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नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 108वीं बैठक

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नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 108वीं बैठक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन करना था।

बैठक में बहु-मॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स दक्षता, अंतिम छोर तक संपर्क (Last-mile connectivity) और “Whole of Government” दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया। NPG ने सड़क क्षेत्र की 7 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया।

इन पहलों से लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि, यात्रा समय में कमी और परियोजना क्षेत्रों में उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलने की अपेक्षा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की परियोजनाएँ

1. सलेम–कुमारपालयम (NH-544) का 6-लेन विस्तार – तमिलनाडु

102.035 किमी लंबा यह उच्च यातायात गलियारा कोच्चि–कोयंबटूर–बेंगलुरु फ्रेट व यात्री कॉरिडोर का हिस्सा है।
परियोजना में:

  • सर्विस रोड

  • जंक्शन व इंटरचेंज का उन्नयन

  • फ्लाईओवर, ROB, पुल और कलवर्ट का निर्माण/चौड़ीकरण

यह परियोजना औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब, SEZ, ICD और लॉजिस्टिक्स पार्क से बेहतर संपर्क सुनिश्चित करेगी तथा वस्त्र, कृषि-प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्रों को लाभ पहुंचाएगी।

2. अमरावती आउटर रिंग रोड (ORR) – आंध्र प्रदेश

189.93 किमी लंबी ग्रीनफील्ड ORR परियोजना अमरावती, विजयवाड़ा, गुंटूर और तेनाली क्षेत्रों में शहरी भीड़ कम करेगी।

  • विजयवाड़ा एयरपोर्ट से सीधा संपर्क

  • नेशनल वाटरवे-4 व मछलीपट्टनम/कृष्णपट्टनम बंदरगाहों से एकीकरण

इससे यात्रा समय में 30–40% की कमी, ईंधन बचत और उत्सर्जन में कमी की उम्मीद है।

3. रफियाबाद–कुपवाड़ा–चौकीबल–तंगधार सड़क – जम्मू एवं कश्मीर

62.10 किमी लंबी दो-लेन सड़क परियोजना:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक कनेक्टिविटी

  • LoC के निकट गांवों तक बेहतर पहुंच

  • रक्षा लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इसके साथ-साथ यह परियोजना पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच में सुधार लाएगी।

4. लेह बाईपास (फ्यांग से लेह-मनाली हाईवे) – लद्दाख

48.108 किमी लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास:

  • लेह शहर की भीड़ कम करेगा

  • NH-01, NH-03 और लेह एयरपोर्ट को जोड़ेगा

इससे औद्योगिक क्षेत्रों, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

5. चित्रकूट–मझगवां–सतना (MP-UP) 4-लेन विस्तार

77.102 किमी का दो-लेन से चार-लेन उन्नयन:

  • अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी मजबूत

  • सतना के सीमेंट उद्योग को लॉजिस्टिक्स लाभ

  • चित्रकूट के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

6. राउरकेला–सिथियो 4-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे – ओडिशा एवं झारखंड

156.10 किमी लंबा हाईवे:

  • PM गतिशक्ति आर्थिक नोड्स, SEZ और सीफूड क्लस्टर से जुड़ाव

  • एशियन हाईवे, NH-53, NH-19 और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल से संपर्क

यह परियोजना क्षेत्रीय और अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी को नई गति देगी।

7. पटना रिंग रोड (NH-131G) – बिहार

9.98 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे:

  • पटना शहर की यातायात भीड़ कम करेगा

  • NH-30, NH-922 से कनेक्टिविटी

  • बिहटा एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच

निष्कर्ष

NPG की 108वीं बैठक में मूल्यांकित ये परियोजनाएँ पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के लक्ष्यों के अनुरूप हैं और

  • बहु-मॉडल कनेक्टिविटी

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता

  • क्षेत्रीय विकास और रोज़गार सृजन

को मजबूती प्रदान करेंगी।


नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक में PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत सड़क और रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन

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आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग और रेलवे से संबंधित आधारभूत संरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक में मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जो PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप हैं।

बैठक में MoRTH (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) की सड़क/राजमार्ग परियोजनाओं और MoR (रेल मंत्रालय) की रेल परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, ताकि ये परियोजनाएँ समेकित मल्टीमोडल इन्फ्रास्ट्रक्चर, अंतिम मील कनेक्टिविटी, और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण के सिद्धांतों के अनुरूप हों। इन पहलों से लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, यात्रा समय में कमी, और परियोजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।

सड़क परियोजनाएं – MoRTH

1. NH-160A का जीर्णोद्धार और उन्नयन (घोटी – पालघर, महाराष्ट्र)

  • लंबाई: 154.635 किलोमीटर

  • उद्देश्य: नासिक और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों (MIDC, Ambad, Satpur) को पश्चिमी तटीय बंदरगाहों से जोड़ने वाला वैकल्पिक फ्रेट कॉरिडोर।

  • लाभ:

    • औद्योगिक और वाणिज्यिक परिवहन के लिए अधिक कुशल पोर्ट पहुंच।

    • शहरी मार्गों में भीड़ कम करना।

    • नासिक, पालघर और दहानू रेलवे हेड्स से इंटरमॉडल कनेक्टिविटी में सुधार।

    • ताजा और नाशपाती जैसी कृषि वस्तुओं का तेज परिवहन।

    • त्रिंबक, जावहर, मैनर और पालघर जैसे क्षेत्रीय केंद्रों में पर्यटन और MSME विकास को बढ़ावा।

2. हिवरखेड़ी – बासिंदा-रोशनी (बेतुल – खंडवा, मध्य प्रदेश) और अशापुर – रूढ़ी (बेतुल – खंडवा)

  • लंबाई: लगभग 300 किलोमीटर

  • उद्देश्य: 2/4 लेन सड़क का विकास और राज्य के महत्वपूर्ण शहरों व औद्योगिक केंद्रों के बीच इंटरस्टेट कनेक्टिविटी में सुधार।

  • लाभ:

    • नागपुर और वडोदरा के बीच वैकल्पिक और छोटा मार्ग।

    • औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच, जैसे बारवानी, अंजाद, खर्गोन, भिकंगांव, और NTPC सुपर थर्मल पावर स्टेशन।

    • क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन।

    • यात्रा समय में कमी, परिवहन लागत में बचत और प्रमुख आर्थिक/प्रशासनिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच।

रेल परियोजनाएं – MoR

1. गमहेरिया – चांडिल (झारखंड) में 3री और 4थी लाइन

  • लंबाई: 56 किलोमीटर

  • उद्देश्य: कंद्रा–चांडिल खंड में भीड़भाड़ कम करना, जो वर्तमान में 130% क्षमता पर संचालित हो रहा है।

  • महत्व:

    • चक्रधरपुर डिवीजन से बर्नपुर और दुर्गापुर स्टील प्लांट्स तथा आसनसोल क्षेत्र के स्पॉन्ज आयरन उद्योग तक कच्चे माल का सुचारू परिवहन।

    • लाइन क्षमता बढ़ाकर फ्रीट और यात्री संचालन में सुधार।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक और खनिज आधारित लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

2. सैंथिया – पाकुर (पश्चिम बंगाल और झारखंड) में 4थी लाइन

  • लंबाई: लगभग 81.20 किलोमीटर

  • उद्देश्य: व्यस्त रेल मार्ग में क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा कॉरिडोर के रूप में औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं और पावर सेक्टर लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

  • लाभ:

    • रेलवे आधारित माल परिवहन को बढ़ावा, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना।

    • फ्रीट गति और ट्रेन समय पालन में सुधार।

    • प्रमुख उद्योगों और संयंत्रों के लिए लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार।

    • बिजली संयंत्र (WBPDCL), सीमेंट प्लांट, और खनन संचालन के लिए लाभकारी।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक विस्तार और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन।

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, DPIIT श्री पंकज कुमार ने की।

निष्कर्ष:

इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन से मल्टीमोडल कनेक्टिविटी में सुधार, लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि, यात्रा समय में कमी, और क्षेत्रीय औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को बल मिलेगा। यह PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समेकित और सतत बुनियादी ढांचे के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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