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वर्ष के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय की प्रमुख पहलें, उपलब्धियाँ एवं कार्यक्रम

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ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना

ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए PLI योजना ₹25,938 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (Advanced Automotive Technology – AAT) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने, लागत संबंधी चुनौतियों को दूर करने और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। यह योजना 15.09.2021 को स्वीकृत की गई थी तथा इसका कार्यकाल वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक है, जबकि प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइड्रोजन फ्यूल सेल कंपोनेंट्स पर 13%–18% तथा अन्य AAT कंपोनेंट्स पर 8%–13% तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। योजना के तहत 82 आवेदकों को स्वीकृति दी गई है, जिनसे लगभग ₹42,500 करोड़ का निवेश, ₹2,31,500 करोड़ की अतिरिक्त बिक्री तथा पाँच वर्षों में लगभग 1.48 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

30.09.2025 तक PLI–ऑटो योजना के अंतर्गत ₹35,657 करोड़ का संचयी निवेश और ₹32,879 करोड़ की संचयी बिक्री दर्ज की गई है तथा 48,974 लोगों को रोजगार मिला है।
वित्त वर्ष 2023–24 पहला प्रदर्शन वर्ष रहा, जिसके लिए ₹322 करोड़ का भुगतान वित्त वर्ष 2024–25 में किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024–25 के लिए ₹1,999.94 करोड़ के दावे वितरित किए गए हैं।

31.12.2025 तक कुल 13,61,488 इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान किया गया है, जिसमें ई-टू व्हीलर, ई-थ्री व्हीलर, ई-फोर व्हीलर और ई-बसें शामिल हैं। योजना के अंतर्गत न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) अनिवार्य है।

पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना

₹10,900 करोड़ के परिव्यय के साथ PM E-DRIVE योजना 29.09.2024 को शुरू की गई। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना तथा EV विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। इस योजना को 31.03.2028 तक बढ़ाया गया है, जबकि ई-2W और ई-3W के लिए अंतिम तिथि 31.03.2026 ही रहेगी।

31.12.2025 तक ₹1,703.32 करोड़ के दावे वितरित किए गए तथा 21,36,305 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए। ई-थ्री व्हीलर (L5) का लक्ष्य दिसंबर 2025 में ही प्राप्त कर लिया गया।

इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (SMEC)

यह योजना 15 मार्च 2024 को अधिसूचित की गई, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश आकर्षित करना, भारत को इलेक्ट्रिक कार विनिर्माण का केंद्र बनाना और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

पीएम ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना

28 अक्टूबर 2024 को अधिसूचित यह योजना ₹3,435.33 करोड़ के परिव्यय के साथ सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा ई-बस संचालन में भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लागू की गई है।

एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI योजना

₹18,100 करोड़ के परिव्यय के साथ 50 GWh घरेलू बैटरी विनिर्माण क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना से अब तक ₹2,878 करोड़ का निवेश और 1,118 रोजगार सृजित हुए हैं।

कैपिटल गुड्स सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना – चरण II

इस योजना के अंतर्गत प्रौद्योगिकी नवाचार, कौशल विकास, परीक्षण एवं प्रमाणन तथा उद्योग त्वरकों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक 29 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है।

अन्य प्रमुख पहलें

  • बैटरी स्टोरेज मांग पर राष्ट्रीय स्तर की गोलमेज बैठक

  • ई-मोटर्स पर चिंतन शिविर

  • पीएम ई-ड्राइव के अंतर्गत ई-ट्रकों को प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ

  • भारत–सऊदी अरब औद्योगिक सहयोग पर उच्चस्तरीय बैठक

  • विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 का सफल कार्यान्वयन

  • भारी उद्योग मंत्रालय की हिंदी पत्रिका “उद्योग भारती” के द्वितीय संस्करण का विमोचन


दिल्ली में सड़क अवसंरचना और डी-कंजेशन योजनाओं की समीक्षा, ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य पर जोर

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली में प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति, यातायात भीड़ कम करने की रणनीतियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सेहरावत, दिल्ली के मुख्य सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


चर्चा की शुरुआत करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण–अनुकूल गतिशीलता प्रणालियों के माध्यम से “विकसित भारत” की भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण दिल्ली को एक आदर्श शहर के रूप में विकसित करना है—जो भीड़–मुक्त, बेहतर रूप से जुड़ा हुआ और भविष्य के लिए तैयार हो, साथ ही नागरिकों और यात्रियों के जीवन स्तर में सुधार लाए।

मल्होत्रा ने कहा कि “विकसित दिल्ली”—जो भीड़–मुक्त, जुड़ी हुई और नागरिक–केंद्रित हो—चार स्तंभों पर आधारित है:

  1. भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगाने वाली अवसंरचना, न कि केवल वर्तमान यातायात पर प्रतिक्रिया करने वाली।

  2. एकीकृत योजना—राजमार्गों को शहरी सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जोड़ना।

  3. सतत गतिशीलता—उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन।

  4. लोगों को प्राथमिकता देने वाला डिजाइन—सुरक्षा, पहुंच और सुविधा पर विशेष जोर।

मंत्री ने UER-II के साथ बनने वाली द्वितीयक सर्विस सड़कों की समीक्षा की, जो आस-पास के गांवों और बस्तियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना वर्तमान में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) चरण में है। स्थानीय नागरिकों की पहुंच, सुरक्षा और सर्विस सड़कों को कॉलोनियों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और संस्थागत परिसरों से जोड़ने से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने DDA को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि NHAI, कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, अपने दायित्व समयबद्ध रूप से पूरे करेगी। साथ ही, NHAI और DDA को आपसी समन्वय के साथ आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ाने के निर्देश दिए।

मंत्री हर्ष मल्होत्रा और सांसद कमलजीत सेहरावत ने UER-II के खुलने के बाद द्वारका उप-नगर में बढ़ी यातायात भीड़ पर भी ध्यान दिया। यद्यपि UER-II का निर्माण DDA मास्टर प्लान के अनुरूप किया गया है, लेकिन आंतरिक कॉलोनियों और सेक्टरों में यातायात के उचित वितरण के लिए त्वरित योजना और क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई।

मंत्री ने DDA, नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य हितधारकों को निर्देश दिए कि वे द्वारका उप-नगर में भीड़ कम करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार करें—जैसे आंतरिक सड़कों से होकर गुजरने वाले यातायात का विचलन, हवाई अड्डे और गुरुग्राम कॉरिडोर से बेहतर संपर्क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के साथ बेहतर एकीकरण तथा बुद्धिमान यातायात प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना।

मंत्री ने दिल्ली के उन तीन प्रमुख सड़क कॉरिडोरों की भी समीक्षा की, जिन्हें रखरखाव, मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए PWD से NHAI को सौंपा गया है। ये तीन मार्ग—मथुरा रोड (आश्रम से बदरपुर बॉर्डर), ओल्ड दिल्ली–रोहतक रोड (पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर) और महरौली–गुरुग्राम रोड (महरौली से गुरुग्राम शहर)—कुल 33 किमी लंबे हैं और दिल्ली को पड़ोसी क्षेत्रों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग हैं। मंत्री ने परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने दिल्ली डी-कंजेशन प्लान की भी समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डी-कंजेशन केवल यातायात कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वाहन उत्सर्जन में कमी, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।

दिल्ली डी-कंजेशन प्लान के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

  • दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे (NE-5) का KMPE से UER-II (NH-344M) तक विस्तार, जिससे UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और कटरा के बीच सीधा संपर्क मिलेगा।

  • UER-II (NH-344M) का अलीपुर के पास से दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) तक विस्तार, जो NH-44/दिल्ली आउटर–इनर रिंग रोड के लिए बाईपास का कार्य करेगा।

  • द्वारका एक्सप्रेसवे (शिव मूर्ति, महिपालपुर के पास) से नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज तक सड़क सुरंग का निर्माण, जिससे यातायात का सुगम प्रवाह सुनिश्चित होगा।

मंत्री ने केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) और सेतु बंधन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, धन आवंटन और कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाएं पूर्णता के निकट हैं। मंत्री ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में DDA, NHAI, PWD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली परिवहन विभाग, IGL के बीच लंबित अन्य मुद्दों—जैसे भूमि हस्तांतरण और राइट-ऑफ-वे स्वीकृतियां—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों के शीघ्र समाधान को परियोजनाओं की समय-सीमा बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया।

मंत्री ने सभी एजेंसियों को स्वीकृतियों के लिए समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। सभी एजेंसियों ने निरंतर समन्वय बनाए रखने और लंबित मामलों को शीघ्र निर्णय के लिए उच्च स्तर पर उठाने पर सहमति जताई।

दिल्ली के मुख्य सचिव ने कहा कि समन्वित और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही नागरिकों को वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

समापन टिप्पणी में हर्ष मल्होत्रा ने “विकसित दिल्ली — डी-कंजेस्ट दिल्ली” के लक्ष्य को साकार करने के लिए साझेदारी में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया और सभी विभागों की रचनात्मक भागीदारी की सराहना करते हुए दिल्ली के अवसंरचना परिवर्तन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

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