Media24Media.com: रायपुर एम्स

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रायपुर एम्स के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, 509 छात्रों को दी जाएंगी उपाधि

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 Raipur AIIMS 2nd Convocation : छत्तीसगढ़ के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर के द्वितीय दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। एम्स के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल और उषा जिंदल ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति को आमंत्रित किया। इस बार दीक्षांत समारोह में 509 चिकित्सा छात्रों को डिग्री प्रदान की जाएंगी।


एम्स प्रबंधन का कहना है कि दीक्षांत समारोह की तिथि तय नहीं हुई है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में उम्मीद है। लेफ्टिनेंट जनरल जिंदल ने बताया कि एम्स के लिए यह गौरव का क्षण है कि समारोह के लिए राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने राष्ट्रपति से दीक्षांत समारोह में मुख्य अभिभाषण के साथ स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित करने के लिए भी अनुरोध किया है।

दीक्षांत समारोह में एमबीबीएस के 203 छात्रों (2017 और 2018 बैच), बीएससी (नर्सिंग) की 116 छात्राओं (2018 और 2019 बैच), एमडी,एमएस,एमडीएस के 143 और डीएम व एमसीएच की 14 डिग्री प्रदान की जाएंगी। चार छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किए जाएंगे। दीक्षांत समारोह के सुचारू आयोजन के लिए एम्स की ओर से विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है।

अब रायपुर एम्स में बिना चीर-फाड़ के होगा किडनी की पथरी का इलाज

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 रायपुर : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के यूरोलॉजी विभाग में चुंबकीय किरणों की मदद से पथरी  का उपचार करने वाली एक्स्ट्राकॉरपोरेल शॉक वेव लीथोट्रिप्सी (ईएसडब्ल्यूएल) मशीन लगाई गई है। इसकी मदद से आठ से 15 एमएम आकार तक की पथरी का बिना किसी ऑपरेशन उपचार किया जा सकेगा। इससे एम्स में आने वाले पथरी के रोगियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


ईएसडब्ल्यूएल अत्याधुनिक तकनीक है जिसकी मदद से बिना ऑपरेशन किए पथरी  का आसानी के साथ उपचार संभव है। इसमें किडनी की 15 एमएम तक की पथरी का आसानी के साथ उपचार संभव है। इस तकनीक में एक दिन के अंदर रोगी की पथरी का उपचार किया जा सकता है। इसमें एक्स रे और अल्ट्रासाउंड की मदद से पथरी के स्थान को चिन्हित किया जाता है।

इसके बाथ ईएसडब्ल्यूएल की मदद से वहां शॉकवेव दी जाती है। चिकित्सक नई तकनीक के माध्यम से शॉकवेव की संख्या और प्रभाव को नियंत्रित करते हैं। पथरी के टूटने तक शॉकवेव दी जाती हैं। बाद में यह बहुत छोटे रूप में मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती हैं।

इस तकनीक के दुष्प्रभाव नगण्य हैं। सिर्फ एनेस्थिसिया की मदद से रोगी का शीघ्र उपचार संभव है। निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने ईएसडब्ल्यूएल का उद्घाटन करने के बाद आशा प्रकट की कि इसकी मदद से ओपीडी पर रोगियों का भार कम होगा और उन्हें बिना ऑपरेशन के पथरी  का उपचार मिल सकेगा।

विभागाध्यक्ष डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि इस उपचार में प्रमुख रूप से पथरी के आकार, स्थान और पथरी के प्रकार पर विचार करके शॉकवेव दी जाती हैं। एम्स में इसकी काफी समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब प्रदेश के बड़ी संख्या में किडनी की पथरी के रोगियों को इसका लाभ मिल सकेगा।


उन्होंने बताया कि इसमें 30 से 40 मिनट में एक रोगी का उपचार संभव है। इस प्रकार प्रतिदिन पांच से छह रोगियों की पथरी को ठीक किया जा सकता है। यूरोलॉजी की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 200 रोगियों में से 20 से 25 प्रतिशत को पथरी की समस्या होती है जिसमें प्रति ओपीडी 10 से 15 रोगियों को ईएसडब्ल्यूएल के उपचार की आवश्यकता होती है। अब प्रति मंगलवार, बुधवार और शनिवार को इसका उपचार ओपीडी में किया जाएगा।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मांडविया ने रायपुर एम्स में किया CCHB का शिलान्यास

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रायपुर: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया एम्स में CCHB के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में सांसद सुनील सोनी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, सांसद सरोज पांडे भी शामिल हुए. मीडिया को जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, मोदी जी के नेतृत्व में देश बदल रहा है. देश आगे बढ़ रहा है. हेल्थ सेक्टर में भी बहुत आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है.


केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा, प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोई भी देश को समृद्ध होना है तो जरूरी है देश के नागरिक स्वस्थ रहे. स्वस्थ नागरिक स्वस्थ समाज का निर्माण करेगा. स्वस्थ समाज समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकता है. कोविड के दरमियान हमने बहुत कुछ सीखा है. देश में प्राइमरी हेल्थ सेक्टर में काम करने के लिए 16 सौ से अधिक हेल्थ एंड अवेंजर्स कार्यक्रम रखे हैं. सेकेंडरी केयर के लिए डिस्टिक और हर डिस्ट्रिक्ट में मेडिकल कॉलेज बनने का काम तेज गति से चल रहा है.

उन्होंने कहा, वैसे ही आज देश में 16 एम्स का काम कार्य निर्माण पूरा हो चुका है और कई एम्स का कार्य चल रहा है. कोविड-19 जब आया उस वक्त मोदी जी ने निर्णय किया कि देश में हेल्थ सेक्टर में खर्च कर किया जाएगा. आज रायपुर में एम्स में खर्च से 100 करोड़ यूनिट का किया है. यूनिट में 100 से अधिक ऑक्सीजन फैसिलिटी होगी.

उन्होंने कहा, जब देश में और हमारे क्षेत्र में कोई भी हेल्थ एजेंसी हो जाती है ऐसी स्थिति में हमें काम में आएगा. जब इमरजेंसी नहीं होगी ऐसी स्थिति में और लोगों के लिए उपयोग में आ सकता है. इसी उद्देश्य से के तहत 750 डिस्टिक में का खर्च किया जाएगा. 100 करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा. रायपुर में सुविधा युक्त CCHB रायपुर, छत्तीसगढ़ के लिए उपयोगी होगा.


रायपुर एम्स में ट्रामा और इमरजेंसी को मिले 30 नए हाइड्रोलिक बैड्स

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रायपुर : संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 132 वीं जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ट्रामा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग को 30 नए हाइड्रोलिक बैड्स प्रदान किए गए। इसके बाद अब ट्रामा में उपचार के लिए आने वाले रोगियों को कई सुविधाओं वाले हाइड्रोलिक बैड पर उपचार मिल सकेगा।

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने इन बैड्स को ट्रामा विभाग को प्रदान करते हुए आशा व्यक्त की कि इससे और अधिक संख्या में गंभीर रोगियों को तुरंत बैड उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही ट्रामा से ओटी और वार्ड में रोगियों को लाने-ले जाने में भी सुविधा होगी।

इन बैड की ऊंचाई को रोगियों की आवश्यकता के अनुसार एडजस्ट किया जा सकता है। साथ ही आईवी इन्फ्यूजन के लिए चार इनबिल्ट पोर्ट्स या स्टैंड्स भी लगे हुए हैं। पूरी तरह से ऑटोमैटिक इन बैड्स पर सीपीआर भी आसानी के साथ दिया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें 360 डिग्री तक घुमाया जा सकता है।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी, डॉ. नितिन कश्यप, डॉ. वरूण आनंद, डॉ. चंदन डे और डॉ. सुदर्शन बेहरा भी उपस्थित थे।

नारको टेस्ट के लिए छत्तीसगढ़ हुआ आत्म निर्भर, एम्स में नारको टेस्ट कराने की मिली मंजूरी

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रायपुर : प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू  ने विधानसभा में जानकारी दी है कि अब बड़े अपराधों में इस्तेमाल किए जाने वाले नारको टेस्ट के लिए देश के बड़े राज्यों में नंबर नहीं लगाना पड़ेगा।नारको टेस्ट के लिए छत्तीसगढ़ अब आत्म निर्भर बन गया है। राज्य सरकार ने नारको टेस्ट के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली है और रायपुर एम्स के साथ मिलकर इसके लिए जरूरी मशीनें भी मंगा ली गयी हैं ।


प्रदेश के गृहमंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ पुलिस  अपराधियों पर लगाम कसने के लिए लगातार नयी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। बढ़ते हुए साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए सभी पांच रेंज मुख्यालयों में साइबर थानों की स्थापना की जा रही है। अपराधों पर लगाम लगे इसके लिए दुर्ग में फारेंसिंक साइंस लेबोरेट्री कालेज की स्थापना भी की जाएगी।  

वर्तमान में प्रदेश के 11 जिलों में डायल 112 की सुविधा थी जिसमें अब 17 अन्य जिलों को भी शामिल कर लिया गया है। इस तरह से अब डायल 112 की सुविधा 28 जिलों में होगी।

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