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CG NEWS : आधी रात घर में घुसा भालू, घंटों दहशत में रहा परिवार; वीडियो वायरल

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 कांकेर। कांकेर शहर के रिहायशी इलाके गोविंदपुर में जंगली भालुओं की बढ़ती आवाजाही से लोगों में दहशत का माहौल है। इसी बीच बीती रात एक भालू अचानक एक घर में घुस गया। घर के अंदर भालू को देखकर परिवार के सदस्य घंटों तक सहमे रहे और खुद को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलने से बचते रहे।


जानकारी के अनुसार, भालू भोजन की तलाश में घर में दाखिल हुआ था। घर के अंदर पहुंचने के बाद वह आसपास रखी चीजों को सूंघते हुए भोजन तलाशता रहा। कुछ देर तक घर में घूमने के बाद भालू वहीं आराम करता हुआ भी नजर आया।


इस दौरान परिवार के सदस्यों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित रखा। भालू के घर में घुसने की जानकारी सामने आने के बाद आसपास के इलाके में भी हड़कंप मच गया। परिवार ने दूर से पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले भी रिहायशी इलाकों में पहुंच चुके हैं भालू

स्थानीय लोगों के मुताबिक, गोविंदपुर इलाके में भालुओं का रिहायशी क्षेत्र में पहुंचना कोई नई घटना नहीं है। भोजन और पानी की तलाश में भालू कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में घरों के दरवाजों को भी नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं।

भालुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण शाम के बाद लोगों में विशेष सतर्कता देखने को मिल रही है। स्थानीय रहवासियों को बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

वन विभाग से कार्रवाई की मांग

रिहायशी इलाके में बार-बार भालुओं के पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि भालुओं को केवल मौके से खदेड़ने के बजाय उनकी आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार हो रही आवाजाही के कारणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

लोगों ने क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाने, भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। घटना के बाद गोविंदपुर क्षेत्र में लोगों के बीच भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बड़ी कार्रवाई, वन्यजीव शिकार के आरोप में 6 गिरफ्तार

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 बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन अमले ने ग्राम नीतिकाकलेर क्षेत्र में दबिश देकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान वन्यप्राणी का मांस और शिकार में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक तौर पर मांस के नीलगाय का होने की आशंका जताई जा रही है।


जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को परिक्षेत्र पासेवाड़ा के अंतर्गत नीतिकाकलेर क्षेत्र में वन विभाग को वन्यजीवों के शिकार की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और 6 संदिग्धों को पकड़ लिया।

तलाशी के दौरान वन्यप्राणी का मांस और शिकार से संबंधित सामग्री बरामद होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

बारिश और दुर्गम इलाकों के बीच भी निगरानी जारी

मानसून के दौरान लगातार बारिश, नदी-नालों में बढ़े जलस्तर और दुर्गम इलाकों में आवागमन की चुनौतियों के बावजूद इंद्रावती टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला लगातार गश्त और निगरानी कर रहा है। वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में सूचना तंत्र मजबूत करने के साथ अवैध शिकार पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।

इस कार्रवाई में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधीक्षक, फरसेगढ़-पासेवाड़ा, सेण्ड्रा, कुटरू बफर, कुटरू कोर और मद्देड़ बफर के परिक्षेत्र अधिकारियों सहित मैदानी वन अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वन विभाग ने की सूचना देने की अपील

वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि जंगल में अवैध शिकार या वन्यजीवों से जुड़ी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल नजदीकी वन विभाग कार्यालय को सूचना दें। विभाग ने कहा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

बारनवापारा अभयारण्य में मिला दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर, छत्तीसगढ़ में दूसरा और बारनवापारा अभयारण्य से पहला रिकॉर्ड दर्ज

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रायपुर। जैव विविधता से भरपूर बार नावापारा अभयारण्य ने नया रिकार्ड दर्ज किया है। अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का अवलोकन दर्ज किया गया है। 29 दिसंबर 2025 की सुबह बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में बर्डर डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का दुर्लभ और महत्वपूर्ण अवलोकन दर्ज किया गया। 

यह इस प्रजाति का बारनवापारा से पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है, जबकि पूरे छत्तीसगढ़ में यह दूसरा पुष्ट अवलोकन माना जा रहा है। डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा किए गए इस अवलोकन को फील्ड फोटोग्राफिक साक्ष्यों के साथ विधिवत दस्तावेजीकृत किया गया है, जिससे इसकी वैज्ञानिक पुष्टि संभव हो सकी है। यह रिकॉर्ड भविष्य में पक्षी-विविधता के अध्ययन, संरक्षण योजना निर्माण तथा अभयारण्य प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।

उल्लेखनीय है कि ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर सामान्यतः तटीय एवं मैंग्रोव क्षेत्रों से जुड़ी एक दुर्लभ पक्षी प्रजाति मानी जाती है। आंतरिक भू-भाग में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य जैसे क्षेत्र में इसकी उपस्थिति यहाँ की पारिस्थितिक विविधता, जल-आधारित आवासों की उपलब्धता और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों को दर्शाती है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में इस प्रजाति को कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान में क्रोकोडाइल सर्वे के दौरान दर्ज किया गया था जिसे छत्तीसगढ़ से पहला पुष्ट रिकॉर्ड माना गया था।

वन्यजीव अपराध रोकथाम पर अंतर-एजेंसी बैठक आयोजित, प्रशिक्षण और जागरूकता पर विशेष जोर

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रायपुर। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, मध्य क्षेत्र मुख्यालय भोपाल, छत्तीसगढ़ वन विभाग तथा विभिन्न राज्यों के वन विभागों द्वारा आज नवा रायपुर के अरण्य भवन में वन्यजीव अपराध रोकथाम पर अन्तर एजेंसी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में रेलवे, पुलिस, वन विभाग, केंद्रीय एजेंसियों तथा विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा तथा झारखंड के वरिष्ठ वन अधिकारी, पुलिस अधिकारी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के 35 अधिकारी भी जुड़े।

बैठक में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम, अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई, तस्करी नेटवर्क की पहचान, अदालतों में केस प्रस्तुत करने की प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई। देशभर में बढ़ते वन्यजीव अपराधों को देखते हुए सभी विभागों ने अपने-अपने सुझाव और अनुभव को साझा किया।

छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर

बैठक के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ वन विभाग में वन्यजीव अपराध नियंत्रण और क्राइम सीन डिटेक्शन विषय पर क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इस पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नई दिल्ली ने सहमति जताई और विभागीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने का आश्वासन दिया। साथ ही वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव ने बताया कि स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

वन्य अपराधों की त्वरित जांच और कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी ) अरुण कुमार पांडे ने वन्यजीव अपराध प्रकरणों की त्वरित जांच, साक्ष्य संकलन और केस को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया और अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

विशेष टास्क फोर्स बनाने पर विचार

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य में वन्यजीव अपराध नियंत्रण के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, ताकि राज्य में वन्यजीव तस्करी और अवैध व्यापार पर और अधिक प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


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