Media24Media.com: निलंबित

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उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और स्वेच्छाचारिता पड़े भारी, शिक्षक निलंबित

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रायपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला तेन्दूपारा में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) संजय नायक को उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 03 के उल्लंघन तथा कदाचरण की श्रेणी में पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि 4 जून 2025 को शासकीय प्राथमिक शाला तेन्दूपारा संकुल लुड़ेग में श्रीमती शालेन कुजूर की पदस्थापना की गई थी। इसके बावजूद सहायक शिक्षक संजय नायक द्वारा उन्हें विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया।

इस विषय में विकासखंड शिक्षा अधिकारी पत्थलगांव द्वारा 11 जून 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब संजय नायक द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया। 10 जुलाई 2025 को प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, शिक्षक संजय नायक के इस व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने जानबूझकर आदेशों का पालन नहीं किया और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न की।

उक्त कृत्य शासन के सेवा आचरण नियमों के सर्वथा विपरीत पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बगीचा नियत किया गया है तथा वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र होंगे।


बुक स्कैनिंग कार्य में लापरवाही पर संकुल समन्वयक तत्काल प्रभाव से निलंबित

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रायपुर। संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर के निर्देश पर बुक स्कैनिंग कार्य की समीक्षा हेतु सहायक संचालक श्रीमती उषा किरण खलखो एवं श्रीमती सुरेखा थानथराट द्वारा संकुल केन्द्र भूकेल का आकस्मिक निरीक्षण किया गया निरीक्षण के दौरान संकुल समन्वयक मनबोध नंद मूल पद शिक्षक, शा. पू. मा. शाला पौसरा, विकासखंड बसना महासमुंद द्वारा पुस्तक वितरण में चार दिवस की देरी एवं 08 विद्यालयों में कार्य प्रारंभ न होने की स्थिति के संबंध में संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही 25 जून को आयोजित ऑनलाईन बैठक में भी वे अनुपस्थित रहे। पाठ्यपुस्तकों की डिलीवरी 21 जून को प्राप्त होने के बावजूद वितरण 25 जून को करने, स्कैनिंग कार्य में लापरवाही तथा विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना को गंभीर कदाचार एवं अनुशासनहीनता मानते हुए उक्त कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-03 के प्रतिकूल पाया गया।


संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग रायपुर राकेश कुमार पाण्डेय ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्रोत समन्वयक के  प्रतिवेदन के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 (1) के तहत मनबोध नंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा तथा उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी मगरलोड, जिला धमतरी नियत किया गया है।

तहसीलदार निलंबित, शिकायतकर्ता को मृत दिखाकर किया गया था भूमि का अनुचित नामांतरण

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रायपुर। जिला सूरजपुर के ग्राम कोयलारी, तहसील भैयाथान की निवासी शैल कुमारी दुबे द्वारा की गई गंभीर शिकायत पर कार्यवाही करते हुए, संभागायुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने तहसीलदार संजय राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदिका शैल कुमारी दुबे ने 26 मई 2025 को शिकायत प्रस्तुत कर बताया कि तहसीलदार संजय राठौर द्वारा सांठगांठ कर उन्हें मृत दर्शाते हुए उनकी निजी स्वामित्व की भूमि (खसरा क्रमांक 45/3, रकबा 0.405 हे.) जिसका रिनंबरिंग में नया खसरा नंबर 344 है, जिसका अनुचित नामांतरण और विक्रय किया गया।

आवेदिका की शिकायत पर अपर कलेक्टर सूरजपुर एवं तहसीलदार लटोरी की संयुक्त टीम द्वारा जांच की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार संजय राठौर द्वारा जीवित आवेदिका को मृत बताकर उनकी भूमि का नामांतरण सौतेले पुत्र वीरेन्द्रनाथ दुबे के पक्ष में किया गया, जो कि प्रथम दृष्टया अनैतिक एवं नियम विपरित पाया गया।

प्रारंभिक जांच में राठौर को अपने पदीय दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता का दोषी पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। फलस्वरूप कमिश्नर दुग्गा ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत नियम 9(1)(क) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि में राठौर को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी, तथा निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज नियत किया गया है।

महासमुंद : अधिक मूल्य पर मदिरा विक्रय, स्टॉक में गंभीर कमी और बिक्री में लापरवाही के मामले में आबकारी अधिकारी निलंबित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय कार्य में अनियमितता, तय दर से अधिक मूल्य पर मदिरा विक्रय, स्टॉक में गंभीर कमी और बिक्री राशि में लाखों रुपये की गड़बड़ी के मद्देनज़र महासमुंद जिले के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी निधीश कुमार कोष्टी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की गई है। निलंबन अवधि में कोष्टी का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में निर्धारित किया गया है।

गौरतलब है कि 29 मई 2025 को आबकारी विभाग मुख्यालय रायपुर के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा महासमुंद जिले के घोड़ारी स्थित कम्पोजिट मदिरा दुकान का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण से पूर्व एक छद्म ग्राहक को 500-500 रूपए की कुल 4 नोट यानि कुल 2000 रूपए देकर मदिरा खरीदने भेजा गया। निर्धारित मूल्य 1760 रूपए के स्थान पर विक्रयकर्ता द्वारा 2000 रूपए में मदिरा बेचा गया। पूछताछ में विक्रयकर्ता ने अधिक मूल्य पर विक्रय की बात स्वीकार की। स्टॉक के भौतिक सत्यापन में 1886 नग देशी मदिरा मसाला की कमी और एक लाख 88 हजार रूपए की आर्थिक गड़बड़ी पाई गई। वहीं, बिक्री राशि की तुलना में नगदी में 3 लाख 8 हजार रूपए और विदेशी मदिरा में एक लाख 99 हजार रूपए की कमी पकड़ में आई। इस प्रकार कुल 6 लाख 96 हजार रूपए की वित्तीय अनियमितता का मामला पकड़ में आया। उपरोक्त अनियमितताओं को देखते हुए राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी महासमुंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की कार्रवाई की गई है।

आबकारी आयुक्त ने बताया कि इससे पूर्व में 3 मई 2025 को राज्य स्तरीय उड़नदस्ता द्वारा बागबहरा (महासमुंद) में उड़ीसा निर्मित और केवल उड़ीसा में वैध 351.17 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई थी, जिसमें तीन प्रकरण दर्ज हुए और फरार आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धाराओं 34(2) और 59(क) के तहत कार्यवाही की गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है, प्रदेश में शासकीय जिम्मेदारियों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महासमुंद में की गई यह कार्रवाई, सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है।

अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले शिक्षा अधिकारी निलंबित

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रायपुर। दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने कलेक्टर दुर्ग से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी दुर्ग गोविंद साव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्यवाही दुर्ग बीईओ द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही एवं पदीय अधिकार के दुरूपयोग के परिणाम स्वरूप की गई है।

साव पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत अपनी पत्नी श्रीमती कुमुदनी साव को अतिशेष शिक्षकों की सूची से मुक्त रखने के उद्देश्य से दस्तावेजों में जानबूझकर तथ्यात्मक त्रृटि की। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, सेक्टर-09, भिलाई में पदस्थ श्रीमती कुमुदनी साव उच्च वर्ग शिक्षक (हिन्दी) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि परिशिष्ट-02 में उन्हें उच्च वर्ग शिक्षक (गणित) के रूप में दर्शाया गया।

इस प्रकार की कुटरचना विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 03 के प्रतिकूल आचरण है। उक्त मामले में आयुक्त राठौर ने साव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। निलंबन अवधि के दौरान साव का मुख्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग निर्धारित किया गया है।

 

महासमुंद : ड्यूटी में लापरवाही के कारण सहायक शिक्षक निलंबित

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महासमुंद। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी सरायपाली से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला, गहनाखार में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) राहुल बैपारी के विरुद्ध लगे आरोप जांच में सही पाए गए हैं।

बैपारी पर विद्यालय समय पर उपस्थित नहीं रहने, शाला में अनियमित रूप से आने तथा अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप थे। जांच में यह पुष्टि हुई कि शिक्षक की कार्यप्रणाली छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के विरुद्ध है। इस संबंध में विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें पूर्व में स्पष्टीकरण हेतु नोटिस भी जारी किया गया था, परंतु इसके बावजूद उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं देखा गया।

जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद विजय कुमार लहरे ने प्राप्त तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत राहुल बैपारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, सरायपाली निर्धारित किया गया है। नियमों के तहत निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

 

 

बीएमओ निलंबित एवं अनुबंधित डॉक्टर कार्यमुक्त

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रायपुर। सरगुजा के लुण्ड्रा विकासखण्ड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रघुनाथपुर में दो बच्चों की मौत के बाद पोस्टमार्टम में लापरवाही और इसके लिए रुपये की मांग के गंभीर आरोप के मामले में कलेक्टर सरगुजा विलास भोसकर ने लुण्ड्रा के बीएमओ को निलंबित और पीएचसी रघुनाथपुर में पदस्थ चिकित्सक को तत्काल प्रभाव से कार्य मुक्त कर दिया है।

गौरतलब है कि ग्राम सिलसिला ढोढ़ा झरिया में एक हृदय विदारक घटी। यहां मछली पालन के लिए बनाए गए गहरे और असुरक्षित गड्ढे में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। मृतक सूरज गिरी और जुगनू गिरी, दोनों पांच वर्षीय सगे चचेरे भाई थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक ने पोस्टमार्टम के लिए प्रति शव 10-10 हजार रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया। सोमवार को जब ग्रामीणों ने दबाव बनाया और शिकायत की, तब जाकर पोस्टमार्टम किया गया।

इस मामले की जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि डॉ. राघवेंद्र चौबे खंड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौरपुर द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रशासकीय नियंत्रण रखने में ढिलाई और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरती गई। जांच में यह बात भी सामने आई कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रघुनाथपुर में पदस्थ डॉ. अमन जायसवाल, अनुबंधित चिकित्सा अधिकारी का आचरण भी सेवा नियमों के विरुद्ध था। फलस्वरूप उन्हें उनके दायित्वों से कार्यमुक्त कर दिया गया है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि कलेक्टर विलास भोसकर ने स्वयं रघुनाथपुर पीएचसी सेंटर का निरीक्षण किया और पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। कलेक्टर ने आरबीसी 6/4 के तहत उन्हें 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया।

दो शिक्षकों को नोटिस, दो निलंबित, गुणवत्ताहीन शिक्षा के मामले में कार्रवाई

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रायपुर। शिक्षा सचिव परदेशी ने आज गरियाबंद जिले का दौरा कर स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन की स्थिति का जायजा लिया। शिक्षा सचिव ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बारूका एवं मालगांव के निरीक्षण के दौरान कक्षा 8वीं के छात्रों के अधिगम स्तर में भारी गिरावट और विद्यार्थियों की विषयगत समझ अत्यंत कमजोर पाए जाने पर नाराजगी जताई।

उन्होंने इसके लिए शाला के प्रधान पाठक ललित कुमार साहू (बारूका) और संकुल समन्वयक भूपेन्द्र सिंह ठाकुर (मालगांव) को पूर्ण रूप से उत्तरदायी मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। जिसके परिपालन में संभागीय संयुक्त संचालक राकेश कुमार पाण्डेय द्वारा उक्त दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया।शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बारूका के निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों के ज्ञान का स्तर परखने के लिए उनसे सहज सवाल पूछे। शिक्षा सचिव ने पाया कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान का स्तर अत्यंत कमजोर है। 

विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका श्रीमती दीपा साहू एवं श्रीमती कविता साहू से भी शिक्षा सचिव ने अध्ययन-अध्यापन को लेकर सवाल किए। शाला में पदस्थ दोनों शिक्षिकाओं का शैक्षणिक स्तर संतोषजनक नहीं पाए, विद्यालय की साफ-सफाई एवं प्रबंधन की लचर स्थिति को लेकर शिक्षा सचिव ने नाराजगी जताई। शिक्षा सचिव के निर्देश पर दोनों शिक्षिकाओं को शिक्षा अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जबाब तलब किया है।

शासकीय कार्यों में लापरवाही पर तहसील उदयपुर के राजस्व निरीक्षक मंडल उदयपुर के पटवारी हल्का नम्बर-8 चैनपुर निलंबित

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अम्बिकापुर। अनुविभागीय अधिकारी उदयपुर द्वारा तहसील उदयपुर के राजस्व निरीक्षक मंडल उदयपुर के पटवारी हल्का नम्बर-8 चैनपुर नारायण सिंह को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हल्का पटवारी द्वारा ग्राम कवलगिरी के कृषक बंधन से रकबा संशोधन के कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने तथा राशि एक हजार लिया गया है।

हल्का पटवारी का यह कृत्य सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03 (1) की कंडिका (ड) तथा (च) के विपरीत है। हल्का पटवारी का यह कृत्य शासकीय कार्य में लापरवाही और उदासीनता को दर्शित करते हुए कदाचरण की श्रेणी में आता है। इस कृत्य हेतु छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील ) नियम 1966 के नियम 09 में निहित प्रावधानों के तहत नारायण सिंह को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय तहसील कार्यालय उदयपुर नियत किया जाता है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

पंचायत सचिव ने महतारी वंदन योजना में शिक्षक पत्नी को गलत तरीके से पहुँचाया लाभ, निलंबित

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 महासमुन्द। जिला पंचायत सी ई ओ एस आलोक ने रमाकांत गोस्वामी पंचायत सचिव ग्राम पंचायत घोडारी जनपद पंचायत महासमुंद को निलंबित कर दिया है। सचिव गोस्वामी द्वारा अपनी पत्नी नीलम गोस्वामी जो कि शिक्षक हैं, के नाम पर महतारी वंदन योजना का फार्म गलत जानकारी देकर भरा गया और अनैतिक तरीके से योजना का लाभ लिया गया।


सचिव की पत्नी ग्राम केशवा में पदस्थ है। उनके खाते में राशि प्राप्त किया गया है। किसी भी शासकीय सेवक को गलत जानकारी देकर अनुचित लाभ प्राप्त करना, शासकीय नियमों के विपरीत है। रमाकांत गोस्वामी के द्वारा इस आशय की सूचना किसी को नहीं दी गई थी, यह उनकी संलिप्तता को परिलक्षित करता है।

इसके लिए रमाकांत गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में श्री गोस्वामी का मुख्यालय कार्यालय जिला पंचायत महासमुंद होगा।

गोस्वामी को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। बताया जाता है कि अनेक महिला शिक्षक इस तरह का अनुचित लाभ ले रहे हैं। इस प्रकरण में केवल सचिव को जिम्मेदार ठहराया जाना और अनुचित लाभ लेने वाली शिक्षिका पर कार्यवाही नहीं करना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान है।

विभागीय कार्यों में लापरवाही के चलते वनमंडल के रेंजर निलंबित

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रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ द्वारा लगातार विभागीय समीक्षा करते हुए विभागीय कार्यों  में कसावट लाते हुए त्वरित कार्यवाही कर वनमंडल मोहला में पदस्थ रेंजर हरिसूरजबली सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्यवाही रेंजर हरिसूरजबली सिन्हा द्वारा काष्ठ पातन डिपो परिवहन के विदोहन योजना में लापरवाही के चलते वनोपज की गुणवत्ता खराब होने से राजस्व की क्षति होने, अग्नि प्रहरी के प्रमाणकों को जारी करने के लिए पैसों की मांग करने, अतिक्रमण, बेदखली की कार्यवाही के दौरान अधीनस्थों को सहयोग नहीं के कारण की गई है।

उल्लेखनीय है कि वनमंडलाधिकारी मोहला द्वारा रेंजर हरिसूरजबली सिन्हा को लगातार समझाईश देने के बाद भी उनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत शासकीय कार्य एवं पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही तथा प्रकरण की जांच में प्रथम दृष्टतया दोषी पाये जाने पर निलंबित कर दिया है।

शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही के कारण वनरक्षक राजवाड़े और वनपाल सिंह निलंबित

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रायपुर। कोरिया वनमण्डल बैकुन्ठपुर अंतर्गत परिक्षेत्र सोनहत के रामगढ़ सर्किल के वनरक्षक पिताम्बर लाल राजवाड़े और वनपाल रामप्रताप सिंह को शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासनीता के कारण सरगुजा वनवृत्त अम्बिकापुर के मुख्य वन संरक्षक माथेश्वरन व्ही. ने निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में पिताम्बर लाल राजवाड़े, वनरक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।

मुख्य वन संरक्षक अम्बिकापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार वनरक्षक बीट प्रभारी गरनई पिताम्बर लाल राजवाड़े और वनपाल वन परिक्षेत्र रामगढ़ रमन प्रताप सिंह के द्वारा अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन में उदासीनता एवं घोर लापरवाही बरते जाने के कारण निलंबित किया गया है। वनपाल सिंह और वनरक्षक राजवाड़े का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन/कदाचरण पाये जाने के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुये मुख्यालय बैकुन्ठपुर, वनमण्डल कोरिया निर्धारित किया गया है।

वन अपराध तथा वन्यजीवों के अवैध शिकार के रोकथाम में लापरवाही बरतने के कारण वनमंडल रेंजर निलंबित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने वनमंडल कटघोरा में पदस्थ रेंजर देवदत्त खाण्डे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्यवाही रेंजर देवदत्त खाण्डे द्वारा एतमानार परिक्षेत्र अंतर्गत पी.ओ.आर. प्रकरणों की जांच एवं वन अपराध तथा वन्यजीवों के अवैध शिकार के रोकथाम एवं जांच में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के कारण की गई है।

गौरतलब है कि वन विभाग को रेंजर देवदत्त खाण्डे के विरूद्ध बिना कार्य कराए प्रमाणक प्रस्तुत करने की शिकायत विभाग को प्राप्त हुई थी, जिसकी जांच वनमंडलाधिकारी, कटघोरा द्वारा की गई। जांच में उक्त शिकायत सही पायी गई। रेंजर खाण्डे के विरूद्ध जांच-पड़ताल में यह भी पाया गया कि वे एतमानार परिक्षेत्र अंतर्गत पी.ओ.आर. प्रकरणों की जांच एवं वन अपराध तथा वन्यजीवों के अवैध शिकार के रोकथाम में असफल रहे हैं। जिसके चलते प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत शासकीय काम एवं पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही तथा शिकायत की जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाये पर निलंबित कर दिया है।

भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस, पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक को किया निलंबित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलेक्टर कान्फ्रेंस में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस को लेकर सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए थे। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार को लेकर कड़ाई जमीनी स्तर पर भी उतनी ही सख्त नजर आ रही है। इसकी बानगी एक बार फिर सरकार की त्वरित कार्रवाई से दिखती है। बीते दिनों छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई शैक्षणिक सत्र 2024-25 की नई किताबों को कबाड़ में बेचे जाने का मामला सामने आया था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिलयारी स्थित रियल बोर्ड पेपर मिल में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई वर्ष 2024-25 सत्र की नई किताबें के कबाड़ में बेचे जाने की घटना के प्रकाश में आने पर तत्काल गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु पिल्ले को इस घटना की जांच के निर्देश दिए थे। जांच के उपरांत छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर प्रेम प्रकाश शर्मा की प्रथम दृष्टया लापरवाही परिलक्षित होने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

कलेक्टर एसपी कांफ्रेंस में कड़े तेवर दिखाने के बाद मुख्यमंत्री ने निलंबन की इस कार्यवाही से यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही उन्हें बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होगी। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का मामला सामने आने पर इस घटना की जाँच का दायित्व मुख्य सचिव के पश्चात सबसे वरिष्ठ अधिकारी को देना यह स्पष्ट करता है कि इस राज्य में अब प्रशासनिक ढिलाई के दिन बीत चुके हैं । यदि किसी ने लापरवाही या भ्रष्टाचार किया, तो उस पर कार्यवाही अवश्य होगी।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों सीएम के रौद्र रूप कई प्रशासनिक निर्णयों में दृष्टिगोचर हुए हैं। सीएम शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों में बिलकुल भी लापरवाही नहीं चाहते। मुख्यमंत्री साय ने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने वाले लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कारवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि  यह सुशासन की सरकार है और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी तथा लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कारवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राजनीतिक पार्टी के प्रचार प्रसार में शामिल कर्मचारी को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से किया निलंबित

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दुर्ग। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने राजनीतिक पार्टी के प्रचार प्रसार में शामिल शासकीय कर्मचारी सहायक लेखापाल रोहित कुमार वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आदेशानुसार जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग में पदस्थ सहायक लेखापाल रोहित कुमार वर्मा द्वारा भारतीय जनता पार्टी के स्लोगन के तर्ज पर वाटसअप गु्रप में स्लोगन डाले जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी।

शिकायत की जांच में पुष्टि की गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विपरीत होने से दण्डनीय है। निर्वाचन कर्तव्य के दौरान उनके इस कृत्य पर वर्मा को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20क तथा सिविल सेवा आचरण नियम के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। सहायक लेखापाल रोहित कुमार वर्मा का निलंबन अवधि में मुख्यालय जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित मुख्यालय दुर्ग होगा। 

 


सीएम के घोषणा के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने और समान खरीदी में अनियमितता की शिकायत पर दो नगर पालिका अधिकारी निलंबित

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रायपुर। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा आज दो नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें गौरेला नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकुर पांडेय द्वारा मुख्यमंत्री के घोषणा के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने की शिकायत पर जांच में सही पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। 

इसी प्रकार नगर पंचायत चंद्रपुर के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहन विश्वकर्मा द्वारा टेबल-कुर्सी व एलईडी लाइट खरीदी तथा प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता की शिकायत पर जांच में सही पाए जाने पर निलंबित किया गया है। गौरतलब है कि 20 एवं 21 अप्रैल 2023 को विभागीय काम-काज की समीक्षा के दौरान नगर पंचायत पेण्ड्रा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अवहेलना करने एवं कार्य को विलंबित करने के प्रयास किए जाने के लिए उत्तरदायी पाया गया है। निलंबित इन दोनों मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की निलंबन अवधि में मुख्यालय, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर रहेगा। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।


शिकायतों की जांच में लापरवाही बरतने के मामले में डीपीओ निलंबित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कांकेर जिले के तत्कालीन प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास चन्द्रशेखर मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की यह कार्रवाई प्रतिज्ञा विकास संस्थान दुर्ग द्वारा संचालित विशेषीकृत दत्तक एजेंसी कांकेर के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच में लापरवाही बरतने के मामले में की गई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन के विशेष सचिव द्वारा 5 जून को जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में मिश्रा का मुख्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय राजनांदगांव निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि चन्द्रशेखर मिश्रा वर्तमान में नोडल अधिकारी जिला मोहला-मानपुर चौकी में (जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी) के पद पर पदस्थ थे। 

डॉक्टर अभिनव बंछोर के मामले में स्वास्थ्य विभाग का लिपिक नंदकिशोर कोड़ोपी सहायक ग्रेड 02 निलंबित

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नारायणपुर। जिला चिकित्सा नारायणपुर में पूर्व में पदस्थ डॉ. अभिनव बंछोर के चिकित्सा अध्ययन और उनके वेतन भुगतान मामले में जिला चिकित्सालय में पदस्थ स्वास्थ्य विभाग के लिपिक नंदकिशोर कोडोपी को निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनोद भोयर ने बताया कि डॉ. अभिनव बंछोर, चिकित्सा अधिकारी, जिनका नियुक्ति उपरांत जिला चिकित्सालय नारायणपुर में प्रथम उपस्थिति 28 अगस्त 2016 है, संबंधित चिकित्सा अधिकारी को फोरेन्सिक मेडिसिन पी.जी. अध्ययन के लिए चयनित होने के फलस्वरूप 4 अगस्त 2020 को संचालक स्वास्थ्य सेवायें छ.ग. अटल नगर नया रायपुर की ओर कार्यमुक्त किया गया। विदित हो कि कार्यमुक्त तिथि 4 सितंबर 2020 की स्थिति में संबंधित चिकित्सा अधिकारी की सेवा अवधि मात्र 3 वर्ष 11 माह 08 दिन की है।

अध्ययन अवकाश की पात्रता नही होने के बावजूद शासन के. आदेशो का अवहेलना करते हुए डॉ. अभिनव बंछोर के साथ सांठ-गांठ करके जिला चिकित्सालय नारायणपुर में पदस्य नंदकिशोर कोड़ोपी, सहायक ग्रेड 02 द्वारा तत्कालीन सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. सूर्यवंशी के साथ मिलीभगत करके बिना अध्ययन अवकाश स्वीकृति / बिना उपस्थिति पत्रक कुल 26 माह का कुल वेतन 1876592/- (अठारह लाख छिहत्तर हजार पाँच सौ बियानवे रुपये मात्र) का वित्तीय अनियमितता कर वेतन भुगतान किया गया है एवं बकायदा वार्षिक वेतन वृद्धि भी दिया गया है, जिसके कारण शासन को आर्थिक क्षति हुई है। वित्तीय अनियमितता किये जाने संबंध में तत्कालीन सिविल सर्जन के पदीय दुरुपयोग की जानकारी राज्य कार्यालय एवं संभागीय कार्यालय की ओर आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्राचार किया गया है ।

इस संबंध में अधिष्ठाता, शंकराचार्य, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंस भिलाई के द्वारा जानकारी प्रदाय किया गया है, कि पी. जी. अध्ययन के दौरान अगस्त 2020 से 23 सितंबर 2022 तक डॉ. अभिनव बछोर कुल 489 दिवस अनधिकृत रूप से अनुपस्थित थे। उक्त संबंध में डॉ. अभिनव बंछोर, चिकित्सा अधिकारी को उनके सेवा पुस्तिका में अंकित पते पर कारण बताओ सूचना पत्र तामिल कराया गया, परंतु संबंधित द्वारा कोई भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, 15-20 दिवस पश्चात संबंधित चिकित्सा अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला नारायणपुर के समक्ष प्रस्तुत हुआ, जिनके द्वारा मौखिक वार्तालाप के दौरान बताया गया कि उन्हें अनुपस्थित अवधि के दौरान भुगतान किया गया को वापस किया जाना संभव नहीं है। अधिष्ठाता, श्री शंकराचार्य, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के पत्र क्रमांक 2468 दिनांक 24 सितंबर .2022 के तहत डॉ. अभिनव बंछोर को कार्यमुक्त किया गया है परंतु संबंधित द्वारा आज पर्यन्त तक संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, छ.ग. नया रायपुर के समक्ष उपस्थिति नहीं दिया गया है एवं अनाधिकृत रूप से आज दिनांक तक अनुपस्थित है ।

इस संबंध में नंदकिशोर कोड़ोपी, सहायक ग्रेड 02 को वित्तीय अनियमितता के संबंध में कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया जिस पर नंदकिषोर कोडोपी द्वारा संतोषप्रद जवाब नहीं दिया गया एवं नियमानुसार की जाने वाली कार्यवाही के लिए लिखित में सहमति दिया गया। छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता नियम का उल्लंघन कर अपने पदीय दायित्वों का दुरूपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितता किया गया है, जो कि सर्वधा अनुचित हैं, वित्तीय अनियमितता को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर, जिला नारायणपुर के अनुमोदन उपरांत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है एवं निलंबन अवधि में श्री नंदकिषोर कोड़ोपी का मुख्यालय कार्यालय खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ओरछा निर्धारित किया गया है।

इलाज के लिए मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने और ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने पर पांच अस्पतालों के विरूद्ध कार्रवाई

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रायपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों का ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से उपचार लेने वाले मरीजों का ऑडिट किया जाता है। ऑडिट के दौरान विगत दिनों कुछ अनुबंधित निजी अस्पतालों में गड़बड़ियां पाई गई थीं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर और बिलासपुर के ऐसे पांच अस्पतालों के खिलाफ निलंबन एवं अर्थदण्ड की कार्रवाई की गई है।

संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं-सह-मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना राज्य नोडल एजेंसी, रायपुर के द्वारा ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। नवापारा रायपुर के अंजलि नर्सिंग होम, माहेर हॉस्पिटल व शाह नर्सिंग होम, बिलासपुर के श्रीबालाजी हॉस्पिटल और रायपुर के रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के विरूद्ध कार्रवाई की गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने बिलासपुर के श्रीबालाजी हॉस्पिटल को एक साल के लिए निलंबित किया है। नवापारा रायपुर के अंजलि नर्सिंग होम के खिलाफ तीन लाख रूपए के अर्थदण्ड व एक साल के निलंबन, माहेर हॉस्पिटल के खिलाफ पांच लाख रूपए के अर्थदण्ड व एक साल के निलंबन तथा शाह नर्सिंग होम के खिलाफ तीन लाख रूपए के अर्थदण्ड व एक साल के निलंबन की कार्रवाई की गई है। रायपुर के रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचारित मरीजों से अतिरिक्त राशि लिए जाने के मामले में छह लाख 16 हजार 834 रूपए का अर्थदण्ड लगाया गया है। साथ ही इतनी ही राशि संबंधित मरीजों को वापस दिलाया गया है।

टोल-फ्री नंबर पर कर सकते हैं शिकायत

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों में इलाज में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर मरीज या उसके परिजन सीधे टोल-फ्री नंबर 104 या 14555 में शिकायत कर सकते हैं। शिकायत के आधार पर त्वरित कार्यवाही की जाती है। साथ ही उपचारित मरीजों का ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में उपलब्ध डेटा का ऑडिट भी लगातार संबंधित चिकित्सकों के द्वारा किया जाता है। गड़बड़ी पाए जाने पर राज्य नोडल एजेंसी द्वारा समय-समय पर कार्यवाही की जाती है ताकि मरीजों को निःशुल्क व समुचित उपचार मिल सके।

स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल में जानकारी अपडेट नहीं करने पर दो अधिकारी निलंबित

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रायपुर। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को शासकीय कार्य में कोताही बरतने के फलस्वरूप निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों ने स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल में अपडेट जानकारी दर्ज नहीं की थी। निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय रायपुर और जशपुर के शिक्षा कार्यालयों में नियत किया गया है। आज यहां इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आदेश जारी कर दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार जे.के. प्रसाद तत्कालिन जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर (वर्तमान में उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय) और नारायण प्रसाद पैकरा (मूल पद व्याख्याता) प्रभारी प्राचार्य शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकासखण्ड कांसाबेल जिला जशपुर द्वारा विभागीय पोर्टल को अपडेट करने में कोताही बरती गई। जिससे संस्था में व्याख्याता का पद रिक्त होना बतलाया गया, जिसके कारण प्रशासनिक स्थानांतरण किया गया। इस लापरवाही के कारण स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय से आदेश जारी कर दोनो को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में जे.के. प्रसाद का मुख्यालय, संभागीय संयुक्त संचालक रायपुर और नारायण प्रसाद पैकरा का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर नियत किया गया है।

तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर जे.के. प्रसाद और नारायण प्रसाद पैकरा प्राचार्य शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकास खण्ड कांसाबेल जिला जशपुर द्वारा विभागीय पोर्टल को समय-समय पर अपडेट नही करने के कारण वर्ष 2022 में विभाग के अंतर्गत किए गए स्थानांतरण में जिस संस्था व्याख्याता का पद रिक्त नहीं होने के बावजूद व्याख्याता का पद रिक्त होना बतलाया गया। जिसके कारण विभागीय आदेश द्वारा 30 सितंबर 2022 में श्री अमरजीत सोलंकी व्याख्याता हिन्दी शासकीय हाई स्कूल कोटेया विकासखण्ड प्रेमनगर जिला सुरजपूर का प्रशासनिक स्थानांतरण शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोकड़ा, विकास खण्ड कांसाबेल जिला जशपुर किया गया।

इस स्कूल में नारायण प्रसाद पैकरा प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत है जिनका मूल पद व्याख्याता हिन्दी है, परन्तु विभागीय पोर्टल पर स्वयं की जानकारी प्राचार्य दर्शित करते हुए, व्याख्याता हिन्दी के पद को रिक्त बतलाया गया। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और प्रभारी प्राचार्य की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर विभागीय पोर्टल को अपडेट रखते, परन्तु विभागीय पोर्टल को अपडेट करने में गंभीर कोताही बरती गयी, जिससे यह स्थिति निर्मित हुई। उनका यह कार्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत गंभीर कदाचार है।

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