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महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लाइबेरिया के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की

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भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज नई दिल्ली के GPOA, ब्लॉक-3 में लाइबेरिया गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में लाइबेरिया की सीनेट और प्रतिनिधि सभा के सदस्य तथा लाइबेरिया के महिला विधायी कॉकस के सदस्य शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एलेन-अट्टोह व्रेह ने किया। बैठक में UN Women के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

यह प्रतिनिधिमंडल 10 से 15 अगस्त 2026 तक भारत के दौरे पर है। यह यात्रा दक्षिण-दक्षिण सहकर्मी सीख मिशन (South-South Peer Learning Mission) के तहत आयोजित की जा रही है। इस मिशन को UN Women का सहयोग प्राप्त है और इसका वित्तपोषण भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों द्वारा भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) फंड के माध्यम से किया जा रहा है। इस फंड का प्रशासन संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय (UNOSSC) द्वारा किया जाता है।

बैठक के दौरान लाइबेरियाई प्रतिनिधिमंडल को महिला-नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) के लिए भारत द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री  अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि भारत महिलाओं को राष्ट्रीय विकास की सक्रिय भागीदार के रूप में देखता है।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण के प्रति भारत की विधायी, कार्यक्रमगत और संस्थागत प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। इसमें महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व, लैंगिक उत्तरदायी शासन और बजट व्यवस्था, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने के लिए संस्थागत तंत्र, देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) तथा स्थानीय शासन में महिलाओं का नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

दोनों पक्षों ने साझा हित के विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के ढांचे के तहत भारत और लाइबेरिया के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक के अंत में लाइबेरियाई प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख एलेन-अट्टोह व्रेह को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने समूह फोटो भी खिंचवाई।



हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व  मंत्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

डॉ. ममता साहू ने संभाली छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की कमान

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महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त डॉ. ममता साहू ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया।

शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में उन्होंने कार्यभार संभालते हुए महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण, उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण तथा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. ममता साहू ने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और सभी से समर्पण, पारदर्शिता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। उन्होंने आयोग के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण कर कार्यालयीन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनकी शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण तथा उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग महिलाओं के हितों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया, नगर निगम रायपुर के पार्षद महेश ध्रुव, दुर्गेश राव, रजनी शेंगडे, जितेन्द्र साहू, कृष्णा साहू, सीमा डहरिया, गीतेश साहू सहित आयोग के सचिव, सहायक संचालक, लेखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह की बैठक शुरू, महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास पर मंथन

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कोच्चि- भारत की BRICS अध्यक्षता-2026 के तहत सोमवार को केरल के कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह (Women's Working Group- WWG) की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। बैठक में BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी महिला सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा साझा हितों के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।


बैठक का उद्घाटन करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति BRICS देशों की साझा प्रतिबद्धता उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बैठक सार्थक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को नई दिशा देगी।

अनिल मलिक ने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान महिला ट्रैक को चार प्रमुख प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें महिलाओं के नेतृत्व और सुशासन को बढ़ावा देकर अधिक सशक्त BRICS का निर्माण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहन, महिला उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर सदस्य देशों के बीच सहयोग और विचार-विमर्श जारी है, जो कोच्चि बैठक में भी चर्चा का मुख्य आधार रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य देशों के बीच सकारात्मक सहयोग की भावना बैठक के सफल परिणाम सुनिश्चित करेगी।

बैठक भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण) के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जो मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती है।

महिला कार्य समूह की बैठक के बाद 8 और 9 जुलाई 2026 को कोच्चि में BRICS देशों के महिला एवं बाल विकास मंत्रियों की दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

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नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


पंचायती राज मंत्रालय की पहल: महिला प्रतिनिधियों के लिए कानूनी सुरक्षा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 25 से 27 मई 2026 तक नई दिल्ली में तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ToT) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “हिंसा से मुक्ति: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण” विषय पर आधारित था।

यह कार्यक्रम मंत्रालय की निरभय रहो पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे निर्भया फंड के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा राष्ट्रीय विधि विद्यालय, भारत विश्वविद्यालय का सहयोग भी रहा।

कार्यक्रम का उद्देश्य

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता को मजबूत करना था, ताकि वे:

  • महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को बेहतर समझ सकें

  • लैंगिक संवेदनशीलता विकसित कर सकें

  • संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत कर सकें

  • ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा और सहयोग प्रणाली को बेहतर बना सकें

प्रमुख प्रतिभागी

इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे:

  • राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (SIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • पिरामल फाउंडेशन

  • ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF)

उद्घाटन सत्र को सचिव विवेक भारद्वाज और महानिदेशक सुरेंद्रकुमार बागड़े ने संबोधित किया।

‘निरभय रहो’ पहल

सचिव ने बताया कि इस पहल के तहत तीन प्रमुख घटक लागू किए जा रहे हैं:

  • निरभय नेत्री: महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और कानूनी जागरूकता

  • निरभय चेतना: पुरुष प्रतिनिधियों में लैंगिक समानता की जागरूकता

  • निरभय दृष्टि: ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी जैसे तकनीकी सुरक्षा उपाय

इस कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में लगभग 14.5 लाख महिला और 17.5 लाख पुरुष पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुंच बनाना है।

विशेषज्ञों के विचार

सायराम भट ने अपने संबोधन में कहा कि कानूनी साक्षरता और लैंगिक संवेदनशीलता को जमीनी स्तर पर मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि महिलाओं के लिए न्याय और सुरक्षा व्यवस्था को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रशिक्षण की विशेषताएँ

तीन दिवसीय कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे:

  • लैंगिक हिंसा और घरेलू हिंसा

  • बाल विवाह और साइबर सुरक्षा

  • पीड़ित सहायता प्रणाली और कानूनी उपचार

  • सामुदायिक भागीदारी और फर्स्ट रिस्पॉन्डर तंत्र

प्रशिक्षण में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह चर्चा, मूट कोर्ट और रोल प्ले जैसी गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।

निष्कर्ष

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया और इस पहल को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तार देने पर चर्चा हुई। यह पहल ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

महिला आरक्षण को लेकर देशभर में उत्साह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति’ को लिखा पत्र

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नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देशभर की महिलाएं विधायिका में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की पहल का स्वागत कर रही हैं। उन्होंने भारत की ‘नारी शक्ति’ को संबोधित करते हुए एक पत्र साझा किया, जिसमें दशकों से लंबित इस महत्वपूर्ण निर्णय को लागू करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।


प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश की माताएं, बहनें और बेटियां वर्ष 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के फैसले की सराहना कर रही हैं। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से लंबित था और अब इसे जल्द से जल्द साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने पत्र में देशवासियों के साथ इस संकल्प को पूरा करने की भावनाएं भी साझा कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण से देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी का अवसर मिलेगा, जिससे लोकतंत्र और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनेगा। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के विकास को नई दिशा देगी।

यह पहल न केवल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि समाज में समानता और अधिकारों को भी मजबूती प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री का यह संदेश देशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है, जो लंबे समय से इस महत्वपूर्ण बदलाव की प्रतीक्षा कर रही थीं।

महिला आरक्षण से आधी आबादी को मिलेगा उनका पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह देश की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है।

उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं की भूमिका समाज के निर्माण और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल माताओं-बहनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है।

उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

महिलाओं के लिए विधायी आरक्षण: लोकतंत्र को अधिक सशक्त और सहभागी बनाने की दिशा में आवश्यक कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि विधायी संस्थाओं (जैसे संसद और विधानसभाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है, जिससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इस विषय पर उन्होंने अपने विचार एक हाल ही में प्रकाशित ओप-एड लेख के माध्यम से विस्तार से साझा किए हैं।

प्रधानमंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण समय की मांग है! इससे हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत एवं सहभागी बनेगा। इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी तरह की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इसी को लेकर मैंने अपने विचार इस आलेख में साझा किए हैं।”

भारत में महिला-नेतृत्व विकास- सशक्तिकरण से नेतृत्व तक

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सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही 

रायपुर- भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।

भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।

“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 

प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।

दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।

शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।

महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।
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अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है। महिलाएँ आज न केवल अपने परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यही “Women-Led Development” का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति का आधार बनती है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: अधिकार, न्याय और कार्रवाई के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत

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नई दिल्ली- हर वर्ष International Women’s Day 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए इसका वैश्विक विषय “Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls” निर्धारित किया गया है, जो महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने, न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता के लिए ठोस कार्रवाई पर बल देता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। यह दिन लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को भी पुनः स्थापित करता है।

महिला अधिकारों की ऐतिहासिक यात्रा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के श्रमिक आंदोलनों से हुई। वर्ष 1917 में रूस में महिलाओं ने “रोटी और शांति” की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद 8 मार्च की तिथि को प्रतीकात्मक रूप से अपनाया गया। बाद में United Nations ने 1977 में इस दिवस को औपचारिक मान्यता दी।

आज यह दिवस दुनिया के अनेक देशों में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके अधिकारों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

“Give to Gain” वैश्विक अभियान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “Give to Gain” वैश्विक अभियान भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि जब व्यक्ति, संगठन और समाज मिलकर महिलाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, तो उससे समाज अधिक समावेशी और सशक्त बनता है।

भारत में महिला-नेतृत्व वाला विकास

भारत में विकास की अवधारणा समय के साथ “महिलाओं के लिए विकास” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” तक पहुंच गई है। अब महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति के प्रमुख प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है।

देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, सुरक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई पहलें महिलाओं के सशक्तिकरण को मजबूत कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह, उद्यमिता योजनाएँ और कौशल विकास कार्यक्रम महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यम निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं।

संविधान में लैंगिक समानता की गारंटी

भारत का संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और लैंगिक भेदभाव को निषिद्ध करता है।

  • अनुच्छेद 15 – धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।

  • अनुच्छेद 16 – सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करता है।

  • अनुच्छेद 39 – पुरुषों और महिलाओं के लिए समान आजीविका के अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।

  • अनुच्छेद 42 – मातृत्व राहत और मानवीय कार्य परिस्थितियों का प्रावधान करता है।

भारत ने स्वतंत्रता के समय से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू किया, जिससे महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान भागीदारी का अधिकार मिला।

शिक्षा और अवसरों का विस्तार

महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव शिक्षा से जुड़ी है। समग्र शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, और उच्च शिक्षा में विशेष सीटों जैसी पहलों ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया है।

उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में महिला सकल नामांकन अनुपात 22.9 से बढ़कर 30.2 हो गया।

Sukanya Samriddhi Yojana, जो Beti Bachao Beti Padhao अभियान के अंतर्गत 2015 में शुरू की गई, बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य के लिए बचत को प्रोत्साहित करती है। दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

स्वास्थ्य, पोषण और गरिमा

महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana के तहत मातृत्व सहायता प्रदान की जाती है।

  • Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के माध्यम से 10.56 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन महिलाओं को दिए गए हैं।

  • Jal Jeevan Mission के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल की उपलब्धता 16.72% से बढ़कर 81% से अधिक हो गई है।

  • Swachh Bharat Mission के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं।

इन प्रयासों से भारत में मातृ मृत्यु अनुपात 130 (2014-16) से घटकर 88 (2021-23) हो गया है।

सुरक्षा और न्याय

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Mission Shakti के तहत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और SHe-Box पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ स्थापित की गई हैं।

इसके अलावा Sexual Harassment of Women at Workplace Act 2013 कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करता है।

राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि

स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 73rd Constitutional Amendment Act और 74th Constitutional Amendment Act के माध्यम से पंचायतों और शहरी निकायों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं।

हाल ही में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।

आर्थिक सशक्तिकरण

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihood Mission के तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं।

  • Pradhan Mantri Mudra Yojana के तहत दिए गए ऋणों में लगभग 68% लाभार्थी महिलाएँ हैं।

  • Stand-Up India के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को सहायता मिली है।

इसके अतिरिक्त NaMo Drone Didi जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीकों से जोड़ रही हैं।

विकसित भारत 2047 की दिशा में नारी शक्ति

आज महिलाएँ उद्यमिता, विज्ञान, शासन, कृषि और तकनीक सहित अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से लेकर स्टार्ट-अप और स्थानीय शासन तक, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के विकास को अधिक समावेशी और सशक्त बना रही है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 इस परिवर्तन को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि अधिकार, न्याय और ठोस कार्रवाई के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी ही विकसित भारत 2047 की आधारशिला है।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मानेकशॉ सेंटर में राष्ट्रीय समारोह आयोजित होगा

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भारत सरकार कल 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उत्सव मना रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक राष्ट्रीय स्तर का समारोह आयोजित करेगा, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जो हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान करता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती कार्यबल भागीदारी को प्रदर्शित किया जाएगा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख नीतियों और योजनाओं को भी दिखाया जाएगा।

इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य संबोधन (Keynote Address) देंगी।

इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी सभा को संबोधित करेंगी और देश में महिला-नेतृत्व वाले विकास को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों और पहलों पर प्रकाश डालेंगी।

उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम में दो पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।

  • पहली पैनल चर्चा का विषय होगा “लेबर कोड्स – महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा”।

  • दूसरी पैनल चर्चा “स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ उद्यमी के रूप में” विषय पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में लगभग 1000 महिलाओं के भाग लेने की अपेक्षा है, जो 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल तथा अन्य क्षेत्रों की प्रतिनिधि महिलाएँ शामिल होंगी। यह देशभर में महिलाओं के विविध योगदान और भारत सरकार की महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह कार्यक्रम लाइव वेबकास्ट के माध्यम से भी देखा जा सकेगा:


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर दिया जोर

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) सरकार द्वारा आयोजित ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में भाग लिया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सैनिक के रूप में वे देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, वैज्ञानिक के रूप में प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं और खेल प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहरा रही हैं। राजनीति, समाजसेवा, प्रशासन और व्यापार—सभी क्षेत्रों में महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। देशभर के दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बढ़ती बालिकाओं की संख्या प्रेरणादायक है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अब भी हिंसा, आर्थिक असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और स्वास्थ्य संबंधी उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन बाधाओं को दूर किए बिना महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि महिला तभी वास्तविक रूप से सशक्त होगी जब वह स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हो, आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सके और उसे समान अवसर एवं सुरक्षा प्राप्त हो। एक सशक्त महिला न केवल अपना जीवन बदलती है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी निर्धारित करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ लाखों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है। ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करा रही है। ‘लखपति दीदी योजना’ जैसी पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान कर रही हैं। ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ महिलाओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन सभी प्रयासों से महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक सदस्य और संस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है। महिलाओं को शिक्षित करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें प्रोत्साहन एवं सहयोग देना हम सभी का कर्तव्य है। हमें महिलाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे सपने देख सकती हैं और उन्हें पूरा भी कर सकती हैं, और हम उनके साथ खड़े हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, जहां हर राज्य और क्षेत्र के लोग निवास करते हैं। यदि दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों तथा समाज के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करें, तो यह पूरे देश में सकारात्मक संदेश देगा। दिल्ली को महिला-नेतृत्व विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समृद्ध दिल्ली और विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार और समाज को उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना होगा। ऐसा वातावरण जहां वे बिना किसी दबाव या भय के अपने जीवन से जुड़े स्वतंत्र निर्णय ले सकें।

नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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नई दिल्ली- हिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (SHe-Box) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, संसद सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, रेखा शर्मा, लवली आनंद और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बारैया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के अध्यक्ष व सदस्य, नोडल अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि SHe-Box पोर्टल के माध्यम से देशभर में 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों की स्थापना से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि

  • 1.48 लाख से अधिक संस्थान SHe-Box पोर्टल पर पंजीकृत हैं

  • 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं

  • महिला श्रम भागीदारी दर पिछले छह वर्षों में 23% से बढ़कर 42% हो गई है

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हर महिला बिना डर के कार्य कर सके और नेतृत्व कर सके।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जानकारी

राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा महिलाओं का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि

  • मुद्रा ऋण का 70% महिलाओं को दिया गया है

  • पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं

  • 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

नई पहल और घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान मंत्री ने

  • SHe-Box का नया लोगो

  • PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट

  • मिशन शक्ति ऐप के साथ SHe-Box का एकीकरण

  • कर्मयोगी भारत PoSH प्रशिक्षण लिंक
    का शुभारंभ किया।

साथ ही राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।

विशेष चर्चा और पैनल सत्र

सम्मेलन में “अनुपालन को मजबूत करने और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति बनाने” पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, UN Women और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

व्यापक सहभागिता

इस सम्मेलन में लगभग 1,500 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से जुड़े।

सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना, PoSH कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और SHe-Box के उपयोग को बढ़ावा देना है।


कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 14 फरवरी 2026 को विज्ञान भवन में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box)’ का आयोजन कर रहा है।

यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, आंतरिक/स्थानीय समितियों (ICs/LCs) के अध्यक्षों और सदस्यों, नोडल अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, उद्योग जगत के नेताओं, नागरिक समाज प्रतिनिधियों, मीडिया आदि की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

यह सम्मेलन सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उत्पीड़न-मुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करने तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (PoSH Act) के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने का प्रयास है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को SHe-Box पोर्टल लॉन्च किया था। यह एक सुरक्षित, उपयोगकर्ता-अनुकूल और बहुभाषी सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म है, जिसमें कड़ी गोपनीयता के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, संबंधित आंतरिक या स्थानीय समिति को स्वचालित रूप से भेजने और वास्तविक समय में शिकायत की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।

यह पोर्टल एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ कार्यस्थल अपनी अनुपालन संबंधी जानकारी जैसे समिति का विवरण, वार्षिक रिपोर्ट और जागरूकता एवं प्रशिक्षण गतिविधियाँ अपलोड कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा, SHe-Box लोगो का शुभारंभ, राष्ट्रीय PoSH प्रशिक्षण वीडियो, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री का विमोचन तथा प्रत्येक नागरिक के लिए करमयोगी भारत पर उपलब्ध PoSH प्रशिक्षण तक पहुंच शामिल होगी। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी, इसके बाद उनका मुख्य भाषण होगा।

मुख्य सत्रों में PoSH अनुपालन और कार्यस्थल संस्कृति को मजबूत करने पर राष्ट्रीय गोलमेज चर्चा (विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित) और वैश्विक कार्यस्थल सुरक्षा के सर्वोत्तम अभ्यासों पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों एवं बहुपक्षीय संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा शामिल होगी। सम्मेलन में सुरक्षित कार्यस्थल के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाने के लिए PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट भी जारी की जाएगी।

इस सम्मेलन में सरकारी और निजी क्षेत्रों की 100 से अधिक संस्थाओं से लगभग 1,500 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम वेबकास्ट के माध्यम से ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है:

यह सम्मेलन PoSH अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अनुपालन को मजबूत करने, SHe-Box को अपनाने को बढ़ावा देने और सुरक्षित व सम्मानजनक कार्यस्थलों को आगे बढ़ाने में भारत की नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ करने का सरकारी प्रयास है।


न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास आयोग के इतर भारत–ग्वाटेमाला वार्ता, द्विपक्षीय सहयोग को नई मजबूती

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न्यूयॉर्क में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development) की बैठक के इतर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ग्वाटेमाला की सामाजिक विकास उप-मंत्री महामहिम क्लाउडिया टेरेसा वालेंज़ुएला लोपेज़ से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच गर्मजोशीपूर्ण और पारस्परिक लाभकारी साझेदारी को और सशक्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने महिला-नेतृत्व वाले और समावेशी विकास के लिए भारत के “समग्र सरकार दृष्टिकोण” (Whole-of-Government Approach) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ी प्रमुख पहलों की जानकारी साझा की।

सावित्री ठाकुर ने स्वयं सहायता समूह (SHG), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पीएम-पोषण स्कूल भोजन योजना और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए इन क्षेत्रों में भारत के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाटेमाला का ‘शक्ति-सैट’ (ShakthiSAT) वैश्विक STEM पहल में शामिल होना, विशेष रूप से बालिकाओं के लिए, अत्यंत उत्साहजनक है।

दोनों पक्षों ने लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। साथ ही सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी समुदायों के कल्याण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पंखुड़ी पोर्टल की जानकारी साझा की और प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल देखभाल गृहों के समर्थन सहित, स्वैच्छिक और परोपकारी योगदान के माध्यम से भारत के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

यह मुलाकात भारत और ग्वाटेमाला के बीच सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वर्ष 2026 ‘महतारी गौरव वर्ष’ : मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित - मुख्यमंत्री साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नूतन वर्ष 2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने ऑडियो संदेश में सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जो मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित रहेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में “महतारी” का स्थान सर्वोच्च है। नारी शक्ति त्याग, संस्कार, श्रम और नेतृत्व की प्रतीक है। महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से समाज के सभी क्षेत्रों में मातृशक्ति के योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य ने नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक प्रगति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि तथा बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त की हैं। इस विकास यात्रा में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में और अधिक सशक्त होकर आगे आएँगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति के सहयोग से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और अधिक गति और सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगी। 

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे नारी सम्मान, नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण को अपने आचरण और जीवन का मूल मंत्र बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी मिलकर वर्ष 2026 को नारी सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास का सशक्त प्रतीक बनाएं। यही नया छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का साझा संकल्प है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी प्रदेशवासियों को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए समृद्धि, शांति और उन्नति की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।

https://x.com/i/status/2006657032368304560

गुन्टूर में नई चेतना 4.0 का शुभारंभ, महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान

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ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया और सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे “एक आवाज़, एक संकल्प, समानता के लिए एक नई शुरुआत” की प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ें।

डॉ. चंद्रशेखर ने राज्य स्तरीय ‘नई चेतना 4.0’ के शुभारंभ के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे लैंगिक हिंसा के खिलाफ एक शक्तिशाली जन आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा को हर रूप में समाप्त करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्री ने गुन्टूर में जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) का उद्घाटन किया। यह सेंटर महिलाओं के लिए एक वन-स्टॉप सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगा, जिसमें काउंसलिंग, कानूनी सहायता, रेफरल और आजीविका संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि महिलाओं को समय पर समर्थन, सुरक्षा और न्याय तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।

गुन्टूर में उपस्थित आंध्र प्रदेश की नारी शक्ति से संवाद करते हुए मंत्री ने एक परिवर्तित ग्रामीण भारत के लक्ष्य पर जोर दिया, जहाँ हर महिला सुरक्षित, सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करे और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण को समावेशी और सतत विकास का आधार बताया।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं को सशक्त बनाना सामाजिक प्रगति को तेज करता है, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा भारत की वृद्धि और मजबूती के लिए मूलभूत हैं।

डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि DAY-NRLM के तहत, नई चेतना महिलाओं के समूहों को मजबूत कर रही है, लैंगिक हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता को बढ़ावा दे रही है, पुरुषों और लड़कों की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने नागरिकों से सामूहिक संकल्प दोहराने का आग्रह किया और कहा कि सुरक्षित, सम्मानित और आर्थिक रूप से सशक्त भारत का निर्माण एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

नई चेतना की शुरुआत 2021 में हुई थी और यह अब लगभग 10 करोड़ SHG महिलाओं द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। देशभर में 13 लाख से अधिक बैठकों और कार्यक्रमों के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों ने जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लिया है। यह पहल 12 केंद्रीय मंत्रालयों के समन्वय में लागू की जा रही है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, साथ ही भूमि, बैंकिंग और प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।

कार्यक्रम में राज्य गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता और राज्य मंत्री (MSME, SERP एवं NRI सशक्तिकरण और संबंध) कोंडापल्ली श्रीनिवास भी उपस्थित थे, और इस अवसर पर 3000 से अधिक महिलाएं मौजूद थीं।

महिला मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: भारत सरकार की बहुआयामी पहल

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“जन स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और डिस्पेंसरी’’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में शामिल है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी आता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, सामुदायिक देखभाल और पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

फिर भी, भारत सरकार राज्य सरकारों का समर्थन करती है और एक व्यापक, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाती है, जो अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, टेली-मेंटल हेल्थ सेवा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कार्यस्थल सुरक्षा उपाय, लिंग-संवेदनशील कानून प्रवर्तन इंटरफेस और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जोड़ती है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना, कम करना और प्रबंधित करना है।

मुख्य पहल और कार्यक्रम:

  1. केन्द्रीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण:

    • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम, लिंग-संवेदनशीलता, लचीले कार्य समय और आंतरिक शिकायत तंत्र के दिशा-निर्देश।

  2. आपातकालीन सहायता और सुरक्षा:

    • महिला हेल्पलाइन (181), बाल हेल्पलाइन (1098), और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112।

    • ज़ीरो FIR और ई-FIR जैसी सुविधा।

  3. कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा:

    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त करना, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण और निगरानी।

    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के तहत 767 जिलों में सेवाएँ।

    • 1.81 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया।

    • टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम Tele-MANAS: 53 सेल्स, 20 भाषाओं में सेवा, 29.82 लाख कॉल्स।

  4. महिला सुरक्षा और सहायता:

    • मिशन शक्ति के तहत One Stop Centres (OSC): 864 OSCs, 12.67 लाख महिलाओं को सहायता।

    • महिला हेल्प डेस्क: 14,649 पुलिस स्टेशनों में, महिला अधिकारियों द्वारा संचालित।

    • SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए केंद्रीय मंच।

  5. सुरक्षित कार्यस्थल और रोजगार:

    • चार श्रम संहिता (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य) लागू।

    • समान कार्य के लिए समान वेतन, रात की शिफ्ट और खतरनाक काम में महिलाओं की अनुमति सुरक्षित वातावरण के तहत।

    • कार्यदिवस 8 घंटे और 48 घंटे प्रति सप्ताह, ओवरटाइम स्वीकृति और दोगुना वेतन।

    • निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच।

  6. सामाजिक-सामर्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण:

    • कौशल भारत, उद्यमिता और जीविका कार्यक्रम।

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वित्तीय समावेशन, माइक्रोक्रेडिट और स्वयं-सहायता समूह।

इन सभी पहलों को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण के मुख्य एजेंट हैं। केंद्र सरकार नीति मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, तकनीकी दिशा-निर्देश, वित्तीय सहायता, अंतर-मंत्रालय समन्वय और निगरानी के माध्यम से समर्थन देती है।

इन उपायों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना और कम करना, समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करना, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और महिलाओं की गरिमा, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देना है।

सूचना स्रोत: मंत्री राज्य महिला एवं बाल विकास, सवित्री ठाकुर, लोकसभा में आज दिए गए उत्तर के अनुसार।

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