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राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी : बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और जनजातीय प्रतिनिधियों का हुआ विशेष सम्मान

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बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐसा वैभव देखने को मिला : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुँचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

रायपुर- बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।


इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।

प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।

बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम  छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं। 

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव - केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।

राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को 'खोड़िया राजा' तथा मिटकी को 'गप्पा देई' के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

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राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप - मुख्यमंत्री साय 

नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ‘गुलाल’ होली विशेषांक का विमोचन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय  में  ‘गुलाल’ होली विशेषांक का विमोचन किया। वरिष्ठ पत्रकार जगजीत सिंह द्वारा प्रकाशित इस विशेषांक में होली पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक पक्षों को समाहित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और भारतीय परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति का पर्व है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकाशन हमारी लोकसंस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस रचनात्मक पहल के लिए प्रकाशक और उनकी टीम को बधाई दी। 

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, दीपक विश्वकर्मा, नदीम मेमन तथा श्रमजीवी गिल्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष आर.के. गांधी उपस्थित थे।

बस्तर पंडुम 2026-माँ दंतेश्वरी की धरती पर संस्कृति का उत्सव: बस्तर पंडुम 2026 ने जीता दिल

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सुकमा के जनजातीय वेशभूषा ने बिखेरा जलवा

गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

गुंजन नाग और किरण नाग ने बढ़ाया जिले का मान

जगदलपुर- बस्तर की आत्मा, उसकी परंपराएं और उसकी जनजातीय पहचान—इन सबका भव्य उत्सव बनकर उभरा “बस्तर पंडुम 2026” न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि यह सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनजातीय संरक्षण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बना। लाल बाग मैदान में हुए इस ऐतिहासिक समापन समारोह ने पूरे देश का ध्यान बस्तर की गौरवशाली विरासत की ओर आकृष्ट किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की परिकल्पना को प्रशासन ने पूरी निष्ठा के साथ साकार किया। यह आयोजन उन परंपराओं के लिए संजीवनी साबित हुआ, जो समय के प्रवाह में विलुप्त होने की कगार पर थीं। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, जनजातीय वेशभूषा, खानपान और शिल्प—सब कुछ अपने मूल स्वरूप में सहेजा गया, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

सुकमा बना सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

सुकमा जिला प्रशासन ने इस आयोजन में उत्कृष्ट समन्वय, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का परिचय दिया।  जिले के कलाकारों ने बस्तर की आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया। छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल सुकमा, बल्कि पूरे बस्तर का मान बढ़ाया। 

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर देश के गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया गया, जो शासन की कलाकारों के प्रति सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।

सहभागिता ने रचा इतिहास

सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंच और अवसर जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहे हैं। यह सहभागिता केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक रही।

विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण

बस्तर पंडुम 2026 यह स्पष्ट संदेश देता है कि श्री विष्णु देव साय सरकार का विकास मॉडल केवल सड़कों, भवनों और योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक आत्मसम्मान को समान महत्व देता है। यह आयोजन साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व दूरदर्शी, तो विकास और परंपरा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

श्रद्धा, संस्कृति और संगीत के संगम के साथ सिरपुर महोत्सव का भव्य समापन

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सिरपुर महोत्सव हमारी गौरवशाली परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम- सांसद रूपकुमारी चौधरी

सिरपुर हमारी आस्था,संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक- विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा

महासमुंद- सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का आज भव्य एवं गरिमामयी समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद रूपकुमारी चौधरी शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक महासमुंद श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, भारत स्काउट एवं गाइड संघ के अध्यक्ष येतराम साहू, सिरपुर सरपंच पुष्पा के माली, डीलेश्वरी चंद्राकर, जितेंद्र सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, महेंद्र सिक्का, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद  रूपकुमारी चौधरी ने विभागीय स्टॉल का अवलोकन किया। साथ ही अतिथियों द्वारा कॉफी टेबल बुक एवं महासमुंद जिले की दो वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित कैलेंडर का विमोचन किया गया। 

मुख्य अतिथि सांसद रूपकुमारी चौधरी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर है। सिरपुर की प्राचीन विरासत, बौद्ध विहारों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों ने इसे विश्व पटल पर विशेष स्थान दिलाया है। यहां आयोजित सिरपुर महोत्सव हमारी गौरवशाली परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संस्कृति, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा एक भारत-श्रेष्ठ भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास को नई दिशा दी जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सांसद चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन एवं ग्रामीण सड़क योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से आमजन के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से सिरपुर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए जिला प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी सहयोगी संस्थाओं की सराहना की।

विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिरपुर हमारी आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यह भूमि हमें हमारी गौरवशाली विरासत से जोड़ती है। सिरपुर महोत्सव के माध्यम से हमारी लोक कला, लोक संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सिरपुर के विकास एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आने वाले समय में सिरपुर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि सिरपुर महोत्सव से क्षेत्र के पर्यटन, रोजगार एवं स्थानीय कला को नई पहचान मिली है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।

स्काउट एवं गाइड संघ के जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि सिरपुर केवल एक ऐतिहासिक नगरी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिरपुर महोत्सव के माध्यम से इस गौरवशाली धरोहर को जन-जन तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। यह महोत्सव हमारी संस्कृति, परंपरा, कला और इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बन चुका है।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के सफल आयोजन पर शासन, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक टीम, कलाकारों एवं आमजन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है। सभी के सहयोग, अनुशासन एवं उत्साह से यह आयोजन सफल एवं यादगार बना।

समापन अवसर पर महोत्सव में आकर्षक प्रस्तुतिया देने वाले कलाकारों, सांस्कृतिक दलों एवं आयोजन से जुड़े प्रमुख आयोजकों को मंच पर सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत, भजन-कीर्तन एवं आधुनिक संगीत कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही विभागीय प्रदर्शनी एवं एलईडी छायाचित्र प्रदर्शनी लोगों के लिए आकर्षण बना रहा। देश-प्रदेश से आए पर्यटकों ने सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों एवं विहारों का अवलोकन कर इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

अहमदाबाद में ‘नमोत्व’ का भव्य मंचन: संस्कृति, नेतृत्व और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरक गाथा

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अहमदाबाद में कल गर्व, संस्कृति और प्रेरणा से भरपूर एक अविस्मरणीय संध्या देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, नेतृत्व और दूरदर्शी यात्रा पर आधारित भव्य संगीतात्मक मल्टीमीडिया प्रस्तुति ‘नमोत्व’ का आयोजन किया गया। संस्कारधाम द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम हाउसफुल रहा, जिसमें कला, संगीत, तकनीक और कथा-वाचन के माध्यम से सेवा, संकल्प और राष्ट्रनिर्माण की असाधारण यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि “नमोत्व एक ऐसे नेता के जीवन का चित्रण है, जिन्होंने मात्र 11 वर्षों में 140 करोड़ भारतीयों को 2047 तक भारत को हर दृष्टि से विश्व का नंबर एक देश बनाने के लिए प्रेरित किया। यह तभी संभव है जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को एक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए समर्पित कर दे, निरंतर प्रयोग करता रहे और पूरे देश में उसी सपने को साझा करने वाली एक विशाल टीम तैयार करे।”

‘नमोत्व’ एक भव्य मंचीय प्रस्तुति है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन की प्रेरक यात्रा को कलात्मक ढंग से दर्शाती है—गुजरात के वडनगर में उनके साधारण आरंभ से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके परिवर्तनकारी नेतृत्व तक। लाइव परफॉर्मेंस, संगीत, नृत्य, कथानक और अत्याधुनिक मल्टीमीडिया विजुअल्स के समन्वय से यह कार्यक्रम न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के अहम पड़ावों को दर्शाता है, बल्कि भारत के विकासात्मक सफर को भी रेखांकित करता है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथि, सांस्कृतिक साधक, आध्यात्मिक गुरु, कलाकार, विद्वान और विभिन्न वर्गों के नागरिक उपस्थित रहे। भारी जनभागीदारी ने यह सिद्ध किया कि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय चेतना के बीच गहरा संबंध है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण कलाकारों की अद्भुत लाइव प्रस्तुति रही। हवाई दृश्य से प्रस्तुत मंचन ने संस्कृति, संगीत और संदेश का ऐसा जीवंत समन्वय प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस मंचीय प्रस्तुति में 150 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया, जिनकी सशक्त प्रस्तुतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और नेतृत्व यात्रा के निर्णायक क्षणों को सजीव किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई ऐतिहासिक विकास पहलों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, यह दर्शाते हुए कि कैसे गुजरात मॉडल बाद में राष्ट्रीय प्रगति का खाका बना।

कथानक में अवसंरचना विकास, सुशासन, सामाजिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास की प्रमुख उपलब्धियों को दर्शाया गया। पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी पर आधारित विकास दर्शन को कार्यक्रम के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने प्रकाशन प्रभाग, केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) और PIB के माध्यम से प्रधानमंत्री के जीवन और कार्यों से जुड़ी जानकारी के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई। CBC और प्रकाशन प्रभाग, अहमदाबाद द्वारा कार्यक्रम स्थल पर एक विशेष पुस्तक स्टॉल लगाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों, नेतृत्व दर्शन और सार्वजनिक जीवन पर आधारित प्रकाशनों का समृद्ध संग्रह प्रदर्शित किया गया।

पुस्तक स्टॉल पर दर्शकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों की विशेष रुचि देखने को मिली। लगभग 14 प्रमुख पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें Letters to Mother (भावना सोमैया), आंख आ धन्य छे, The Modi Story – Reflections on Leadership and Life, Modi@20: Dreams Meet Delivery, 370: Undoing the Unjust, Igniting Collective Goodness – Mann Ki Baat @100 सहित कई महत्वपूर्ण शीर्षक शामिल थे।

इसके अतिरिक्त, प्रकाशन प्रभाग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का संकलन भी प्रदर्शित किया गया, जो शासन, विकास, सामाजिक सुधार और वैश्विक सहभागिता पर उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस संग्रह ने आगंतुकों को प्रधानमंत्री के विचारों से गहराई से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी, प्रेस सूचना ब्यूरो के महानिदेशक धीरेंद्र ओझा तथा PIB अहमदाबाद के अपर महानिदेशक प्रशांत पाथराबे ने पुस्तक स्टॉल का दौरा किया और अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने प्रधानमंत्री की यात्रा और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने के प्रयासों की सराहना की तथा सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से सूचना प्रसार की पहल को ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

‘नमोत्व’ कार्यक्रम इस बात का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा कि किस प्रकार संस्कृति, मूल्यों, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के संदेश को प्रभावी ढंग से संप्रेषित कर सकती है। पारंपरिक कला रूपों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से यह कार्यक्रम सभी पीढ़ियों और वर्गों के दर्शकों को जोड़ने में सफल रहा।

पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने संकल्प, नवाचार और लोकसेवा की भावना से जुड़े अनेक प्रेरक क्षणों का अनुभव किया। विनम्रता, समर्पण और सामूहिक प्रयास जैसे मूल्यों को उजागर करते हुए यह संदेश दिया गया कि परिवर्तनकारी नेतृत्व जनकेंद्रित शासन में निहित होता है।

उच्च कलात्मक मानकों के साथ प्रस्तुत यह कार्यक्रम आम जन के लिए सहज, भावनात्मक और अर्थपूर्ण बना रहा। सटीक कोरियोग्राफी, प्रभावशाली संगीत, सशक्त कथन और immersive विजुअल्स ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

नमोत्व केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, विकासात्मक आकांक्षाओं और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव बनकर सामने आया। इसने नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह सिद्ध किया कि रचनात्मक अभिव्यक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने की अपार शक्ति रखती है।


राष्ट्रपति ने अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ में 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई

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रायपुर-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान भारत के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है, जो लोकतंत्र की जननी है। इसके उदाहरण प्राचीन गणराज्यों के साथ-साथ कई जनजातीय परंपराओं में भी देखे जा सकते हैं, जैसे कि बस्तर में 'मुरिया दरबार' – जो आदिम लोगों की संसद है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विरासत की जड़ें छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गहरी हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव पखवाड़े को बड़े स्तर पर मनाया।

राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में, जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएँ विकसित और कार्यान्वित की गई हैं। पिछले वर्ष, गांधी जयंती के अवसर पर ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया गया था। इस अभियान का लाभ देश भर के 5 करोड़ से अधिक जनजातीय भाई-बहनों तक पहुँचेगा। वर्ष 2023 में, 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन अभियान) शुरू किया गया। ये सभी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार जनजातीय समुदायों को कितनी प्राथमिकता देती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों के विकास प्रयासों को नई ऊर्जा देने के लिए, भारत सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के वर्ष के दौरान ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस अभियान के तहत देश भर में लगभग 20 लाख स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर काम करके जनजातीय समुदायों का विकास सुनिश्चित करेंगे।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर में लोग वामपंथी उग्रवाद का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के सुविचारित और सुसंगठित प्रयासों से निकट भविष्य में वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन संभव हो पाएगा। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल ही में आयोजित 'बस्तर ओलंपिक्स' में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय महापुरुषों के आदर्शों का पालन करते हुए, छत्तीसगढ़ के लोग एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।


छत्तीसगढ़ राज्योत्सव: लोक निर्माण विभाग का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

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रायपुर-छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में लोक निर्माण विभाग (PWD) का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विभाग ने पिछले 25 वर्षों में प्रदेश के विकास कार्यों को शानदार तरीके से प्रदर्शित किया है, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। 

लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के हर शहर, कस्बे, गांव और आबादी क्षेत्र को सड़कों के जाल से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छत्तीसगढ़ भवन और ट्रायबल यूथ हॉस्टल का निर्माण किया गया है, जिसका लाभ अनुसूचित जनजाति के युवाओं को मिल रहा है। वहीं, प्रदेश की राजधानी रायपुर में अटल एक्सप्रेस-वे, नया रायपुर में विधानसभा भवन, मंत्रालय, विभागाध्यक्ष भवन जैसी अनेक महत्वपूर्ण इमारतें बनाई गई हैं। 

बिलासपुर में माननीय उच्च न्यायालय भवन और विभिन्न जिलों में संयुक्त जिला कार्यालय भवनों का निर्माण भी विभाग की उपलब्धियों में शामिल है, जिससे शासकीय कार्यों में सरलता आई है। लोक निर्माण विभाग ने अपनी 25 वर्षों की विकास गाथा को आकर्षक और प्रभावी तरीके से प्रदर्शित किया है, जिसे जनता द्वारा खूब सराहा जा रहा है। 

यह स्टॉल न केवल विभाग के कार्यों को दर्शाता है, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास और प्रगति की कहानी को भी जीवंत करता है।



छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: 1 से 5 नवम्बर तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की होगी शानदार प्रस्तुतियां

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मुख्यमंच और शिल्पग्राम मंच में कलाकार बिखेरेंगे मनमोहक छटा

पहले दिन पार्श्व गायक हंशराज रघुवंशी होंगे आकर्षण का केन्द्र

छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कलाकार भी देंगे अपनी प्रस्तुति

रायपुर-छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत महोत्सव में देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। एक नवम्बर से 5 नवम्बर तक मुख्यमंच के अलावा शिल्पग्राम मंच पर भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। राज्योत्सव में इस बार छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कलाकारों के साथ ही देश के जाने-माने कलाकार,हंशराज रघुवंशी,आदित्य नारायण,अंकित तिवारी, कैलाश खेर, भूमि त्रिवेदी अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। 

राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर नवा रायपुर के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वाणिज्य एवं व्यापार परिसर में बनाये गए मुख्यमंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सुबह 11 बजे ऐश्वर्या पंडित के गायन से होगी। इसके बाद पीसी लाल यादव, आरू साहू, दुष्यंत हरमुख, निर्मला ठाकुर तथा शाम 8 बजे राष्ट्रीय कलाकार हंशराज रघुवंशी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 2 नवम्बर को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक आदित्य नारायण प्रमुख आकर्षण के केन्द्र होंगे। उनके द्वारा गीतों की प्रस्तुति रात्रि 9 बजे से दी जाएगी। इस दिन सांस्कृति कार्यक्रमों की शुरूआत शाम 6.30 बजे से होगी। सबसे पहले सुनील तिवारी, जयश्री नायर चिन्हारी द गर्ल बैंड, पद्मश्री डोमार सिंह कंवर नाचा दल का कार्यक्रम होगा। 

इसी प्रकार 3 नवम्बर को पार्श्व गायिका भूमि त्रिवेदी रात्रि 9 बजे से प्रस्तुति देंगी। इस दिन सांस्कृति संध्या में शाम 6 बजे से पद्मश्री उषा बारले पण्डवानी,राकेश शर्मा सूफी-भजन गायन, कुलेश्वर ताम्रकार लोकमंच की प्रस्तुति होगी तथा 4 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक अंकित तिवारी प्रस्तुति देंगे। इस दिन शाम 6 बजे कला केन्द्र रायपुर बैण्ड, रेखा देवार की लोकगीत,प्रकाश अवस्थी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 5 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक कैलाश खेर अपनी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक संध्या में शाम 6 बजे से पूनम विराट तिवारी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का कार्यक्रम होगा। 

शिल्पग्राम मंच की प्रस्तुतियां-

शिल्पग्राम मंच में 1 नवम्बर को मोहम्मद अनस पियानो वादन, बासंती वैष्णव द्वारा कत्थक, रमादत्त जोशी और सोनाली सेन का गायन,स्वीटी पगारिया कत्थक,मंगलूराम यादव की बांसगीत, चारूलता देशमुख भारत नाट्य, दुष्यंत द्विवेदी की पण्डवानी, लोकेश साहू की भजन, बॉबी मंडल की लोक संगीत तथा चन्द्रभूषण वर्मा लोकमंच की प्रस्तुति होगी। 

2 नवम्बर को रेखा जलक्षत्रीय की भरथरी, ईकबाल ओबेराय की म्यूजिक ग्रुप, बसंतबीर उपाध्याय मानस बैंड, दीपाली पाण्डेय की कत्थक, लिलेश्वर सिंहा की लोक संगीत,अंविता विश्वकर्मा भारतनाट्यम, आशिका सिंघल कत्थक, प्रांजल राजपूत भरथरी, प्रसिद्धि सिंहा कत्थक,जीवनदास मानिकपुरी लोकमंच एवं जितेन्द्र कुमार साहू सोनहा बादर की प्रस्तुति होगी। 

3 नवम्बर को सुरेश ठाकुर भजन, डॉ. आरती सिंह कत्थक, राखी राय भरतनाट्यम, पुसउराम बंजारे पण्डवानी, इशिका गिरी कत्थक, गिरवर सिंह ध्रुव भंुजिया नृत्य, राधिका शर्मा कत्थक, शांतिबाई चेलक पण्डवानी, दुष्यंतकुमार दुबे सुआ नृत्य, गंगाबाई मानिकपुरी पण्डवानी, संगीता कापसे शास्त्रीय नृत्य,महेन्द्र चौहान की चौहान एव बैंड तथा घनश्याम महानंद फ्यूजन बैंड की प्रस्तुति होगी। 

4 नवम्बर को भुमिसूता मिश्रा ओडिसी, चैतुराम तारक नाचा दल, आशना दिल्लीवार कत्थक, पुष्पा साहू लोक संगीत, महेन्द्र चौहान पण्डवानी, प्रिति गोस्वामी कत्थक, पृथा मिश्रा शास्त्रीय गायन, महेश साहू लोकमंच, विजय चंद्राकर लोक संगीत तथा तिलक राजा साहू लोकधारा की प्रस्तुति होगी। 

5 नवम्बर को दुर्गा साहू पण्डवानी, डाली थरवानी कत्थक, संजय नारंग लोकसंगती, सारिका शर्मा कत्थक, महेश्वरी सिंहा लोकमंच, चंद्रशेखर चकोर की लोक नाट्य,नीतिन अग्रवाल लोकसंगीत, द्वारिकाप्रसाद साहू की डंडा नृत्य, महुआ मजुमदार की लोकसंगीत तथा नरेन्द्र जलक्षत्रीय लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।

करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले में अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद, प्रांतीय शाखा छत्तीसगढ़ द्वारा ग्राम कण्डोरा में आयोजित महासम्मेलन (सोहरई करमा महोत्सव 2025) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कुनकुरी में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित रौतिया समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा ग्राम पंचायत कण्डोरा में 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाले रौतिया भवन निर्माण का भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री साय ने समाज की मांग पर ग्राम कण्डोरा में करमा अखरा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए तथा रायपुर में रौतिया भवन पहुँच मार्ग के लिए 25 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने मंच पर रौतिया समाज के वीर शहीद बख्तर साय और मुण्डल सिंह के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे सभी समाज मिलजुलकर मनाते हैं। यह पर्व हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि एकादशी करमा, दशहरा करमा जैसी परंपराएँ हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं। ये उत्सव समाज को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को तीव्र गति से लागू कर रही है। सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रति मानक बोरा दर को 5500 रुपए कर दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने लोगों से वोकल फॉर लोकल अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल उन्मूलन की दिशा में तीव्रता से कार्य कर रही है। दो दिन पूर्व ही 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान स्थित आमा बगीचा के करमा पूजन स्थल पर करम वृक्ष की डाली की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने करमा नर्तक दल के साथ गले में मांदर टाँगकर ताल मिलाते हुए करम वृक्ष की डाली के चारों ओर उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय तथा परिवारजन भी उपस्थित थे।

सोहरई करमा महोत्सव: रौतिया समाज की सांस्कृतिक पहचान

सोहरई करमा महोत्सव मूलतः रौतिया समाज द्वारा गोवर्धन पर्व के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन नए फसल को पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ कर घर लाया जाता है। ग्राम कण्डोरा में आयोजित इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए कुल 52 मंडलों के नर्तक दलों ने सहभागिता की। विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।

इस अवसर पर सांसद राधेश्याम राठिया, अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ. पी. साय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दामोदर सिंह, राष्ट्रीय महासचिव आजाद सिंह, केंद्रीय संगठन मंत्री भुनेश्वर केसर, केंद्रीय महिला सदस्य  उमा देवी सहित समाज के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है नवरात्रि : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय रायपुर शहर के विभिन्न गरबा महोत्सव में हुए शामिल, मातारानी का दर्शन कर लिया आशीर्वाद

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नवरात्रि के पावन पर्व पर विगत रात्रि राजधानी रायपुर स्थित विभिन्न गरबा समारोहों में शामिल हुए। उन्होंने मातारानी का दर्शन कर प्रदेश की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर रायपुर शहर गरबा के रंग में सराबोर दिखाई दिया और हर तरफ़ उत्सव का उल्लास वातावरण में व्याप्त था।

मुख्यमंत्री साय भानपुरी स्थित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज, आशीर्वाद भवन में गुजराती लोहाणा महाजन समाज द्वारा आयोजित "झणकारो 2025", इनडोर स्टेडियम में "रंगीलो रास 2025" तथा ओमाया पार्क में "रास गरबा उत्सव" में सम्मिलित हुए। इन आयोजनों में समाजजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक कच्छ पगड़ी पहनाकर और तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। गरबा की धुनों और रंगारंग माहौल में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने जनसमूह में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है। यह पर्व सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है तथा जन-जन में ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में देवी को विभिन्न स्वरूपों में पूजा जाता है और मातृशक्ति के आशीर्वाद से प्रदेश निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, धमतरी में मां अंगारमोती एवं बिलईमाता, सरगुजा और रतनपुर में मां महामाया, डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी जैसे अनेक स्वरूपों में माता प्रदेश में विराजमान हैं। इन सभी शक्तिपीठों का आध्यात्मिक महत्व न केवल प्रदेश की आस्था को मजबूत करता है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि नवरात्र के प्रथम दिन ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जीएसटी रिफॉर्म लागू कर देश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की है। यह सुधार न केवल व्यापार को सुगम बनाएगा बल्कि उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ भी देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘बचत उत्सव’ के माध्यम से आम नागरिकों की जेब में पैसों की उल्लेखनीय बचत हो रही है और यह अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने लोगों से आह्वान किया कि जब भी बाजार जाएँ तो स्वदेशी वस्तुओं की खरीदी को प्राथमिकता दें। स्वदेशी से न केवल देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपनाना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है और यही देश की समृद्धि का आधार बनेगा।

इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू,पुरंदर मिश्रा,सुनील सोनी,  विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज और गुजराती लोहाणा महाजन समाज के वरिष्ठजन एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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