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भारत ने इंटरनेशनल ओलंपियाड 2026 में रचा इतिहास, 12 गोल्ड और 7 सिल्वर मेडल जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

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नई दिल्ली- भारत के युवा वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित भारतीय छात्रों ने 12 स्वर्ण (Gold) और 7 रजत (Silver) पदक जीतकर अब तक की सबसे शानदार उपलब्धियों में से एक हासिल की। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) ओलंपियाड में भारतीय टीम ने सभी स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।

इस ऐतिहासिक सफलता पर परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy-DAE) ने छात्रों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की 'युवा शक्ति' और देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए वर्षों से किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।

चार अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन

वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय टीम का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—

  • अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) – सभी 5 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) – सभी 4 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO) – 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक।

  • अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) – 2 स्वर्ण और 4 रजत पदक।

इस तरह भारत ने कुल 12 गोल्ड और 7 सिल्वर पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक और गणितीय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

DAE अध्यक्ष ने दी बधाई

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के समर्पण तथा दशकों में विकसित मजबूत संस्थागत व्यवस्था का परिणाम है।

HBCSE की अहम भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के इस राष्ट्रीय केंद्र को परमाणु ऊर्जा विभाग का सहयोग प्राप्त है। HBCSE देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराता है।

HBCSE के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि विभाग के निरंतर सहयोग के कारण भारत का ओलंपियाड कार्यक्रम विश्व के सबसे सम्मानित कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह सफलता विज्ञान और गणित में उत्कृष्टता की संस्कृति को और मजबूत करेगी।

दशकों की मेहनत का परिणाम

परमाणु ऊर्जा विभाग का कहना है कि उसका योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। विभाग ने HBCSE और TIFR के माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है, जिसने वर्षों से देश की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

DAE ने सभी पदक विजेता छात्रों, टीम लीडर्स, मेंटर्स, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), अंतरिक्ष विभाग (DOS) और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग की भी सराहना की।

भारत के वैज्ञानिक भविष्य की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि न केवल देश के युवाओं को प्रेरित करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की महाशक्ति बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

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राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह 15 जनवरी को

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जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (2024-25) का पुरस्कार वितरण समारोह गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को अपराह्न 3:00 बजे से नई दिल्ली स्थित मावलांकर सभागार, संविधान क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समारोह की अध्यक्षता करेंगे और प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को पुरस्कार प्रदान करेंगे।

समारोह के दौरान “पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र)” के विद्यार्थी, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, अपनी “युवा संसद” की पुनः प्रस्तुति देंगे।

29 वर्षों से जारी युवा संसद की परंपरा

संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से जवाहर नवोदय विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में 2024-25 के दौरान आयोजित 26वीं प्रतियोगिता में नवोदय विद्यालय समिति के 8 क्षेत्रों में फैले 88 विद्यालयों ने भाग लिया।

युवा संसद योजना का उद्देश्य

युवा संसद योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, विभिन्न मतों के प्रति सहिष्णुता, लोकतांत्रिक मूल्यों, तार्किक अभिव्यक्ति तथा नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। इसके साथ ही यह योजना छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली, चर्चा एवं वाद-विवाद की तकनीकों से परिचित कराती है और उनमें आत्मविश्वास व प्रभावी वक्तृत्व कला को सुदृढ़ बनाती है।

विजेता एवं क्षेत्रीय पुरस्कार

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर “पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र)” को चल संसदीय शील्ड एवं ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, अपने-अपने क्षेत्रों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले निम्नलिखित 7 जवाहर नवोदय विद्यालयों को भी मेरिट ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा:

  1. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, वलसाड, गुजरात – पुणे क्षेत्र

  2. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश – लखनऊ क्षेत्र

  3. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश – चंडीगढ़ क्षेत्र

  4. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बीरभूम, पश्चिम बंगाल – पटना क्षेत्र

  5. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, गोलाघाट, असम – शिलांग क्षेत्र

  6. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मेडक, तेलंगाना – हैदराबाद क्षेत्र

  7. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, महासमुंद, छत्तीसगढ़ – भोपाल क्षेत्र

यह समारोह युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने और भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीयूष गोयल का संदेश: युवा भारत के निर्माण में स्नातकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

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वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नोएडा स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी विश्वविद्यालय का इससे बड़ा योगदान नहीं हो सकता कि वह प्रतिभाशाली युवाओं को वापस आने के लिए प्रेरित करे, उनकी क्षमताओं को निखारे और उन्हें ऐसा मंच दे जो उनकी योग्यता को पहचान और सम्मान दे।

लगभग 29,000 ऑन-कैंपस और ऑनलाइन छात्रों के स्नातक होने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि समारोह का वास्तविक केंद्रबिंदु छात्रों और पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की उपलब्धियाँ हैं।

गोयल ने विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों को दिए जाने वाले व्यापक अवसरों पर प्रकाश डाला और योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियों के माध्यम से ज़रूरत-आधारित रहित (need-blind) प्रवेश प्रणाली की सराहना की। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय में आधी छात्र संख्या युवा महिलाओं की है और नवाचार के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय अग्रणी है, जहाँ छात्रों के पास 450 से अधिक पेटेंट हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय के 50 संकाय सदस्य रामलिंगम स्वामी फ़ेलो हैं, जो राष्ट्र सेवा के लिए लौटे हैं।

महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर की विरासत को याद करते हुए उन्होंने संविधान में निहित समानता, सामाजिक सद्भाव और सबके लिए अवसरों के मूल्यों को दोहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब भी वंचित वर्गों के उत्थान की नींव है और छात्रों को समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को याद रखना चाहिए।

मंत्री ने स्नातक हो रही इस पीढ़ी को भारत के विकसित राष्ट्र 2047 के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण भाग बताया और कहा कि आने वाले 25 वर्ष विकसित भारत के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की सीमाओं को आगे बढ़ाएँ और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दें।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने संबोधन में एक लाख युवाओं से सार्वजनिक जीवन और राजनीति को करियर के रूप में अपनाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति को ऐसे प्रतिबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता है जो राष्ट्र के लिए काम करें, सार्वजनिक जीवन की ईमानदारी को बनाए रखें और 140 करोड़ नागरिकों को अपने कर्तव्यों—परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति—जागरूक करें।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिक विश्वविद्यालय छात्रों को सार्वजनिक जीवन और राजनीति को समझने के लिए प्रेरित करेंगे, और नोट किया कि एमिटी विश्वविद्यालय राजनीतिक विज्ञान का अध्ययन प्रदान करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान चाहें तो छात्रों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इंटर्नशिप के लिए भेज सकते हैं ताकि वे शासन और जनसेवा को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें और भविष्य में इसे और बेहतर बना सकें।

उन्होंने अपने शुरुआती कंप्यूटर प्रशिक्षण को याद करते हुए कहा कि “garbage in, garbage out” और बताया कि भारतीय राजनीति को अधिक अच्छे लोग और मजबूत जननेता चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि अधिक संवेदनशील और ईमानदार युवा सार्वजनिक जीवन से जुड़ेंगे तो भारत अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से महाशक्ति बनेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री का उद्धरण देते हुए कहा कि भारत का भविष्य “can-do generation” के हाथों में है और यही युवा नया भारत बनाएंगे।

उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि वे अमृत काल में भारत का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी उठाते हैं और उन्हें उन सिद्धांतों पर विचार करने को कहा जो इस यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण को हर नागरिक के लिए एक प्रेरणादायी मार्गदर्शक बताया और 15 अगस्त 2022 के भाषण का उल्लेख किया जब भारत ने 75वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पाँच प्रमुख प्रण बताए थे, जो 2022 से 2047 तक भारत को $4 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था से $35 ट्रिलियन और $2,500 प्रति व्यक्ति आय से $20,000 तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय इन सिद्धांतों को अपनाएँ, तो भारत का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल होगा।

पाँच प्रणों का उल्लेख

पहला प्रण: विकसित भारत का संकल्प

उन्होंने कहा कि आने वाले 25 वर्ष निर्णायक हैं और युवाओं को अपने क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ हासिल करनी होंगी।

दूसरा प्रण: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति

उन्होंने छात्रों से मानसिक बाधाओं, पुराने विचारों और सीमित सोच को त्यागने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय पारंपरिक भारतीय दीक्षांत वस्त्र अपनाने पर विचार कर सकते हैं, जो राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक होगा।

तीसरा प्रण: भारत की विरासत पर गर्व

उन्होंने कहा कि तीव्र आधुनिकीकरण के बावजूद भारत की शक्ति उसकी विविधता, मूल्य और प्राचीन ज्ञान में निहित है।

चौथा प्रण: भारत की एकता—विविधता में एकता

उन्होंने छात्रों से अलग-अलग समुदायों से जुड़ने, सहयोग बढ़ाने और पुल बनाने का आह्वान किया।

पाँचवाँ प्रण: कर्तव्य की भावना

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए है। उन्होंने छात्रों को भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में योगदान देने को कहा।

गोयल ने शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की सराहना की और उनके समर्पण को छात्रों की सफलता की नींव बताया। उन्होंने छात्रों को अपने शिक्षकों और विश्वविद्यालय से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि वास्तविक दुनिया में कदम रखते ही चुनौतियाँ स्वाभाविक हैं, लेकिन विश्वास जताया कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए मूल्य और शिक्षा उन्हें इन चुनौतियों से आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ निपटने में सक्षम बनाएंगे। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय योगदान देने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।


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