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GMADA दफ्तर में ED की 36 घंटे की कार्रवाई, 30 से ज्यादा बैग दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त; AAP का विरोध

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मोहाली- पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की करीब 36 घंटे चली तलाशी और जांच कार्रवाई गुरुवार को समाप्त हो गई। ED की टीम मंगलवार सुबह GMADA कार्यालय पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से पूछताछ और विभिन्न रिकॉर्ड की जांच की गई। 

जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ED की कार्रवाई कथित भूमि अधिग्रहण, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, बकाया राशि में कथित छूट और निजी रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े लेन-देन की जांच का हिस्सा है। जांच में दिल्ली की Tirupati Infraprojects और उससे जुड़ी कंपनियों के लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। ED की जांच में कथित तौर पर GMADA से संबंधित संपत्तियों और निजी डेवलपर्स के बीच हुए लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। 

ED के अनुसार, जांच में कुछ कंपनियों को GMADA की ओर से देय राशि में कथित वित्तीय राहत और इससे सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित नुकसान के आरोपों की जांच शामिल है। यह आरोप जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। 

30 से ज्यादा बैग दस्तावेज और हार्ड डिस्क ले गई टीम

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 36 घंटे की कार्रवाई के बाद ED टीम गुरुवार सुबह लगभग 11:30 बजे GMADA कार्यालय से बाहर निकली। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि टीम अपने साथ 30 से अधिक बैग में दस्तावेज और स्कैन किए गए रिकॉर्ड की हार्ड डिस्क लेकर गई। अभी तक किसी GMADA अधिकारी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। 

AAP ने किया विरोध

ED की कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को GMADA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और ED के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी परिसर के अंदर जाने की कोशिश करने लगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान ED के एक वाहन को नुकसान पहुंचाने की घटना भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। 

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा समेत AAP नेताओं ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। यह AAP का आरोप है; ED की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की जांच और उसके कानूनी आधार को अलग से देखा जाना जरूरी है। 

पंजाब सरकार पहुंची हाई कोर्ट

ED की लंबी कार्रवाई के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक वारंट अधिकारी नियुक्त किया और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। अदालत की यह कार्रवाई इस मामले में कानूनी निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अब आगे क्या?

ED की टीम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने साथ ले गई है। रिपोर्टों के अनुसार, जब्त सामग्री की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। फिलहाल किसी GMADA अधिकारी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है

CGPSC भर्ती घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CM के OSD चेतन बोरघरिया गिरफ्तार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में OSD रहे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें छह दिन की ED हिरासत में भेजा है।

2020 और 2021 की CGPSC परीक्षाएं जांच के घेरे में

ED के अनुसार, जांच का संबंध CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक, वित्तीय लेन-देन और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया गया था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में बोरघरिया के पद और प्रभाव का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया गया।

3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वसूली

ED का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने 2021 CGPSC परीक्षा के कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम वसूली। एजेंसी के अनुसार, अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था। इन दावों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

170 लेन-देन में 66.64 लाख रुपये की जांच

जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए करीब 66.64 लाख रुपये जमा होने का ED ने दावा किया है। एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और कथित CGPSC नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच कर रही है।

मोबाइल चैट और डिजिटल सबूत भी जांच में

ED ने इससे पहले 1 सितंबर को बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली थी। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत सामने आई, जिसमें वित्तीय लेन-देन तथा रकम के भुगतान या वापसी से संबंधित संदेश होने की बात कही गई है।

ED ने Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की है। एजेंसी को आशंका है कि कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर धन के आवागमन और लेयरिंग के लिए किया गया हो सकता है।

जांच अभी जारी

ED का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से बोरघरिया की कथित भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, ये सभी एजेंसी के जांच संबंधी आरोप और दावे हैं; मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसी कथित धन के स्रोत, उसके लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

170 ट्रांजेक्शन, खाते में 66.64 लाख! डिप्टी कलेक्टर चेतन बोरघरिया केस में ED की जांच तेज

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 रायपुर। डिप्टी कलेक्टर चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं। ED के मुताबिक, बोरघरिया के बैंक खाते में अलग-अलग 170 ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपए जमा हुए। जांच एजेंसी अब इन रकम के स्रोत और लेन-देन से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।


PSC-2021 मामले से जुड़े लेन-देन की जांच

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर पर PSC-2021 परीक्षा के अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से अधिक की कथित वसूली का आरोप है। एजेंसी इन पैसों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और उनके प्रवाह की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, बोरघरिया से जुड़े मामले का एक हिस्सा उस अवधि का है, जब वे तत्कालीन मुख्यमंत्री के OSD के रूप में कार्यरत थे। ED इस दौरान हुए कथित संदिग्ध लेन-देन, रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।

कंपनी के जरिए रकम को वैध दिखाने का आरोप

ED ने दावा किया है कि कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित रकम को वैध आय के रूप में दिखाने के लिए M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी कंपनी से जुड़े बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

7 दिन की कस्टोडियल रिमांड

गिरफ्तारी के बाद ED ने चेतन बोरघरिया को 7 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लिया है। इस दौरान एजेंसी उनसे पूछताछ कर रही है और बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

PSC-2021 मामले में CBI दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

PSC-2021 से जुड़े मामले में CBI पहले ही जांच कर चुकी है और तत्कालीन PSC अध्यक्ष समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

अब ED, EOW की FIR के आधार पर कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है। एजेंसी के प्रेसनोट में बैंक खातों में हुए ट्रांजेक्शन, PSC परीक्षा से जुड़े कथित पैसों और कंपनी के माध्यम से रकम को वैध दिखाने के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

फिलहाल ED की पूछताछ जारी है और जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

CGPSC घोटाला मामले में ED का बड़ा दावा, चयन की गारंटी के नाम पर जुटाए गए करीब 3 करोड़ रुपये

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से एक बड़ा दावा सामने आया है। जांच के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री के OSD के नाम और पद का प्रभाव दिखाकर अभ्यर्थियों को चयन की गारंटी देने का कथित भरोसा दिलाया गया और इसी आधार पर करीब 3 करोड़ रुपये जुटाए गए।

ED की जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों पर प्रभावशाली प्रशासनिक और राजनीतिक संपर्कों का हवाला देकर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से कथित तौर पर पैसे लेने के आरोप हैं। दावा किया गया कि संबंधित उम्मीदवारों का चयन सरकारी भर्ती प्रक्रिया में प्रभाव का इस्तेमाल कर सुनिश्चित कराया जा सकता है।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन OSD से जुड़े नाम और पद के कथित इस्तेमाल को जांच का अहम पहलू माना जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, रकम किसके जरिए जुटाई गई और कथित तौर पर एकत्र किए गए पैसों का इस्तेमाल या लेन-देन किस तरह किया गया।

CGPSC भर्ती घोटाले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर है। भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और प्रभावशाली लोगों के नाम के इस्तेमाल को लेकर जांच आगे बढ़ रही है। हालिया कार्रवाई में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व OSD रह चुके अधिकारी चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार भी किया है।

हालांकि, ED की जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की जांच, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक लेन-देन की तस्वीर साफ होगी।

CGPSC घोटाला मामले में ED की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव के इस्तेमाल को लेकर नए दावे सामने आ रहे हैं।

पूर्व CM भूपेश बघेल के निज सचिव रहे केके चंद्रवंशी के घर ED की दबिश, सुबह 6 बजे पहुंची टीम

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भिलाई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निज सचिव रहे केके चंद्रवंशी के भिलाई-3 स्थित आवास पर मंगलवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दबिश दी। ED की टीम सुबह करीब 6 बजे तीन वाहनों से विश्व बैंक कॉलोनी स्थित चंद्रवंशी के घर पहुंची। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा।


जानकारी के मुताबिक, ED के अधिकारी आवास के अंदर दस्तावेजों और अन्य संबंधित सामग्रियों की जांच कर रहे हैं। टीम की कार्रवाई के चलते इलाके में भी हलचल बढ़ गई। मकान के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।

हालांकि, ED की यह कार्रवाई किस मामले या प्रकरण के सिलसिले में की जा रही है, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई के कारणों और जांच में सामने आए दस्तावेजों या अन्य साक्ष्यों के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

केके चंद्रवंशी का पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निज सचिव के तौर पर काम कर चुके होने के कारण ED की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, ₹2,883 करोड़ के मामले में ED की कार्रवाई

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच के तहत की गई है।

₹2,883 करोड़ की कथित अपराध से हुई आय

ED की जांच जिस मामले से जुड़ी है, उसमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW)/एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की चार्जशीट के आधार पर कथित घोटाले से हुई अपराध की आय लगभग ₹2,883 करोड़ आंकी गई है। ED के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2019 से 2022 के दौरान शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री से जुड़ी थीं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे मामले में राजनीतिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों, शराब निर्माताओं, FL-10A लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था और कथित तौर पर अवैध कमीशन की उगाही की गई।

ED की जांच में क्या सामने आया?

ED के अनुसार, कथित शराब घोटाले में अलग-अलग तरीकों से अवैध धन की व्यवस्था किए जाने की जांच की जा रही है। इनमें शराब की सरकारी खरीद पर कथित कमीशन, बिना हिसाब वाली देशी शराब की बिक्री तथा शराब निर्माताओं से कथित कमीशन जैसे पहलुओं की जांच शामिल है।

जांच के दौरान ED ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। एजेंसी ने पहले भी छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में तलाशी अभियान चलाकर नकदी, सोना, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। अप्रैल 2026 की एक कार्रवाई में लगभग ₹5.39 करोड़ की नकदी और सोना जब्त किए जाने की जानकारी ED ने दी थी।

आगे क्या?

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ED कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध की आय से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला फिलहाल राज्य की राजनीति और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के केंद्र में है।


CGPSC भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी पर ED का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) से जुड़े मामले में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी के खिलाफ जांच को गति देते हुए ED ने मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध संपत्तियों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि ED यह जांच कर रही है कि कथित भर्ती अनियमितताओं के माध्यम से अर्जित धन का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और उसे वैध दिखाने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया। एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

यह कार्रवाई राज्य में चर्चित CGPSC भर्ती घोटाले से संबंधित है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है और अब ED धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला प्रदेश की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है और इसकी जांच पर अभ्यर्थियों तथा आम जनता की नजर बनी हुई है।

नाव्या मलिक ड्रग्स सिंडिकेट केस में ED की एंट्री, मनी ट्रेल और पूरे नेटवर्क की होगी जांच

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 रायपुर। राजधानी के चर्चित नाव्या मलिक ड्रग्स सिंडिकेट मामले में अब Enforcement Directorate (ED) की एंट्री हो गई है। एजेंसी अब ड्रग्स कारोबार से जुड़े मनी ट्रेल, आर्थिक लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जांच करेगी। जानकारी के मुताबिक, ED ने रायपुर पुलिस से मामले की चार्जशीट और जांच से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।


पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, नाव्या मलिक का संपर्क शहर के कई कारोबारी, इवेंट आयोजकों और कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल लोगों से था। जांच में दावा किया गया है कि Delhi से ड्रग्स मंगाकर Raipur के कई होटल, पब और टेक्नो पार्टियों में इसकी सप्लाई की जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, दिल्ली का एक कथित सप्लायर, जिसे नेटवर्क में ‘टोयोटा’ के नाम से जाना जाता था, ड्रग्स उपलब्ध कराता था। गिरफ्तार आरोपी मोनू बिश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वह कई बार ड्रग्स की खेप रायपुर लाकर नाव्या और उसके नेटवर्क तक पहुंचा चुका था।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि जांच के दौरान कुछ कारोबारी और इवेंट आयोजकों के नाम सामने आए, जिनसे पुलिस ने पूछताछ की। हालांकि, केवल नाम सामने आने का अर्थ किसी व्यक्ति के दोषी होने से नहीं है और इनमें से सभी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

पुलिस के अनुसार, नाव्या मलिक को अगस्त 2025 में Mumbai से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हाई-प्रोफाइल पार्टियों और निजी आयोजनों में ड्रग्स की सप्लाई करती थी। उसके मंगेतर अयान परवेज को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। चार्जशीट में दावा किया गया है कि अयान द्वारा दी गई सूचना के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क तक पहुंच सकी।

अब Enforcement Directorate यह जांच करेगी कि ड्रग्स कारोबार से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, साथ ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन में किन-किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाला : ED की बड़ी कार्रवाई! रायपुर व महासमुंद में 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, मचा हड़कंप

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 रायपुर/महासमुंद। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारतमाला परियोजना के भूमि मुआवजा घोटाले में सोमवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। राजधानी रायपुर और महासमुंद में लगभग 9 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। यह कार्रवाई जमीन अधिग्रहण के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और अवैध मुआवजा भुगतान की जांच के सिलसिले में की गई।


सूत्रों के मुताबिक, ED अधिकारियों की टीम हरमीत खनूजा, उसके सहयोगियों और कुछ संबंधित अधिकारियों के ठिकानों पर दबिश दे रही है। रेड के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस की जांच की जा रही है।

महासमुंद में कारोबारी के घर पर कार्रवाई

महासमुंद में बसंत कॉलोनी स्थित बिजनेसमैन जसबीर सिंह बग्गा के घर पर भी टीम पहुंची। बताया गया कि बग्गा का होंडा शोरूम है। ED की टीम दो गाड़ियों में पहुंचकर उनके घर में मौजूद दस्तावेजों की छानबीन कर रही है।

क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला?

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर से विशाखापत्तनम तक करीब 950 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। इसमें रायपुर-विजाग के बीच चार लेन और दुर्ग-आरंग सेक्शन में छह लेन का निर्माण शामिल है।
आरोप है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान जमीन की कीमतों में हेराफेरी कर अनुचित लाभ लेने और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।

दस्तावेज जब्त, आगे और कार्रवाई संभव

ED अधिकारियों की टीमें वर्तमान में रिकॉर्ड की जांच में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में गिरफ्तारियाँ और दूसरे ठिकानों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

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