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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, 23 जिले प्रभावित; 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 3 की मौत

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 23 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत की भी सूचना है।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अधिक बना हुआ है। गंगा, सरयू, शारदा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है।

1,499 नावें और 1,067 मेडिकल टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए सरकार ने 1,499 नाव और मोटरबोट तैनात की हैं। इसके साथ ही 1,067 मेडिकल टीमें प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में जुटी हैं। प्रशासन ने राज्य में 1,311 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें से 201 शिविर फिलहाल संचालित किए जा रहे हैं।

चित्रकूट और बलिया में हालात चिंताजनक

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण चौरा गांव से करीब 150 लोगों को मोटरबोट की मदद से सुरक्षित निकाला गया। वहीं बलिया में गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। यहां राहत कार्यों के लिए नावों की तैनाती के साथ राशन, दवाइयां और पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वाराणसी में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिलाधिकारी से बात कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखा है।

बारिश का दौर अभी जारी

मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश में बिगड़ते बाढ़ हालात के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट: 13 जिलों के 173 गांव प्रभावित, 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 84,362 लोग और 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। 

4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य में 1,263 बाढ़ राहत केंद्र तैयार किए गए हैं, जिनमें से 41 फिलहाल संचालित हैं और इनमें 1,045 लोग रह रहे हैं। 

राज्य राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ की स्थिति और जारी राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन को जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को राहत शिविरों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। 

इन 13 जिलों में बाढ़ का असर

बाढ़ से प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं।

प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध रखने तथा नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

NDRF समेत बड़ी संख्या में राहत बल तैनात

बाढ़ से निपटने के लिए राज्य में 1,589 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 428 नाव एवं मोटरबोट और 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा NDRF की 16 टीमें भी राज्य में तैनात हैं। कई जिलों में SDRF और PAC के जवान भी राहत कार्यों में लगाए गए हैं।

राहत सामग्री के तहत अब तक प्रभावित लोगों को 15,238 खाद्यान्न पैकेट और 30,316 भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

मौसम और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी

प्रशासन नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रख रहा है। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित जिलों के साथ लगातार संपर्क में है। नागरिकों की शिकायतों और सूचनाओं के लिए 1070 हेल्पलाइन के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा रही है। 

राज्य सरकार के अनुसार, 1 से 18 अगस्त के बीच मौसम संबंधी चेतावनियों के लिए 140.52 करोड़ SMS लोगों को भेजे गए हैं। बाढ़ से बचाव और आपदा सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की जा रही है।

फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करना है।

असम के बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार देगी 5 करोड़ रुपये

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा से दूरभाष पर की चर्चा

संकट की इस घड़ी में असम के भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- असम में बाढ़ से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मानवीय संवेदना और अंतरराज्यीय सहयोग की भावना के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह राशि असम में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग के लिए प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से दूरभाष पर चर्चा कर राज्य में बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता असम के अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ी है।

असम में बाढ़ का कहर जारी: 4.45 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

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गुवाहाटी- असम में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 4.45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

बाढ़ के चलते हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। केंद्र और राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में समन्वय के साथ तेजी लाई जा रही है।

इस बीच, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। हालांकि कई क्षेत्रों में जलस्तर घटने के साथ हालात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और अपर असम में सड़क एवं संचार संपर्क पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इसके बावजूद कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है और राहत कार्य जारी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान, बेहतर जल प्रबंधन और बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। 

बाढ़ में फंसे 170 लोगों को भारतीय तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचाया, दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात में चलाया बड़ा रेस्क्यू अभियान

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नई दिल्ली- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 170 लोगों को सुरक्षित बचाया। 22 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि से अब तक लगातार बारिश, भीषण बाढ़ और खराब मौसम के बीच 11 सफल रेस्क्यू अभियान चलाए गए।

रेस्क्यू अभियान की शुरुआत 22/23 जुलाई की रात सिलवासा के खानवेल क्षेत्र से पांच लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ हुई। इसके बाद कडैया तटीय क्षेत्र में बाढ़ के कारण नदी किनारे फंसे तीन मछुआरों को बचाया गया।

सबसे बड़े अभियानों में से एक में वेलस्पन इंडस्ट्रियल एरिया से 60 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका था।

इसके अलावा बाढ़ के पानी में फंसी एक बस से सात लोगों को, डोंगरी क्षेत्र से 10 लोगों को, वलसाड-पारडी क्षेत्र से हेलीकॉप्टर की मदद से चार लोगों को तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज क्षेत्र से आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

एक अन्य महत्वपूर्ण अभियान में आवध सोसाइटी से 10 लोगों को बचाया गया, जिनमें नौ माह की गर्भवती महिला और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही एक महिला भी शामिल थीं। दोनों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

24 जुलाई को भारतीय तटरक्षक बल के दो हेलीकॉप्टरों ने नवसारी जिले के मेंदर गांव से 33 लोगों को एयरलिफ्ट किया। इनमें एक गंभीर सीने के दर्द से पीड़ित व्यक्ति भी शामिल था, जिसे तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

लगातार मूसलाधार बारिश, तेज बहाव और बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय तटरक्षक बल के जवान बिना रुके राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहे। इस अभियान के जरिए तटरक्षक बल ने अपने आदर्श वाक्य "वयम् रक्षामः" (हम रक्षा करते हैं) को एक बार फिर चरितार्थ किया।

भारतीय तटरक्षक बल ने कहा है कि वह नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर पूरी सतर्कता के साथ राहत कार्य जारी रखे हुए है और बाढ़ से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

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प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान 7 नवंबर को छत्रपति संभाजीनगर में किसानों और ग्रामीण विकास योजनाओं का करेंगे निरीक्षण

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नई दिल्ली- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जो कि कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालय के पदाधिकारी हैं, 7 नवंबर 2025 को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिला और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का एक दिवसीय दौरा करेंगे। इस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा, स्थानीय किसानों के साथ संवाद और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करेंगे।

केंद्रीय मंत्री सुबह दिल्ली से प्रस्थान करेंगे और वायु मार्ग से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचेंगे। वहां से वह हेलीकॉप्टर द्वारा सिर्सला जाएंगे, जहां वे कृषिकुल संस्थान में ‘रुद्राभिषेक’ और ध्वजारोहण समारोह में भाग लेंगे। केंद्रीय मंत्री GVT टीम के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे और किसानों के साथ संवाद कर चल रही कृषि पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वे संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे और किसानों एवं ग्रामीण निवासियों के साथ खुली बातचीत करेंगे, ताकि कल्याण योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सके।

दोपहर में, केंद्रीय मंत्री अरनपुर गाँव का दौरा करेंगे और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क पुल का निरीक्षण करेंगे तथा आसपास के बुनियादी ढांचे की स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। इसके बाद वह तपोवन गाँव जाएंगे, जहां हाल की बाढ़ के कारण हुई फसल हानि और अन्य नुकसान का आकलन करेंगे। शिवराज सिंह चौहान घारकुल हाउसिंग प्रोजेक्ट का भी दौरा करेंगे और लाभार्थी परिवारों व स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद करेंगे।

केंद्रीय मंत्री का कार्यक्रम हेमडपंठी महादेव मंदिर में पूजा और आसपास के भूमि कटाव का निरीक्षण करना भी शामिल है। वे खांगाोन–तपोवन सड़क पुल और आसपास के बोरवेल्स को हुए नुकसान की समीक्षा भी करेंगे। शाम को शिवराज सिंह चौहान छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।

यह दौरा केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा किए जा रहे राज्य-स्तरीय दौरे की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीधे किसानों और ग्रामीण समुदायों से संवाद करना, केंद्रीय योजनाओं की प्रगति का आकलन करना और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास प्रयासों को गति देना है।

कर्नाटक और महाराष्ट्र को SDRF की दूसरी किस्त के रूप में 1,950.80 करोड़ रुपये जारी — केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ और आपदा राहत में समर्थन

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 2025-26 के लिए केंद्र द्वारा SDRF की दूसरी किस्त के तहत 1,950.80 करोड़ रुपये कर्नाटक और महाराष्ट्र को अग्रिम जारी करने को मंजूरी दी है। इसमें से कर्नाटक के लिए 384.40 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र के लिए 1,566.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि इन राज्यों में इस वर्ष की दक्षिण-पश्चिम मानसून में अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान की जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, केंद्र सरकार बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों को सम्पूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस वर्ष, केंद्र ने पहले ही 27 राज्यों को SDRF के तहत 13,603.20 करोड़ रुपये और 15 राज्यों को NDRF के तहत 2,189.28 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) से 21 राज्यों को 4,571.30 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (NDMF) से 09 राज्यों को 372.09 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से प्रभावित राज्यों को सभी लॉजिस्टिक सहायता, जिसमें आवश्यक NDRF टीमें, सेना की टीमें और वायु सेना का समर्थन शामिल है, भी प्रदान किया है। इस वर्ष की मानसून में, 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 199 NDRF टीमों को बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया।

केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने होशियारपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा

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केंद्रीय राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास,सावित्री ठाकुर ने पंजाब के होशियारपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जहाँ उन्होंने स्थिति का अवलोकन किया और प्रभावित किसानों, छोटे व्यवसायियों तथा ग्रामीणों से बातचीत की।

अपने दौरे के दौरान उन्होंने गंधुवाल, फाटकुल्ला, अब्दुल्लापुर, हालेड़ जनार्दन, सालोवाल, मोतला, कौलियां-418, मेहताबपुर में किसान प्रतिनिधिमंडलों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने बीस नदी पर स्थित राडा ब्रिज (मेंडेरीया) का निरीक्षण भी किया।सावित्री ठाकुर ने लोगों को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राहत और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

सावित्री ठाकुर ने बताया कि सरकार ने पहले ही पीएम-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त 26 सितंबर को पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए जारी की है, ताकि बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।

दौरे का समापन करते हुए उन्होंने जोर दिया कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रयास जारी रखेगी और इस क्षेत्र में बाढ़ संबंधी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए काम करेगी।



केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

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जम्मू-केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज जम्मू के आर.एस.पुरा क्षेत्र के सीमा गाँव बदयाल ब्राह्मणा पहुंचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। पहुँचते ही मंत्री ने सबसे पहले खेतों का निरीक्षण कर खड़ी फसलों को हुए नुकसान का जायज़ा लिया। इसके बाद उन्होंने बाढ़ पीड़ित किसानों एवं स्थानीय नागरिकों की बड़ी सभा को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस संकट की घड़ी में जम्मू-कश्मीर की जनता के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार से परामर्श के बाद, हुए नुकसानों के आकलन पर सभी संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय, जल शक्ति, ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय की टीमें पहले ही प्रभावित इलाकों का सर्वेक्षण कर चुकी हैं और अपनी रिपोर्टें दे रही हैं। राज्य सरकार का ज्ञापन प्राप्त होते ही केंद्र सरकार राहत उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

बदयाल ब्राह्मणा के दौरे के बाद मंत्री जम्मू शहर लौटे और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ समीक्षा बैठक की। इसके उपरांत मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कई राहत उपायों की घोषणा की।

मुख्य घोषणाएँ:

  • प्रभावित किसानों को तुरंत पीएम-किसान की एक किस्त जारी की जाएगी।

  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मजदूरों को मनरेगा के तहत 50 अतिरिक्त मानव-दिवस दिए जाएंगे (कुल 150 मानव-दिवस, वर्तमान 100 के बजाय)।

  • बाढ़ में मारे गए पशुओं के लिए किसानों को मुआवज़ा दिया जाएगा।

  • बाढ़ से क्षतिग्रस्त लगभग 5000 मकानों का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होगा। प्रत्येक मकान के लिए ₹1,30,000 और अलग शौचालय की राशि दी जाएगी।

  • बाढ़ में प्रभावित स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए ₹76 करोड़ की राशि जारी की जाएगी।

चौहान ने सुझाव दिया कि किसानों के खेतों में जमा हुई रेत को उन्हीं के उपयोग में लाने की अनुमति दी जाए। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के खनन विभाग को नियमों में ढील देनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार के पास ₹2,499 करोड़ आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार अतिरिक्त सहायता भी देगी। साथ ही, क्षतिग्रस्त नहरों और तटबंधों के जीर्णोद्धार का कार्य भी केंद्र सरकार की मदद से किया जाएगा।

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