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जनगणना 2027: केंद्र सरकार ने 'जनसंख्या गणना' के लिए जारी की 40 प्रश्नों की अधिसूचना

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 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी 'जनसंख्या गणना' (Population Enumeration) के लिए 40 प्रश्नों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। भारत के महारजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, इस बार की जनगणना में सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई नए व महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया गया है।


जाति और कोविड टीकाकरण पर रहेंगे खास सवाल

नवीनतम प्रश्नावली के तहत नागरिकों से उनकी जाति तथा कोविड-19 टीकाकरण के स्थान से जुड़े विवरण मांगे जाएंगे। जनगणना कर्मचारी प्रत्येक परिवार से यह जानकारी लेंगे कि वे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंध रखते हैं या नहीं, और उनकी विशिष्ट जाति कौन सी है। इसके अलावा, महामारी के बाद स्वास्थ्य डेटाबेस को मजबूत करने के उद्देश्य से कोविड टीकाकरण का स्थान और उससे जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।



बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से शुरुआत
सर्दियों में भारी बर्फबारी और विषम मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गिनती की प्रक्रिया 1 से 30 सितंबर के बीच पूरी की जाएगी। 

इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  • लद्दाख
  • जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्र
  • हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय इलाके
  • उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र

मुख्य बिंदु:

  • कुल प्रश्न: जनसंख्या गणना चरण के लिए 40 सवाल तय।
  • पहला चरण: जनवरी में मकान सूचीकरण (House Listing) के लिए 33 सवाल अधिसूचित किए गए थे।
  • उद्देश्य: देश के नागरिकों का सटीक सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और जनसांख्यिकी डेटाबेस तैयार करना।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्यौरा

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) कार्यालय द्वारा जारी 'हाउसहोल्ड शेड्यूल' में रहन-सहन, पेयजल, बिजली, शौचालय, वाहन, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए गए हैं, जिससे देश की भावी योजनाओं के निर्माण में मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारत की जनगणना 2027 कराने के प्रस्ताव को 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी।

योजना के मुख्य बिंदु

भारत की जनगणना – दुनिया का सबसे बड़ा सांख्यिकीय अभियान

जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी:

  1. गृह-सूचीकरण एवं आवास जनगणना – अप्रैल से सितंबर 2026

  2. जनसंख्या गणना (PE) – फरवरी 2027

    • लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के हिमबद्ध क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में PE सितंबर 2026 में होगी।

कुल 30 लाख फील्ड कर्मचारी इस विशाल कार्य को पूरा करेंगे।

डिजिटल जनगणना की विशेषताएँ

  • पहली बार मोबाइल ऐप के माध्यम से पूर्ण रूप से डिजिटल डेटा संग्रहण।

  • सेंसर मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) पोर्टल के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग।

  • HLB Creator वेब मैप एप्लीकेशन चार्ज अधिकारियों के लिए।

  • जनता को स्वयं-गणना (Self Enumeration) का विकल्प।

  • मजबूत सुरक्षा मानकों का प्रावधान।

  • Census-as-a-Service (CaaS) के माध्यम से मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और कार्रवाई योग्य डेटा उपलब्ध होगा।

सार्वजनिक लाभ

जनगणना 2027 देश की पूरी आबादी को कवर करेगी और नीति-निर्माण के लिए बेहतर, त्वरित और उपयोगकर्ता-अनुकूल डेटा उपलब्ध कराएगी।
गांव/वार्ड स्तर तक सूक्ष्म डेटा उपलब्ध कराया जाएगा।

कार्यान्वयन रणनीति

  • प्रत्येक घर का दौरा कर अलग-अलग प्रश्नावली के माध्यम से जानकारी एकत्र की जाएगी।

  • स्कूल के शिक्षक व अन्य सरकारी कर्मचारी गणनाकार के रूप में कार्य करेंगे।

  • लगभग 30 लाख कर्मचारी (गणनाकार, सुपरवाइज़र, मास्टर ट्रेनर आदि) तैनात किए जाएंगे।

  • सभी फील्ड अधिकारियों को उनके कार्य के लिए मानदेय दिया जाएगा।

जाति-आधारित डेटा संग्रहण

कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को जाति-आधारित जनगणना को मंजूरी दी।

  • जनसंख्या गणना (PE) चरण में जाति संबंधी डेटा डिजिटल रूप से संकलित किया जाएगा।

रोजगार सृजन

  • लगभग 18,600 तकनीकी कर्मियों की 550 दिनों के लिए नियुक्ति की जाएगी।

  • कुल मिलाकर 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजन।

  • डिजिटल डेटा प्रबंधन से तकनीकी क्षमता निर्माण और भविष्य के रोजगार में सहायता।

पृष्ठभूमि

  • जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।

  • यह जनगणना देश के लिए आवास स्थिति, सुविधाएँ, जनसांख्यिकी, भाषा, धर्म, SC/ST, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और प्रजनन से संबंधित प्राथमिक डेटा का सबसे बड़ा स्रोत है।

  • जनगणना Census Act, 1948 और Census Rules, 1990 के तहत संचालित की जाती है।


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