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद संस्थान और एससीईआरटी द्वारा किया गया।



राजेश सिंह राणा ने कहा कि राज्य के छात्र-छात्राएं जीवन में बेहतर कार्य कैसे कर सकते हैं। उन्होंने व्यवसायिक शिक्षा की उपयोगिता और महत्ता बताई। राणा ने कहा कि हमारी शिक्षा ऐसी हो जो समाज को एक बेहतर नागरिक देने का उद्देश्य को पूर्ण कर सके। शिक्षण पद्धति ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ विषय आधारित हो अपितु विद्यार्थियों को रोजगार के नए-नए अवसर प्रदान कर सकें। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की संयुक्त संचालक निशी भांबरी ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा की हमारी शिक्षा ऐसी हो जो विद्यार्थियों को हेड,हार्ट और हैंड से जोड़े तथा रोजगार से जुड़कर एक सम्मानजनक जीवन जी सके। इस अवसर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद की डॉ. योगिता मंडोले भी उपस्थित थी।

कार्यशाला में एससीईआरटी के अकादमिक सदस्यों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, गणित साइंस, सामाजिक विज्ञान विषयों में व्यवसायिक कौशल को चिन्हांकित किया गया, जिससे शिक्षक विषय पढ़ाते हुए विद्यार्थियों में विभिन्न कौशल जैसे लेखन, वक्ता, अभिनय, मूर्तिकला, काष्ठ कला, गीत, नृत्य, संगीत आदि कौशलों का विकास कर सकते है। जिससे विद्यार्थी व्यवसायिक कौशल के साथ साथ आर्थिक रूप से सक्षम हो सके। इस कार्यक्रम में एससीआरटी के विषय विशेषज्ञों के अलावा सहयोग के लिए डाइट के अकादमिक सदस्य भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने एम्स रायपुर के वार्षिकोत्सव ‘ओराएना 2022‘ का किया शुभारंभ

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रायपुर। एम्स रायपुर ने पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में विशेष उपलब्धि हासिल की है और देश में स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उक्त बातें राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज एम्स रायपुर के वार्षिकोत्सव ‘‘ओराएना 2022‘‘ के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से कहीं। इस दौरान एम्स रायपुर के विद्यार्थियों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से नाटक व नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। राज्यपाल ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने, मनोरोग को नजरअंदाज न करने और इसके रोगियों से संवेदनशील व्यवहार करने का आग्रह किया। इस अवसर पर राज्यपाल और एम्स के चिकित्सकों ने संस्थान के वार्षिक स्मारिका का विमोचन किया।

 


राज्यपाल ने अपने संबोधन में वार्षिक उत्सव के आयोजन के लिए एम्स प्रबंधन और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि ओराएना का अर्थ सूर्याेदयहै और विद्यार्थियों की उपस्थिति से वास्तव में यह परिसर सूर्याेदय की लालिमा, शीतलता, और ऊर्जा का आभास करा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि कि युवाओं की यही ऊर्जा भविष्य के भारत को आकार देगी और विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने का हमारा संकल्प पूरा होगा। राज्यपाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर विस्तार हो रहा है। साथ ही ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के मेडिकल की पढ़ाई करने में भाषाई अवरूद्धता को दूर करने में उनके नेतृत्व में महत्वपूर्ण पहल हुई है। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई से भी लाखों युवाओं के डॉक्टर बनने का सपना साकार होगा।

राज्यपाल ने आगे कहा कि उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलने से छत्तीसगढ़ और आस-पास के क्षेत्रवासियों के लिए एम्स रायपुर किसी वरदान से कम नहीं है। साथ ही संस्थान में प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सक बन रहे हैं, जिससे बेहतर चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो पा रही है। उन्होंने कहा कि एक संस्थान के रूप में यह उपलब्धि भारत में स्वास्थ्य सुविधा के बढ़ते दायरे का सशक्त उदाहरण है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि चिकित्सक के रूप में आपके भावी जीवन में कई ऐसे मौके आएंगे, जब आपके प्रयासों से किसी की जान बचेगी या उनकी शारीरिक परेशानी दूर होगी, तभी वास्तव में आपको आत्मसंतुष्टि मिलेगी और इस पेशे के महत्व को समझ पाएंगे। उन्होंने आमजनों को सस्ता, सुगम और बेहतर इलाज कैसे मिले, इस दिशा में प्रयास करने पर जोर दिया।



राज्यपाल ने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि चिकित्सकीय पेशे का जितना संबंध अध्ययन से है, उतना ही मानवीय संवेदना और सतर्कता के साथ कार्य करने से। उन्होंने चिकित्सकों की कार्यशैली के बारे में बताते हुए उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी। राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वार्षिक उत्सव में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक और शारीरिक गतिविधियों का आयोजन चिकित्सकों और विद्यार्थियों के मनोरंजन और तनाव प्रबंधन में सहायक होगा। विद्यार्थी अपने रूचि के अनुरूप विधा या गतिविधि में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पायेंगे और इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि वार्षिक उत्सव में मेडिकल के साथ-साथ इंजीनियरिंग, लॉ और गैर तकनीकी क्षेत्रों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं और मुझे विश्वास है कि सभी विद्यार्थी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेल भावना को सर्वाेपरि बनाए रखेंगे।

राज्यपाल ने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत चिंता व्यक्त करते हुए एम्स प्रबंधन से आग्रह किया कि वे इस आशय से आसपास के गांव और स्कूलों में जागरूकता शिविर का आयोजन करें। युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों को नियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि और स्वच्छता के फायदों की जानकारी दें। राज्यपाल ने कोविड-19 के आपदा को स्मरण करते हुए कहा कि इस कठिन समय में डॉक्टरों ने हमारा हौसला बनाये रखा। सेवा की जो शपथ आप सभी ने ली थी उसका अक्षरशः पालन कर कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के अर्थ को पूरे देश को समझाया है। उन्होंने एम्स रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर के समर्पित कार्यशैली की भी प्रशंसा की और आगे स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और बेहतर कार्य करने को कहा। इस दौरान एम्स प्रबंधन ने राज्यपाल सुश्री उइके को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच जरुरी : राज्यपाल सुश्री उइके

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके अपने एक दिवसीय रायगढ़ प्रवास के दौरान आज ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। यहां उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह आपके जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने का प्रतीक है। आप सभी ने अपने मूल विषय में ज्ञान और अंर्तदृष्टि प्राप्त करने तथा मूल्यों को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। इसी प्रकार जीवन में लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के फलस्वरूप ही आप सफलता के सोपान तय करेंगे।



दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सुश्री उइके ने 31 स्वर्ण, 28 रजत और 27 कांस्य पदक सहित कुल 738 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की और उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं की। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवाओं को प्रशिक्षित तथा प्रेरित करने के साथ-साथ उनमें उद्यमशीलता की भावना जगाने की जरूरत है। उन्हें अपना रास्ता तय करने के लिए मार्गदर्शित करने की आवश्यकता है। प्रत्येक विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि वह संकल्पना करें और राष्ट्र के विकास के लिए नई और उपयुक्त तकनीकों का निर्माण करें। 



राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि अनुसंधान के लिए, समस्या समाधान के लिए, विकास के लिए अपने विद्यार्थियों के बीच नए विचारों, नवाचारों और उद्यमिता की सोच को पल्लवित और पोषित करे। नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को कार्यशालाओं और उत्पादन तक लाकर दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब आप संकल्प लेंगे कि पूरा राष्ट्र आपका परिवार है तो पूरे देश को शक्ति मिलेगी और वास्तव में आपकी उपलब्धियों और क्षमता का राष्ट्र निर्माण में सदुपयोग हो पाएगा। 

मेरा आग्रह है कि आप जो भी कार्य करें, उसमें राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल से देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है जो समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। निश्चित ही 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल शिक्षा नीति अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाएगा। उन्होंने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने की विद्यार्थियों को सीख भी दी।



साथ ही राष्ट्र के विकास में बाधा डालने वाले बुराईयों को दूर करने में अपनी भूमिका निभाने को कहा।राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आप अपने आपको इतना योग्य बनायें कि आजीविका आपकी खोज करें न की आप आजीविका की। विश्वविद्यालय के परिसर से दीक्षित होकर निकलना, आपको समाज की उच्च अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी भी देता है। उन्होंने कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस विश्वविद्यालय में देश के 18 से अधिक राज्यों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 

यह परिसर विद्यार्थियों को एक बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय वातावरण उपलब्ध करा रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों का आपसी संवाद उन्हें एक व्यापक दृष्टि देता है और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है। इस मौके पर यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल ने सभी पास आउट विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीे।

समारोह में स्वागत उद्बोधन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ आर डी पाटीदार ने दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी के एकेडमिक एक्टिविटी के साथ उपलब्धियों का ब्योरा साझा किया। इस अवसर पर डॉ उमेश मिश्रा, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, शहीद नंद कुमार पटेल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ ललित प्रकाश पटेरिया, एडीएम सुश्री संतन देवी जांगड़े सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, उनके परिजन व यूनिवर्सिटी के स्टाफ उपस्थित थे।

नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी प्रौढ़ शिक्षा के पाठ्यचर्या में होगी शामिल

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रायपुर. राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद रायपुर में राज्य की पाठ्यचर्या की रूपरेखा के विकास के संदर्भ में राज्य संचालन समिति की बैठक में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एवं शिक्षाविद् डॉ. सुशील त्रिवेदी ने सुझाव दिया कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए. शिक्षा में त्रिभाषा फार्मूला लागू हो, भाषा सिखाने के साथ-साथ संप्रेषण कौशल पर जोर दिया जाना चाहिए. उन्होंने प्रौढ़ शिक्षा के संदर्भ में उनका कहना था कि प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी और वनांचल क्षेत्रों के लिए वनोपज केंद्रों में इस कार्यक्रम को जोड़ा जाना चाहिए. डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आंकलन पद्धति में बदलाव की जरूरत है


राज्य की विविधता को देखते हुए आंकलन योजना तैयार करनी चाहिए. प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित सभी विभागों को एकजुट होकर काम करना चाहिए. उल्लेखनीय है कि पाठ्यचर्या की रूपरेखा स्कूल शिक्षा के प्रत्येक पहलू को दिशा निर्देशित करने वाला दस्तावेज होता है. नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार चार पाठ्यचर्याएं- स्कूल शिक्षा, ईसीसीई, शिक्षक-शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा का विकास किया जाना है. एनसीईआरटी के अपर संचालक डॉ.योगेश शिवहरे ने विश्वास जताया कि राज्य की आवश्यकता और संस्कृति के अनुकूल ही राज्य की पाठ्यचर्या तैयार की जाएगी. 

उन्होंने कहा कि पाठ्यचर्या इस तरह तैयार करें कि प्रत्येक बच्चे को विकास के समुचित अवसर प्राप्त हो सकें. राज्य में प्रारंभिक शिक्षा के प्रत्येक पहलू के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य में बालवाड़ी का संचालन किया जा रहा है, जिससे बच्चे प्रारंभिक साक्षरता और संख्या ज्ञान में महारत हासिल कर सकें और उनके सीखने की नींव मजबूत हो. आगे की कक्षाओं की शिक्षा के लिए भी इसी तरह की पुख्ता रणनीति तय करनी होगी. जिससे बच्चे अपेक्षित स्तर को प्राप्त कर सकें.

एनएच गोयल स्कूल की श्रीमती कल्पना चौधरी का कहना था कि बच्चों को विषयों के चुनाव और व्यवसायिक कौशल के संबंध में स्कूल कॉन्प्लेक्स की अवधारणा कारगर सिद्ध होगी। स्टेट स्टीयरिंग कमेटी के समक्ष 4 विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया. ईसीसीई अर्थात बाल्य शिक्षा देखभाल विषय पर सुनील मिश्रा ने स्कूल शिक्षा, सुश्री नीलम अरोरा ने शिक्षक-शिक्षा विषय, आलोक शर्मा और राज्य साक्षरता मिशन के सहायक संचालक प्रशांत पांडेय ने प्रौढ़-शिक्षा पर प्रभावशाली प्रशिक्षण दिया.

बैठक में प्राध्यापक सुश्री पुष्पा किस्पोट्टा, महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक दिलदार सिंह मरावी, रविशंकर विश्वविद्यालय के सी.डी. अगाशे और अशोक प्रधान, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के उप सचिव जे.के. अग्रवाल, डाइट रायपुर के आर.के. वर्मा, दिव्यांग महाविद्यालय की सुश्री शिखा वर्मा, पूर्व सहायक प्राध्यापक उत्पल चक्रवर्ती, सुधीर श्रीवास्तव, एन.के. प्रधान, शिक्षा महाविद्यालय रायपुर-बिलासपुर के प्राचार्य, संस्कृत विद्या मंडलम, मदरसा बोर्ड, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और लर्निंग लैंग्वेज फाउंडेशन के प्रतिनिधि सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे.

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