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सीआरपीएफ ने छात्रों को किया पौधे वितरण, पौधरोपण कर हरियाली का दिया संदेश

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आरंग- सोमवार को डीआईजी, ग्रुप केन्द्र भिलाई, रायपुर के निर्देशन एवं डिप्टी कमांडेंट अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में सीआरपीएफ जवानों द्वारा आरंग में पौधा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कम्प्यूटर च्वाइस सेंटर के 150 विद्यार्थियों को फलदार एवं छायादार पौधों का वितरण किया। इस अवसर पर जवानों ने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और पौधों के महत्व के बारे में जानकारी दी।इसके साथ ही स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सदस्यों एवं बच्चों के साथ मिलकर तालाब किनारे बादाम के पौधे रोपित कर हरियाली का संदेश दिया।सीआरपीएफ जवानों ने कहा कि पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना जरूरी है। बच्चों ने भी एक-एक पौधा लगाकर उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया।कार्यक्रम में कमांडेंट आशीष यादव,इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सहित अन्य जवान तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन से दूजेराम धीवर, यादेश देवांगन, महेन्द्र कुमार पटेल, कोमल लाखोटी, नीरज साहू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हाथों में पौधे लेकर संदेश परक नारे लगाए।



सावन: शिव भक्ति, हरियाली और भारतीय संस्कृति का उत्सव

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"रिमझिम बरसती फुहारें, मिट्टी की सौंधी खुशबू, पेड़ों पर झूलों की मस्ती और 'हर-हर महादेव' के जयघोष..." यही है सावन की पहचान। श्रावण मास केवल हिंदू धर्म का एक पवित्र महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन का जीवंत उत्सव है।


बरसात की पहली बूंद जब धरती को स्पर्श करती है, तो सूखी वसुंधरा हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। खेतों में नई फसल की उम्मीद अंकुरित होती है, नदियां और तालाब जीवन से भर उठते हैं और प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेर देती है। यही कारण है कि सावन को नवजीवन, समृद्धि और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। तब से सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना करते हैं। सावन के सोमवार और कांवड़ यात्रा इस आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

सावन भारतीय लोक संस्कृति का भी सबसे रंगीन अध्याय है। गांवों में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं, महिलाएं और युवतियां हरे परिधानों में सजकर कजरी और सावनी गीत गाती हैं। हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा देते हैं। यह महीना रिश्तों में अपनापन और जीवन में सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है।

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, तब सावन हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। हरियाली तभी बचेगी, जब हम पेड़ लगाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। भगवान शिव स्वयं प्रकृति के देवता माने जाते हैं, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना भी उनकी सच्ची आराधना है।

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। आइए, इस पावन मास में भगवान शिव से यही प्रार्थना करें कि हमारे जीवन में शांति, समाज में सद्भाव और प्रकृति में सदैव हरियाली बनी रहे।

हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ!

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