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बिलासपुर में शिक्षक निलंबित, नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का आरोप; वीडियो हुआ वायरल

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बिलासपुर- जिले के कोटा विकासखंड के बहेरामुड़ा स्थित अनुदान प्राप्त विद्यामंदिर प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ एक सहायक शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। शिक्षक पर स्कूल समय में कथित तौर पर नशे की हालत में पहुंचने और अनुशासनहीन एवं अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप है।


वायरल वीडियो से सामने आया मामला

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया। प्रारंभिक जांच में शिक्षक के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में पाए जाने और अनुचित व्यवहार की बात सामने आई।

DEO ने दिए तत्काल निलंबन के निर्देश

जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन समिति को संबंधित सहायक शिक्षक के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा

वायरल वीडियो में शिक्षक कथित तौर पर लंबे समय से वेतन नहीं मिलने की बात कहते हुए दिखाई देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 10 महीने से वेतन लंबित होने का दावा किया है। हालांकि, वेतन लंबित रहने के कारणों की अलग से पुष्टि/जांच की जानी बाकी है।

आगे विभागीय कार्रवाई संभव

शिक्षा विभाग ने फिलहाल प्रारंभिक जांच और उपलब्ध शिकायतों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।


शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का आरोप, हेडमास्टर का वीडियो वायरल; शिकायत की चुनौती देने के बाद निलंबित

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जांजगीर-चांपा- जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आया है। भांठापारा भुईगांव के शासकीय स्कूल में पदस्थ हेडमास्टर योगेश्वर सिंह कंवर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर में नजर आ रहे हैं।

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर मामले की जांच शुरू की गई, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पामगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय से अटैच किया गया है।

वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हेडमास्टर स्कूल परिसर में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि उस समय वे शराब के नशे में थे और उनका व्यवहार सामान्य नहीं था।

बताया जा रहा है कि स्कूल के कुछ शिक्षकों ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई। इसी दौरान कथित तौर पर उन्होंने शिक्षकों को शिकायत करने की चुनौती दी।

वायरल वीडियो में वे कथित तौर पर शिक्षकों से वीडियो बनाने और उसे जहां शिकायत करनी हो वहां भेजने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में BEO, DEO और कलेक्टर तक शिकायत करने का भी जिक्र बताया जा रहा है।

हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति और लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

महिला शिक्षक से विवाद का भी जिक्र

मामले के साथ स्कूल में हेडमास्टर और एक महिला शिक्षक के बीच कथित विवाद की बात भी सामने आई है।

आरोप है कि हेडमास्टर ने बच्चों के सामने महिला शिक्षक के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके पढ़ाने के तरीके पर टिप्पणी की। वायरल वीडियो में भी महिला शिक्षक से संबंधित बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों ने स्कूल पहुंचकर संभाली स्थिति

हेडमास्टर के कथित व्यवहार की जानकारी मिलने के बाद गांव के कुछ जनप्रतिनिधि भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने मामले को शांत कराने और हेडमास्टर को समझाने का प्रयास किया।

इसी दौरान स्कूल परिसर में हुई बातचीत और घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा।

कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई

वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जांच के निर्देश दिए।

जिला शिक्षा अधिकारी मनोहर प्रताप सिंह के अनुसार, हेडमास्टर के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने संबंधी जानकारी वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आई थी। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और पामगढ़ BEO कार्यालय से अटैच किया गया।

प्रशासन के अनुसार, जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमों के तहत आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्कूलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

घटना के बाद कलेक्टर ने जिले के शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी और सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण कर—

  • शिक्षकों की उपस्थिति,

  • अनुशासन,

  • स्कूल में शिक्षकों के आचरण,

  • शिक्षण व्यवस्था और

  • विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण

की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

इसके अलावा नशे की हालत में स्कूल आने या अनुशासनहीनता से संबंधित शिकायतें मिलने पर उनकी जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुराने मामलों की भी होगी समीक्षा

कलेक्टर ने जिले में पहले सामने आए शिक्षकों की अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों की जानकारी भी मांगी है। अधिकारियों से ऐसे मामलों में हुई विभागीय जांच और अब तक की गई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताने को कहा गया है।

इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पूर्व में सामने आए मामलों में क्या कार्रवाई हुई और क्या कोई मामला अभी लंबित है।

अब जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर

फिलहाल हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है और मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच के दौरान वायरल वीडियो, संबंधित शिक्षकों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि हेडमास्टर के खिलाफ आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें - उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठक

​रायपुर- राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय

बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर  सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।

​न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण

वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया। 

​वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर

मंत्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल

छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।

स्कूल परिसर में शराब पार्टी का वीडियो वायरल, 5 शिक्षकों समेत 6 कर्मचारियों को नोटिस

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 सक्ती। मालखरौदा ब्लॉक स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल किरारी में परिसर के भीतर शिक्षकों और कर्मचारी द्वारा कथित रूप से शराब पीने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में स्कूल परिसर के अंदर पांच शिक्षक और एक स्वीपर आपस में बैठकर शराब का सेवन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू करा दी है।


3 दिनों के भीतर मांगा जवाब

जिला शिक्षा अधिकारी ने वीडियो में नजर आ रहे सभी छह कर्मचारियों को नोटिस जारी कर घटना के संबंध में तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों (वीडियो) का परीक्षण करने के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो नियम के तहत संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल विभाग द्वारा वायरल वीडियो की सत्यता और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। विद्या के मंदिर में इस तरह की घटना सामने आने से क्षेत्र के ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

अमानवीय: निजी स्कूल की शिक्षिका ने छात्र से 100 बार लिखवाईं अश्लील गालियां

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अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल से एक सनसनीखेज और अमानवीय मामला सामने आया है। आरोप है कि दो छात्रों के बीच हुए मामूली विवाद के बाद एक शिक्षिका ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर छात्र से उसकी कॉपी में मां से जुड़ी अश्लील गालियां करीब 100 बार लिखवाईं। घटना के बाद छात्र मानसिक रूप से बेहद आहत है, वहीं परिजनों और छात्र संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच के आदेश दे दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के दौरान दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद संबंधित शिक्षिका ने एक छात्र को सजा देने के लिए कॉपी में कई पन्नों तक अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील भाषा लिखने को कहा। छात्र से मां के लिए इस्तेमाल होने वाली गालियां बार-बार लिखवाई गईं। घर पहुंचने पर जब परिजनों को इस बात की जानकारी मिली, तो वे सन्न रह गए।

परिजनों और छात्र संगठनों का विरोध

पीड़ित छात्र के परिजनों ने शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि:

"अनुशासन सिखाने के कई सकारात्मक रास्ते हो सकते हैं, लेकिन इस तरह की अश्लील भाषा लिखवाना नैतिक मूल्यों और शिक्षा के मंदिर की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। इससे बच्चे के मानसिक विकास पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।"

मामला सामने आते ही स्थानीय छात्र संगठनों ने भी स्कूल के बाहर विरोध दर्ज कराया और दोषी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।

जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा की जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल संज्ञान लिया है। विभाग के उप संचालक को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आते ही तथ्यों के आधार पर कड़े नियम-कायदों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षिका के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,28 अधिकारियों के तबादले, कई जिलों में नए डीईओ पदस्थ

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रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।

अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार  महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।

जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।

स्कूल शिक्षा  मंत्री गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।

बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा हेतु जारी किए कड़े निर्देश

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स्कूलों में बच्चों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था लागू

रायपुर- माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 05/2025 में दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तथा छत्तीसगढ़ शासन, पशुधन विकास विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर के पत्र क्रमांक E-166671 & 153108/LAW-42/1802/2025/1724 दिनांक 13.11.2025 के आधार पर शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए  आदेश जारी किया गया है। 

शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के प्रत्येक स्कूल के प्राचार्य या संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। नोडल अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि स्कूल परिसर या आसपास यदि आवारा कुत्ते दिखाई दें, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग क्रैचर नोडल अधिकारी को दें। साथ ही स्कूल परिसर में कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए आवश्यक अवरोधक उपाय सुनिश्चित करें। यदि किसी बच्चे के साथ आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना होती है, तो बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी, ताकि आवश्यक प्राथमिक इलाज समय पर उपलब्ध कराया जा सके।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उद्देश्य प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, भय-मुक्त और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप तथा पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे प्रदेश में तेजी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों, बीईओ, बीआरसी, सीआरसी तथा स्कूल प्रबंधन समितियों से अपेक्षा की है कि वे इन दिशा-निर्देशों का कठोरतापूर्वक पालन सुनिश्चित करें और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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