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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत नगरीय निकायों को दी बधाई

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रायपुर- केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ के सात शहरों ने अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी है। बिल्हा नगर पंचायत 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में अब देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिल्हा ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा और 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी को तीसरा स्थान मिला है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के कुल सात नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव, संबंधित निकायों के महापौर, अध्यक्षों और अधिकारियों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए।

भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अंबिकापुर, पाटन, विश्रामपुर और रायपुर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है। यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इनके अतिरिक्त, राजधानी रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इन शहरों में स्वच्छता के प्रति नागरिकों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार राज्य के अन्य शहरों को भी अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने भी आज पुरस्कृत नगरीय निकायों को बधाई दी और कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक सम्मान ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों को भी स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होंगे। शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र की सरकार शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए कई नवाचारों के साथ सतत काम कर रहे हैं।


राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर जन कल्याण को दें प्राथमिकता - रमेन डेका

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 रायपुर । राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में आयोजित "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए। "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" में वर्ष-2024 के लिए श्रीमती भावना वोहरा और श्री लखेश्वर बघेल को उत्कृष्ट विधायक के रूप में सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट संसदीय रिपोर्टिंग के लिए दैनिक भास्कर के विशेष संवाददाता डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय, सुदर्शन न्यूज़ चैनल के राज्य ब्यूरो प्रमुख श्री योगेश मिश्रा और सुदर्शन न्यूज़ के कैमरामेन श्री विश्वप्रकाश पुरेना को समारोह में सम्मानित किया गया।


उप मुख्यमंत्री  अरुण साव और  विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप, सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत,  बृजमोहन अग्रवाल और  विजय बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, मंत्रीगण और विधायकगण भी "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" समारोह में शामिल हुए। समारोह में छठवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

"उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह समारोह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के सम्मान का अवसर है, बल्कि हमारी संसदीय परंपराओं को और अधिक सशक्त करने का माध्यम भी है। उन्होंने वर्ष-2024 के उत्कृष्ट विधायक के लिए चयनित श्रीमती भावना बोहरा और श्री लखेश्वर बघेल, तथा उत्कृष्ट संसदीय पत्रकारिता के लिए चयनित डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय,  योगेश मिश्रा एवं  विश्वप्रकाश पुरेना को बधाई दी।  

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने समारोह में कहा कि आप सभी ने विधानसभा की गतिविधियों को ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ जनता तक पहुंचाने का कार्य किया है। आपकी यह भूमिका लोकतंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ विधानसभा की स्वस्थ परंपरा है जहां न केवल विधायकों, बल्कि पत्रकारों को भी सम्मानित किया जाता है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर सदैव लोकहित और लोक कल्याण को प्राथमिकता दें। 

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि  छत्तीसगढ़ विधानसभा अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह अवसर हम सभी के लिए आत्ममंथन और नये संकल्प का क्षण है। हमारे संसदीय लोकतंत्र की आत्मा को जीवंत बनाए रखने के लिए  संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं का आदरपूर्वक पालन आवश्यक है। किसी भी विधायी सदन की वास्तविक सार्थकता जनकल्याण में निहित होती है। देश और राज्य के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि सभी जनप्रतिनिधि दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर, एकजुट होकर समन्वय और सहयोग की भावना के साथ कार्य करें। 

समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 90 विधायक राज्य की तीन करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सभी श्रेष्ठ हैं। हर वर्ष दो उत्कृष्ट विधायकों का चयन कठिन काम है। इस बार 50 नए विधायक चुनकर आए हैं। छत्तीसगढ की विधानसभा जीवंत विधानसभा है। इसने अपना ‘छत्तीसगढ़िया स्वभाव’ नहीं छोड़ा है। सदभाव और सहयोग से जनहित के मुद्दों पर सक्रियता और गंभीरता से चर्चा करते हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन हम सब के लिए खास है। ‘उत्कृष्टता अलंकरण समारोह‘ गर्व और प्रेरणा का अवसर है। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। यहां पर जनहित के मुद्दों को उठाना विधायकों का धर्म है। संसदीय रिपोर्टिंग सजगता और जिम्मेदारी भरा कार्य है। इस कार्य में मीडिया प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इनकी मूल भूमिका को रेखांकित करने के लिए इन्हें सम्मानित करने की परंपरा हमारे विधानसभा में है।

श्री साय ने कहा कि हमारी विधानसभा की कार्यवाही को देशभर में सराहा जाता है। विधायकों की सक्रिय भागीदारी और मीडिया की निरंतर निगरानी ने छत्तीसगढ़ को लोकतंत्र की दृष्टि से एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वमेव निलंबित हो जाते हैं। इस विशिष्टता और आत्म-अनुशासन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में न सिर्फ़ आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र में प्रगति की है, बल्कि यहां की विधानसभा और संसदीय कार्यप्रणाली भी पूरे देश में मिसाल बनकर उभरी है।

समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सम्मानित विधायकों और पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में सदस्यों में राज्य के मुद्दों को लेकर मतभेद रहा है , लेकिन आपस में मन का भेद कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप डॉ. रमन सिंह के आने से सदन में पक्ष और विपक्ष का बेहतर समन्वय देखने को मिला है और हम सभी एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने समारोह में शामिल अतिथियों और लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। विधानसभा के सचिव  दिनेश शर्मा ने स्वागत भाषण दिया।


छत्तीसगढ़ की बेटियाँ अब केवल लाभार्थी नहीं, बन रहीं सामाजिक परिवर्तन की भी वाहक- मुख्यमंत्री

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक छोटे से गांव उमरदा की निवासी एनु आज पूरे देश में “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एनु की जीवटता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उनके योगदान की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि एनु जैसी बेटियाँ ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान हैं। उनके साहस, समर्पण और संकल्प से छत्तीसगढ़ के गांवों की तस्वीर बदल रही है।

         स्कूटी दीदी" बनीं आत्मनिर्भर भारत की प्रतीक – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सराहा एनु का जज़्बा
 
एनु की प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और परंपरागत सोच भी राह नहीं रोक सकती। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मीं एनु ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, और समय पर ऋण को चुका कर आर्थिक अनुशासन की मिसाल पेश की।

एनु को समझ थी कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गतिशीलता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 'प्रथम संस्था' से स्कूटी चलाना सीखा और शुरुआत में समाज के तानों और व्यंग्य के बावजूद अपना  आत्मविश्वास बनाए रखा और हार नहीं मानी। जब वे गांव-गांव स्कूटी से महिलाओं से जुड़ने लगीं, तभी उन्हें “स्कूटी दीदी” के नाम से पहचाना जाने लगा।

वर्ष 2023 में एनु ने "महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र" की स्थापना की। शुरुआत में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन धीरे-धीरे यह पहल ग्रामीण समाज में एक क्रांति बन गई। अब तक वे 30 से अधिक महिलाओं को स्कूटी चलाना सिखा चुकी हैं, जो अब स्वयं आंगनबाड़ी, स्कूल, बैंक और स्वास्थ्य केंद्र जैसे स्थानों तक स्वतंत्र रूप से पहुँचना शुरू कर चुकी हैं।

एनु की इस पहल से न केवल महिलाओं की दैनिक गतिशीलता आसान हुई है, बल्कि पूरे सामाजिक दृष्टिकोण में भी परिवर्तन आया है। अब गांवों में माता-पिता स्वयं अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास प्रशिक्षण हेतु भेज रहे हैं। उनका सपना है कि वे 1000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं और शीघ्र ही चारपहिया वाहन प्रशिक्षण केंद्र शुरू करें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि एनु जैसे लोग छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं। राज्य सरकार ‘बिहान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो जमीनी स्तर पर परिवर्तन ला रहे हैं। 

एनु का योगदान केवल ड्राइविंग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई, एलईडी असेंबली, मनरेगा कार्यों, और घरेलू प्रबंधन में भी महिलाओं को दक्ष बनाया है। उनके प्रयासों को देखते हुए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा और धमतरी के कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने स्वयं उमरदा गांव जाकर एनु से मुलाकात की और उनके कार्यों की सराहना की।

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने भी एनु की कहानी को फेसबुक पोस्ट के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि जीवन में संसाधनों की कमी थी, लेकिन एनु के हौसले को कोई डिगा नहीं सका।उन्होंने एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर 'बिहान' और 'प्रथम संस्था' से प्रशिक्षण प्राप्त कर न केवल आत्मनिर्भरता पाई, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनीं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की बेटियाँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक बन रही हैं। राज्य सरकार हर ऐसी पहल का स्वागत करेगी जो महिला सशक्तिकरण को गति देगी।


श्री रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत रायपुर से 850 श्रद्धालुओं का तीर्थयात्रा हेतु प्रस्थान — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी शुभकामनाएं

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशवासियों की आस्था और श्रद्धा को मूर्त रूप देने हेतु प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत आज रायपुर रेलवे स्टेशन से रायपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। इस पवित्र यात्रा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी यात्रा के मंगलमयी होने की कामना की।

रजत जयंती वर्ष में सांस्कृतिक चेतना को नई उड़ान: ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ अंतर्गत रायपुर से विशेष ट्रेन हुई रवाना

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धालुओं को हमारे 'भांचा राम' — श्रीरामलला के निःशुल्क दर्शन कराने की यह पुण्य यात्रा अनवरत जारी है। यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की उस गारंटी को साकार कर रही है, जिसमें उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक को प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था।

उन्होंने कहा कि “श्री रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत सरकार ने मार्च 2024 तक 20,000 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया था, किंतु प्रदेशवासियों की अद्वितीय आस्था, उत्साह, और सरकार की प्रतिबद्धता के चलते यह संख्या 22,000 से अधिक हो चुकी है। इस यात्रा में श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹36 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। अब तक बीते डेढ़ वर्षों में 27 विशेष ट्रेनें छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों से श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री रामलला तीर्थ दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का हर नागरिक, विशेषकर बुज़ुर्ग एवं वंचित वर्ग, अपने जीवन में एक बार प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के दर्शन कर सके।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ आज प्रदेशवासियों के जनजीवन से गहराई से जुड़ चुकी है। इसी कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन आज रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने दोपहर 1:00 बजे हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ट्रेन के प्रस्थान के दौरान रायपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 7 जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। यात्रियों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य एवं लोकवाद्य से स्वागत किया गया, वहीं IRCTC के प्रतिनिधियों द्वारा तिलक लगाकर अभिवादन किया गया।

इस अवसर पर विधायकगण श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहिब, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, सचिव संस्कृति एवं पर्यटन डॉ. रोहित यादव, पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं रेलवे व IRCTC के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि इस योजना की परिकल्पना मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेशवासियों को जीवन में एक बार अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और IRCTC के मध्य एमओयू संपादित किया गया था। योजना की औपचारिक शुरुआत 5 मार्च 2024 को रायपुर से हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं पहली ट्रेन को रवाना किया था। इसके पश्चात बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों से भी विशेष ट्रेनों का संचालन हुआ। विगत वर्ष इस योजना के माध्यम से लगभग 22,100 श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम के दर्शन किए। योजना के अंतर्गत प्रत्येक संभाग से साप्ताहिक विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा।


शिक्षा का अधिकार अधिनियम शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण का आधार

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रायपुर; छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए किए जा रहे युक्तियुक्तकरण को लेकर विभिन्न शैक्षिक संगठनों द्वारा उठाए गए सवालों के संबंध में शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने, शिक्षकों के संतुलित वितरण और शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुपालन के उद्देश्य से की जा रही है।

शिक्षा का अधिकार 

शिक्षा विभाग का मानना है कि 2008 के सेटअप की प्रासंगिकता नहीं रही, अब शिक्षा का अधिकार अधिनियम ही युक्तियुक्तकरण का आधार है। 2008 के स्कूल सेटअप में प्रधान पाठक और दो सहायक शिक्षकों की व्यवस्था थी, जो उस समय की आवश्यकताओं के अनुरूप थी, लेकिन 01 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद नए मानक लागू हुए। अधिनियम के तहत 60 छात्रों तक के लिए 2 शिक्षकों का प्रावधान है और 150 से अधिक छात्रों पर ही प्रधान पाठक की नियुक्ति की जाती है। चूंकि छत्तीसगढ़ में पहले से ही कई स्कूलों में प्रधान पाठक का पद स्वीकृत था, इसलिए उन्हें सहायक शिक्षक की गिनती में जोड़ा गया है।

शिक्षा विभाग के अनुसार दो शिक्षकों से पांच कक्षाओं को पढ़ाने के सवाल के जवाब में कहा  गया है कि बहुकक्षा शिक्षण ही इसका बेहतर समाधान है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि औसतन प्राथमिक स्कूलों में दो ही कक्ष निर्मित होते हैं और शिक्षा का अधिकार अधिनियम में भी 60 छात्रों तक के लिए दो शिक्षकों की व्यवस्था का प्रावधान है। ऐसे में शिक्षकों को बहुकक्षा शिक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे विभिन्न कक्षाओं को एक साथ गुणवत्तापूर्वक पढ़ा सकें। आंकड़ों के अनुसार राज्य के 30,700 प्राथमिक विद्यालयों में से लगभग 17,000 में छात्र-शिक्षक अनुपात 20 से भी कम है, जिससे यह स्पष्ट है कि छात्रों के अनुपात में शिक्षक पर्याप्त संख्या में हैं।

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 60 से कम दर्ज संख्या वाली शालाओं को लेकर फैलाई जा रही भ्रांति निराधार हैं। कुछ संगठनों ने यह आशंका व्यक्त की थी कि 60 से कम दर्ज संख्या वाली 20,000 से अधिक शालाएं व्यवहारिक रूप से एकल-शिक्षकीय हो जाएंगी। इस पर विभाग ने स्पष्ट किया कि इन स्कूलों में दो शिक्षकों की व्यवस्था की गई है, जिसमें प्रधान पाठक भी एक शिक्षकीय पद है। अतः यह कहना गलत है कि ये शालाएं एक शिक्षक के भरोसे चलेंगी। शिक्षा विभाग ने यह दोहराया है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शिक्षकों की संख्या को कम करना नहीं, बल्कि उनकी तैनाती को तर्कसंगत बनाकर सभी विद्यार्थियों को समान अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कहीं भी छात्र-शिक्षक अनुपात अधिनियम से नीचे न जाए। शिक्षा विभाग का यह मानना है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया न केवल विधिक मानकों पर आधारित है, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य में प्राथमिक शिक्षा को और अधिक प्रभावी, समान और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।


शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की सफलता की नई मिसाल गढ़ता राज्य होटल प्रबंधन संस्थान रायपुर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मजबूती प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा की गई पहल, अब धरातल पर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। इन्हीं प्रयासों का एक बेमिसाल उदाहरण बनकर उभरा है राज्य होटल प्रबंधन संस्थान नया रायपुर, जो आज न केवल प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य भी बना रहा है। संस्थान की सबसे बड़ी सफलता इसका शत-प्रतिशत प्लेसमेंट रिकॉर्ड है।

होटल प्रबंधन संस्थान 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन, संस्कृति व पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी. के निर्देशन में यह संस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इस संस्थान की स्थापना राज्य सरकार द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी और आज यह उद्देश्य सफलता की नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।

राज्य होटल प्रबंधन संस्थान रायपुर में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी फैकल्टी एवं इंडस्ट्री-कनेक्ट की बदौलत छात्रों को एक संपूर्ण पेशेवर के रूप में तैयार किया जाता है। संस्थान में चार प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तीन वर्षीय बीएससी इन हॉस्पिटैलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन (जेएनयू, नई दिल्ली से संबद्ध) और तीन डिप्लोमा कोर्स फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग ऑपरेशन, और फूड एंड बेवरेज सर्विस। डिप्लोमा कोर्स की खास बात यह है कि महज एक वर्ष की पढ़ाई के बाद ही छात्र देश के प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटलों में कार्य करने लगते हैं। यह युवाओं के लिए एक स्वर्णिम अवसर है, जो उन्हें कम समय में व्यावसायिक सफलता की ओर ले जाता है।

इस संस्थान से बीएससी की तीन बैच अब तक उत्तीर्ण हो चुकी हैं और सभी को देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार मिला है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 की बैच में 44 विद्यार्थियों को आईटीसी होटल्स, ताज होटल्स, मेफेयर होटल्स एंड रिसॉर्ट्स, ल मेरिडियन, रिलायंस रिटेल, जुबिलेंट फूड वर्क्स जैसे नामी ब्रांड्स से ऑफर मिले हैं। इनमें से 25 विद्यार्थियों को मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में चुना गया है, जिन्हें प्रशिक्षण पश्चात असिस्टेंट मैनेजर का पद प्राप्त होगा। जुबिलेंट फूड वर्क्स-डोमिनोज़ पिज्जा ने संस्थान के 5 विद्यार्थियों श्री शैलेंद्र पोर्ते, सुश्री तोशिमा पटेल, श्री विनोद, श्री सुमित राज एवं श्री सूर्यप्रकाश को असिस्टेंट गेस्ट डिलाइट मैनेजर के रूप में नियुक्त किया है। उन्हें प्रशिक्षण काल में 2.95 लाख रुपये वार्षिक वेतन, 12 प्रतिशत वैरिएबल पे और 60,000 रुपये डिफर्ड बोनस मिलेगा।

राज्य होटल प्रबंधन संस्थान रायपुर के छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। एडिबल क्रॉकरी एंड कटलरी बडिंग शेफ प्रतियोगिता, एवरेस्ट बेटर किचन कुलिनरी एंड बेकरी चैलेंज जैसी प्रतियोगिताओं में छात्रों ने कई पुरस्कार जीतकर संस्थान और राज्य का नाम रोशन किया है। संस्थान आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी पीछे नहीं छोड़ रहा है। इन्हें सरकारी योजनाओं के तहत छात्रवृत्तियाँ दिलाने में प्भ्ड रायपुर सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जिससे हर इच्छुक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्सों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इच्छुक छात्र राज्य होटल प्रबंधन संस्थान नया रायपुर, से जुड़कर अपने करियर को नई उड़ान दे सकते हैं। यह संस्थान न केवल शिक्षा, बल्कि रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में युवाओं के लिए एक सशक्त प्लेटफॉर्म सिद्ध हो रहा है। यह संस्थान अब केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि देश के भविष्य के हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स को गढ़ने वाला सशक्त केंद्र बन चुका है।


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