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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माउंट अकोंकागुआ के लिए संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को दिखाई हरी झंडी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली से अर्जेंटीना के माउंट अकोंकागुआ के लिए एक संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 6,961 मीटर ऊँचा माउंट अकोंकागुआ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी है और एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी मानी जाती है। यह संयुक्त अभियान उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) और पहलगाम स्थित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS) द्वारा किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने इस अभियान के लिए कर्मियों को साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ तैयार करने के लिए NIM और JIM&WS की सराहना की। उन्होंने दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस दुर्गम शिखर पर चढ़ाई केवल शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता की भी कसौटी है, जो भारत के श्रेष्ठ पर्वतारोहियों की पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अभियान दल दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर देश का नाम रोशन करेगा।

छह सदस्यीय इस अभियान दल में अनुभवी और प्रशिक्षित प्रशिक्षक शामिल हैं—कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाईं, नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार। यह अभियान 06 फरवरी 2026 से प्रारंभ होगा और इसके महीने के अंत तक संपन्न होने की संभावना है।

माउंट अकोंकागुआ पर प्राप्त अनुभव, ज्ञान और आत्मविश्वास का सीधा लाभ देशभर के युवाओं, सशस्त्र बलों के कर्मियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के प्रशिक्षण को अधिक सुरक्षित, सशक्त और प्रभावी बनाने में मिलेगा। यह अभियान वैश्विक स्तर पर साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपस्थिति का भी प्रतीक है।

रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय सेना दिवस पर शुभकामनाएँ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को भारतीय सेना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर भारतीय सेना के वीर जवानों एवं उनके परिवारजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र भारतीय सेना के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और देश की संप्रभुता व अखंडता की रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को नमन करता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर सदैव सतर्क रहने वाली और संकट के समय दृढ़ता से खड़ी रहने वाली भारतीय सेना ने अपनी पेशेवर दक्षता, अनुशासन एवं मानवीय सेवा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सम्मान अर्जित किया है। उन्होंने एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र गर्व और सम्मान के साथ अपने सैनिकों के साथ एकजुट खड़ा है।

दिन के उत्तरार्ध में रक्षा मंत्री जयपुर में आयोजित सेना दिवस समारोह में भी शिरकत करेंगे।


वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इथियोपिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होने पर अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किए जाने पर बधाई दी है और इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया है।

‘एक्स’ पर एक पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,

“हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किए जाने पर हार्दिक बधाई। यह किसी विदेशी देश द्वारा मोदी जी के नेतृत्व और राजनयिक कौशल को दिया गया 28वां सम्मान है, जो उनके नेतृत्व में वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। यह सम्मान भारत और इथियोपिया के बीच मित्रता में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।”

भारत का गौरव: दीपावली अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

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दीपावली, प्रकाश का पर्व, अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage of Humanity) सूची में शामिल हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 8 से 13 दिसंबर 2025 के दौरान दिल्ली के लाल किले में आयोजित 20वें यूनेस्को इंटरगवर्नमेंटल कमेटी सत्र में की गई। यह सूची में शामिल होने वाला भारत का 16वां तत्व है। इस निर्णय में 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधि उपस्थित थे। दीपावली, जो पीढ़ियों से समुदायों द्वारा जीवंत रूप में मनाई जाती है, सामाजिक एकता को बढ़ावा देती है और विकास में योगदान देती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनेस्को की इस मान्यता का स्वागत करते हुए कहा कि दीपावली भारत की संस्कृति और जीवन मूल्यों से गहरे जुड़ा हुआ है और यह हमारी सभ्यता की आत्मा का प्रतीक है।

यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में किसी भी तत्व को शामिल करने के लिए संबंधित राज्यों को नामांकन दस्तावेज़ प्रस्तुत करना होता है। प्रत्येक देश दो साल में एक तत्व का नामांकन कर सकता है। भारत ने 2024–25 चक्र में ‘दीपावली’ का नामांकन किया।

दीपावली केवल वार्षिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के भावनात्मक और सांस्कृतिक जीवन में बसी एक जीवंत परंपरा है। दीपों की रोशनी से जगमगाते शहरों, गांवों और प्रवासी घरों में यह त्योहार खुशियों, नवीनीकरण और सामाजिक मेलजोल का संदेश फैलाता है।

यूनेस्को ने 17 अक्टूबर 2003 को पेरिस में अपनी 32वीं आम सभा में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (ICH) की सुरक्षा हेतु 2003 कन्वेंशन को अपनाया। इसका उद्देश्य जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं, मौखिक प्रथाओं, प्रदर्शन कला, सामाजिक रीति-रिवाज, ज्ञान प्रणाली और हस्तकला को वैश्वीकरण और सामाजिक परिवर्तनों से होने वाले संकट से सुरक्षित करना है।

दीपावली का मूल दर्शन समृद्धि, नवीनीकरण और सभी के लिए सौभाग्य मनाने पर आधारित है। यह विविधताओं में एकता का संदेश देती है। घरों, गलियों और मंदिरों को अनगिनत दीपों से सजाया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक हैं। बाजार रंग-बिरंगे वस्त्रों और कारीगरी से जगमगाते हैं। शाम होते ही आकाश में आतिशबाजी का भव्य दृश्य देखने को मिलता है।

दीपावली की प्रमुख कथाएँ:

  • रामायण: यह पर्व भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने और रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

  • महाभारत: पांडवों के वनवास से लौटने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है।

  • नरक चतुर्दशी: भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का प्रतीक।

  • जैन धर्म: भगवान महावीर का निर्वाण दिवस।

  • त्रिपुरासुर वध: भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय।

  • राजा बाली का स्वागत (महाराष्ट्र), काली पूजा (बंगाल, ओडिशा, असम) और गोवर्धन/अन्नकूट (कृष्ण की कथा)

दीपावली में लोग रंगोली बनाते हैं, मिठाइयाँ बनाते हैं, घर सजाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, उपहार बदलते हैं और सामुदायिक आयोजन करते हैं। यह त्योहार सामाजिक एकता, नवाचार और संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है।

पाँच दिवसीय उत्सव:

  1. धनतेरस: नई चीज़ों की खरीद और समृद्धि का प्रतीक।

  2. नरक चतुर्दशी: नकारात्मकता दूर करने के लिए दीप जलाना।

  3. मुख्य दिन – लक्ष्मी-गणेश पूजा: घरों में दीपों और रंगोली से सजावट।

  4. पंचमी: मित्रों और परिवार से मिलना, उपहार देना।

  5. भाई दूज: भाई-बहन के रिश्तों का उत्सव।

दीपावली ग्रामीण समुदायों के जीवन और कृषि चक्र को सम्मान देती है। कुम्हार, दीपक निर्माता, सजावटकर्ता, फूल विक्रेता, मिठाई निर्माता, जौहरी, कारीगर और छोटे व्यवसाय इस त्योहार में अपनी कला और कारीगरी के माध्यम से आर्थिक योगदान करते हैं। यह त्योहार दान, उदारता और खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा देता है।

हाल के वर्षों में दीपावली उत्सवों में पर्यावरणीय जागरूकता भी महत्वपूर्ण हुई है। सरकार ने “ग्रीन क्रैकर्स” और अभियान जैसे स्वच्छ दीवाली और शुभ दीवाली के माध्यम से पारंपरिक त्योहार को पर्यावरण-हितैषी बनाने का प्रयास किया।

दीपावली का सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र गरीबी उन्मूलन, लिंग समानता, सामाजिक कल्याण और शिक्षा जैसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान देता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों, प्रवासियों और समुदायों से प्राप्त समर्थन और अनुभवों के आधार पर, दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह सम्मान उन लाखों लोगों को समर्पित है जो इसे श्रद्धा और निष्ठा के साथ मनाते हैं, और उन कारीगरों को जिन्होंने इसे जीवित रखा।

दीपावली विश्व को यह संदेश देती है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल याद की गई नहीं, बल्कि जिया और आगे बढ़ाया गया है।


छत्तीसगढ़ के आसमान पर बिखरेगी तिरंगे की झटा

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नया रायपुर में सूर्य किरण का रोमांचक एयर शो 5 नवंबर को

फाइटर प्लेन मनूवर करते हुए बनाएंगे हार्ट, डायमंड, लूप, ग्रोवर, डान जैसी कई फार्मेशन

नौ फाईटर प्लेन आधे घंटे तक आसमान में दिखाएंगे करतब

रायपुर-भारतीय वायुसेना की एरोबेटिक सूर्य किरण टीम का छत्तीसगढ़ के आसमान में रोमांचक प्रदर्शन 5 नवंबर को होगा। यह प्रदर्शन नवा रायपुर के सेंध जलाशय के उपर आसमान में होगा। छत्तीसगढ़ स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ पर सूर्य किरण टीम के हैरतअंगेज हवाई करतब के लिए सूर्य किरण की टीम रायपुर पहंुच चुकी है। रोमांच से भरे इस प्रदर्शन में सूर्य किरण टीम के 9 फाइटर प्लेन शामिल होंगे।  

सूर्य किरण टीम के लीडर अजय दशरथी और अन्य सदस्यों ने सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन को लेकर स्थानीय न्यू सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि भारतीय वायु सेना में भर्ती के लिए युवाओं को आकर्षित करने और युवाओं में देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए यह प्रदर्शन किया जा रहा है। यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ वासियों के लिए एक यादगार पल होगा। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ के फाइटर पायलेट गौरव पटेल भी भाग लेंगे। सूर्य किरण टीम के 140 सदस्य रायपुर पहुंच चुके हैं। इस टीम में 12 फायटर पायलेट, 3 इंजीनियर और ग्राउड स्टाफ हैं। प्रदर्शन के दौरान वायु सेना द्वारा कामेंट्री भी की जाएगी। 

सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन में फाइटर पाइलट के शौर्य, अनुशासन और कार्यकुशलता का अनुभव दर्शकों के लिए रोमांचक और यादगार पल होगा। सूर्य किरण टीम 4 नवंबर को रिहर्सल करेगी और 5 नंवबर को सुबह 10 बजे से 12 के बीच फाइनल शो होगा।  इस प्रदर्शन में फाइटर प्लेन मनूवर करते हुए हार्ट, डायमंड, लूप, ग्रोवर, डान आदि फार्मेशन आकाश में दिखाई देगा। इसके साथ ही फाइटर प्लेन आर्कषक तिरंगा लहराते हुए आसमान में दिखेगें। सूर्य किरण का एयर शो लगभग 30 से 35 मिनट तक चलेगा। 

सूर्य किरण के फाइटर प्लेन तेजी से मनूवर करते हुए 100 फीट से 10 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, इस शो को इस तरह से डिजाईन किया गया है कि 10 से 15 किमी के मध्य लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाई दे और भारतीय सेना के शौर्य गाथा को महसूस कर सके। 

सूर्य किरण टीम में हिदुस्तान एरोनाटिल लिमिटेड द्वारा निर्मित हाक मार्क 123 विमान शामिल है। इस फाइटर प्लेन का उपयोग फाइटर पायलेट प्रशिक्षण के दौरान भी करते हैं। रायपुर में सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन 15 वर्ष पूर्व किया गया था, जिसमें सूर्य किरण मार्क-2 फाइटर प्लेन ने हिस्सा लिया था।  

सूर्य किरण टीम के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल इंटरटेनमेंट करना ही नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सूर्य किरण की टीम अब तक देश-विदेश में 700 एयर शो कर चुके हैं। हाल में ही टीम ने थाइलेंड में प्रदर्शन किया था। फाइटर पायलटों ने बताया कि 8 माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद एयर शो के लिए सक्षम हो पाते हैं। शो में जोखिम भी है, लेकिन टीम के बेहतर कॉर्डिनेशन और अटूट विश्वास के चलते एयर शो का प्रदर्शन होता है। पत्रकार वार्ता में सूर्य किरण टीम के सदस्य ग्रुप कैप्टन सिद्धेश कार्तिक, स्क्वाड्रन लीडर जसदीप सिंह, राहुल सिंह, गौरव पटेल, संजेश सिंह और फ्लाइट लेफ्टिनेंट कंवल संधू शामिल थे।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत पर दी बधाई — भारतीय खेल जगत के स्वर्णिम अध्याय का साक्षी बना राष्ट्र

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक नया इतिहास रचते हुए आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 का खिताब जीत लिया। शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया ने फाइनल मुकाबले में शानदार जीत हासिल की, जिससे पूरे देश में जश्न और गर्व की लहर दौड़ गई। यह जीत न केवल महिला क्रिकेट के लिए बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर टीम को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने अपने X पोस्ट में कहा:

“आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 फाइनल में भारतीय टीम की शानदार जीत! फाइनल में उनके प्रदर्शन में अद्भुत कौशल और आत्मविश्वास झलक रहा था। पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम ने उत्कृष्ट टीम भावना और दृढ़ता का परिचय दिया। हमारे खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई। यह ऐतिहासिक जीत आने वाले चैंपियनों को खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।”

प्रधानमंत्री ने इस जीत को “नारी शक्ति” और “नए भारत की खेल भावना” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महिला खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम का सफर असाधारण रहा — लीग चरण से लेकर फाइनल तक खिलाड़ियों ने शानदार रणनीति, आत्मविश्वास और एकजुटता का परिचय दिया। फाइनल में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने भारत को विश्व क्रिकेट की चोटी पर पहुँचा दिया।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने एक बार फिर विश्व पटल पर अपना दबदबा साबित किया है। यह विजय केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति, खेल संस्कृति और राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमान में भरी सॉर्टी; दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (29 अक्टूबर 2025) हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन में राफेल विमान में उड़ान (सॉर्टी) भरी। वह दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले, उन्होंने वर्ष 2023 में सुखोई-30 एमकेआई विमान में सॉर्टी ली थी।

अंबाला वायुसेना स्टेशन वह पहला एयरबेस है, जहाँ फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन फैसिलिटी से राफेल विमान सबसे पहले पहुँचे थे।

राष्ट्रपति, जो कि भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी, जिसमें उन्होंने करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की और फिर वायुसेना स्टेशन पर लौट आईं।
इस विमान को ग्रुप कैप्टन अमित गहानी, कमांडिंग ऑफिसर, 17 स्क्वाड्रन ने उड़ाया।
उड़ान के दौरान विमान ने समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट की ऊँचाई पर और करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरी।

बाद में राष्ट्रपति ने विज़िटर्स बुक में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा —

“भारतीय वायुसेना के राफेल विमान में अपनी पहली उड़ान के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन का दौरा कर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। राफेल पर यह उड़ान मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। इस शक्तिशाली राफेल विमान में यह प्रथम उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं में मेरे गर्व को और बढ़ाती है। मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला वायुसेना स्टेशन की पूरी टीम को इस सफल सॉर्टी के आयोजन के लिए बधाई देती हूँ।”

इस अवसर पर राष्ट्रपति को राफेल विमान और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं के बारे में भी अवगत कराया गया।



करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले में अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद, प्रांतीय शाखा छत्तीसगढ़ द्वारा ग्राम कण्डोरा में आयोजित महासम्मेलन (सोहरई करमा महोत्सव 2025) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कुनकुरी में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित रौतिया समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा ग्राम पंचायत कण्डोरा में 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाले रौतिया भवन निर्माण का भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री साय ने समाज की मांग पर ग्राम कण्डोरा में करमा अखरा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए तथा रायपुर में रौतिया भवन पहुँच मार्ग के लिए 25 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने मंच पर रौतिया समाज के वीर शहीद बख्तर साय और मुण्डल सिंह के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे सभी समाज मिलजुलकर मनाते हैं। यह पर्व हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि एकादशी करमा, दशहरा करमा जैसी परंपराएँ हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं। ये उत्सव समाज को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को तीव्र गति से लागू कर रही है। सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रति मानक बोरा दर को 5500 रुपए कर दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने लोगों से वोकल फॉर लोकल अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल उन्मूलन की दिशा में तीव्रता से कार्य कर रही है। दो दिन पूर्व ही 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान स्थित आमा बगीचा के करमा पूजन स्थल पर करम वृक्ष की डाली की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने करमा नर्तक दल के साथ गले में मांदर टाँगकर ताल मिलाते हुए करम वृक्ष की डाली के चारों ओर उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय तथा परिवारजन भी उपस्थित थे।

सोहरई करमा महोत्सव: रौतिया समाज की सांस्कृतिक पहचान

सोहरई करमा महोत्सव मूलतः रौतिया समाज द्वारा गोवर्धन पर्व के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन नए फसल को पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ कर घर लाया जाता है। ग्राम कण्डोरा में आयोजित इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए कुल 52 मंडलों के नर्तक दलों ने सहभागिता की। विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।

इस अवसर पर सांसद राधेश्याम राठिया, अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ. पी. साय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दामोदर सिंह, राष्ट्रीय महासचिव आजाद सिंह, केंद्रीय संगठन मंत्री भुनेश्वर केसर, केंद्रीय महिला सदस्य  उमा देवी सहित समाज के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

भारतीय वायु सेना के MiG-21 को दी भावपूर्ण विदाई, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया समापन समारोह

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ में भारतीय वायु सेना (IAF) के MiG-21 विमानों के सेवा समापन समारोह में कहा, "MiG-21 की विरासत भारत में रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमेशा जीवित रहेगी। यह विमान साहस, अनुशासन और देशभक्ति की निरंतरता का प्रतीक है, जो LCA-Tejas और आगामी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) जैसे स्वदेशी प्लेटफार्मों के विकास को प्रेरित करेगा।"

इस समारोह ने MiG-21 के अधिक छह दशकों के गौरवपूर्ण इतिहास का समापन किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब दुनिया भारत को देखेगी, तो उसे एक ऐसा राष्ट्र दिखाई देगा जिसने MiG-21 से शुरुआत की और अब भविष्य की रक्षा तकनीकों में नेतृत्व कर रहा है।

MiG-21 की बहुमुखी सेवा और योगदान

  • रक्षा मंत्री ने IAF के एयर वारियर्स की वीरता और समर्पण को सलाम किया, जिन्होंने साहस और बलिदान के माध्यम से देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा की।

  • MiG-21 को केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारत की सैन्य विमानन की प्रगति, राष्ट्रीय रक्षा का कवच और सशस्त्र बलों का विश्वसनीय साथी बताया।

  • दुनिया भर में 11,500 से अधिक MiG-21 बनाए गए, जिनमें लगभग 850 IAF में सेवा दे चुके हैं।

  • MiG-21 ने 1971 युद्ध, करगिल संघर्ष, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर सहित कई युद्ध और अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विमान की विशेषताएँ और शिक्षा में योगदान

  • रक्षा मंत्री ने MiG-21 को “सभी मौसम का पंछी” बताया, जो हर भूमिका में दक्ष था – इंटरसेप्टर, ग्राउंड अटैक, फ्रंटलाइन एयर डिफेंस और प्रशिक्षक विमान।

  • MiG-21 ने कई पीढ़ियों के पायलटों को प्रशिक्षित किया और भारतीय वायु रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • यह विमान समय के अनुसार अपडेट होता रहा – ट्रिशूल, विक्रम, बादल और बायसन जैसे अपग्रेडेड संस्करणों के माध्यम से।

  • हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत ने इसे तकनीकी रूप से प्रासंगिक और युद्ध-तैयार बनाए रखा।

सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व

  • रक्षा मंत्री ने कहा कि MiG-21 को अलविदा कहना केवल सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और आभार की भावना को दर्शाता है।

  • उन्होंने इसे दशहरा के समय हथियारों की पूजा के समान बताया, जो उस मशीन के प्रति सम्मान को दर्शाता है जिसने 60 वर्षों से हमारे आकाश की रक्षा की।

  • चंडीगढ़ का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहीं MiG-21 का 28 स्क्वाड्रन में सुपरसोनिक विमानों के रूप में उद्घाटन हुआ था।

समारोह की विशेष झलकियाँ

  • एयर चीफ मार्शल AP सिंह की अगुवाई में विशेष फ्लायपास।

  • अकाश गंगा द्वारा स्काईडाइविंग, MiG-21 के फॉर्मेशन टेक-ऑफ, बादल और पैंथर फॉर्मेशन, एयर वारियर ड्रिल टीम, सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के प्रदर्शन।

  • MiG-21 और LCA Tejas का संयुक्त फ्लायपास, जो बायसन से स्वदेशी तेजस तक की यात्रा को दर्शाता है।

  • छह MiG-21 विमानों का प्रतीकात्मक स्विच-ऑफ और Form-700 दस्तावेज़ का एयर चीफ को हस्तांतरण।

  • विशेष कमरेमरेटिव डे कवर और स्टाम्प जारी किया गया।

  • मेमोरी लेन म्यूजियम का दौरा और एयर वारियर्स एवं वेटरन्स के साथ बड़ा खाना (Bara Khana)।

उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान

  • चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी

  • चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी

  • सचिव DDR&D & DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत

  • वित्तीय सलाहकार (डिफेंस सर्विसेज) डॉ. मयंक शर्मा

साथ ही IAF के वरिष्ठ अधिकारी, वेटरन्स, इंजीनियर, तकनीशियन, ग्राउंड क्रू और एयर वारियर्स ने भाग लिया, जिन्होंने MiG-21 के लंबे operational service में योगदान दिया।



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