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नेपाल–तिब्बत में कुदरत का कहर: ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़, 900+ मौतें और हजारों लापता

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26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन (तिब्बत) सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और पत्थर नीचे की ओर तेजी से बह निकले।

इससे नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बेहद तेज बाढ़ आ गई। पानी के साथ आया मलबा इतना शक्तिशाली था कि घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं के हिस्से तक बह गए। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ हुआ?

नेपाल में रसुवा, नुवाकोट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। चीन की तरफ तिब्बत के Gyirong County और सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

त्रिशूली नदी के आसपास कई Hydropower Projects स्थित हैं। बाढ़ और मलबा इन परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंच गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अंदर फंस गए या लापता हो गए। 

कितनी बड़ी है तबाही?

31 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में आधिकारिक रूप से 794 मौतों की पुष्टि हुई है और 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। =

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,700 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं। इसका कारण अलग-अलग समय पर जारी किए गए अपडेट और अलग-अलग सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल है। इसलिए अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं माना जा सकता। 

अभी सबसे बड़ी चिंता:

  • हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
  • इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
  • कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
  • खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर और जमीन से बचाव अभियान कई बार बाधित हुआ है। 

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

इस हादसे का सबसे मुश्किल हिस्सा Hydropower Project की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना है।

बाढ़ का पानी, कीचड़ और पत्थर सुरंगों के रास्तों में भर गए हैं। कई स्थानों पर बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सुरंगों से लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर सुरंग में पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 

नेपाल की ओर से सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है।

भारत की भूमिका क्या है?

भारत ने नेपाल के बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहायता कर रही है। चीन ने भी अपनी विशेष Tunnel Rescue Team भेजी है।

इसके अलावा भारत की नदियों में भी कुछ शव मिलने की सूचना मिली है, जिनके नेपाल की बाढ़ में बहकर आने की आशंका जताई गई है।

एक और खतरा: नई झील बन गई

बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता कुछ जगहों पर बंद हो गया और पानी जमा होकर नई झील जैसी स्थिति बन गई।

ऐसी स्थिति में यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो उसके पीछे जमा पानी एक और अचानक बाढ़ की लहर पैदा कर सकता है।

इसी वजह से कुछ इलाकों में बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। 

खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी समस्या बन रहा है।

कई जगहों पर:

  • हेलीकॉप्टर उड़ाना मुश्किल

  • सड़कें और पुल टूटे

  • मोबाइल/संचार व्यवस्था प्रभावित

  • कीचड़ और मलबे से रास्ते बंद

  • नदी का जलस्तर तेजी से बदल रहा है

  • सुरंगों में प्रवेश बेहद जोखिमपूर्ण है

इस कारण बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियरों की अस्थिरता और बढ़ते तापमान को इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा है।

हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि इस विशेष घटना के सटीक वैज्ञानिक कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

विदेशी नागरिक भी लापता

इस हादसे में कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है।

तिब्बत की तरफ अधिकारियों ने 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें नेपाल और भारत के नागरिकों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। 

नेपाल में भी कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क में नहीं होने की खबरें आई हैं।

बचाव अभियान में कौन-कौन लगा है?

बचाव अभियान में मुख्य रूप से:

  • नेपाल सेना और सुरक्षा बल
  • चीन की रेस्क्यू टीमें
  • भारत की विशेषज्ञ टीम
  • अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां और रेड क्रॉस

शामिल हैं।

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक खोज एवं राहत अभियान में लगे हैं। चीन ने भी बड़ी संख्या में बचावकर्मियों, ड्रोन, उपकरण और राहत सामग्री को लगाया है।

आर्थिक नुकसान कितना?

तबाही इतनी व्यापक है कि नेपाल को कई अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

घर, सड़क, पुल, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ आकलनों में नुकसान को नेपाल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के बराबर बताया गया है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है। 

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता है:

1. जीवित लोगों को ढूंढना
2. सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना
3. लापता लोगों की पहचान करना
4. शवों को बरामद कर पहचान कराना
5. प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा देना
6. नए भूस्खलन और बाढ़ से लोगों को बचाना
7. क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था को बहाल करना

सबसे महत्वपूर्ण बात

यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं थी। ग्लेशियर/चट्टान के टूटने से पानी और मलबे की अचानक आई बेहद शक्तिशाली लहर ने कुछ ही समय में हिमालयी घाटियों और नदी किनारे के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।

और सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतकों की संख्या से भी कहीं ज्यादा लोग अभी लापता हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बचाव अभियान अभी जारी है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है क्योंकि नेपाल और चीन की एजेंसियां अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट कर रही हैं। ऊपर मैंने 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों और इस अंतर को ध्यान में रखकर जानकारी दी है।

नेपाल आपदा पर सीएम साय ने जताया दुख, फंसे छत्तीसगढ़वासियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में पूरा भारत एकजुट होकर नेपाल के पीड़ितों के साथ खड़ा है।


मुख्यमंत्री ने भगवान पशुपतिनाथ से दिवंगत आत्माओं की शांति, शोकसंतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने और लापता लोगों की सकुशल वापसी की प्रार्थना की।

नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सहायता और आपात स्थिति के लिए राज्य सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित नागरिक या उनके परिजन किसी भी मदद व जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन: 1070
  • दूरभाष नंबर: +91-771-2223471

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में अपने हर नागरिक के साथ है और नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़वासियों की सुरक्षित वापसी व आवश्यक सहायता के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है।

नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 163 की मौत; 750 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी शामिल

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 काठमांडू। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 163 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं।


बाढ़ के तेज बहाव में कई कस्बे और गांव प्रभावित हुए हैं। महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और राहत-बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर या चट्टानों के खिसकने से अचानक बाढ़ की स्थिति बनी।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी उफान पर आ गई। इसके बाद त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई और इसका असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया।

चितवन में सबसे ज्यादा तबाही

नेपाल में अब तक बरामद हुए 163 शवों में सबसे अधिक 64 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके अलावा धादिंग से 27, नवलपरासी पूर्व से 26, गोरखा से 20, नुवाकोट से 12, तनहूं से 9, रसुवा से 3 और नवलपरासी पश्चिम से 2 शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो में तबाही का भयावह मंजर दिखाई दे रहा है। तेज रफ्तार से बहता मलबा, चट्टानें और पानी अपने रास्ते में आने वाली इमारतों, वाहनों और पुलों को बहाते नजर आ रहे हैं।

130 से ज्यादा भारतीय लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद 130 से ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।

अधिकारियों के मुताबिक लापता लोगों में 133 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने भी अपने 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। ये लोग एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे।

तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अब तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिल गई है। पश्चिम बंगाल के भी कई लोगों के लापता होने की आशंका है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी शामिल बताया जा रहा है।

भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। भारतीय नागरिक +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों के जल्द बचाव और राहत के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के आसपास फंसे कर्नाटक के लोगों की जानकारी जुटाने के लिए 1070 और 080-22253707 नंबर जारी किए हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर आपदा पर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेपाल में आई बाढ़ पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बात की और संभावित प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन तथा राहत-बचाव टीमों के साथ NDRF को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी दी।

नेपाल में संचार व्यवस्था प्रभावित

भीषण बाढ़ के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित हो गई है, जिससे लापता लोगों की सही जानकारी जुटाने में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि पूरा देश इस आपदा से “सदमे में है और बहुत दुखी है।” सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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