Media24Media.com: #मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान-खेती किसानी को मिला नया संबल

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 छगन लाल लोन्हारे- संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन ढाई साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा।

परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के गुड़ी में ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।

हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधि युक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत, लोहार व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद रहता था। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के खेल मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

हरेली तिहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं है यह समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम है। गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और कार्यक्रमों का आयोजन करते है। इस दिन परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ ही प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से की सौजन्य भेंट

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ और झारखंड के साझा विकास, जनजातीय क्षेत्रों के सशक्तीकरण तथा पारस्परिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल पड़ोसी राज्य ही नहीं, बल्कि साझा जनजातीय विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और आत्मीय सामाजिक संबंधों से भी जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से जशपुर और झारखंड के बीच वर्षों से पारिवारिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक निकटता रही है, जो दोनों राज्यों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाती है।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, जनकल्याण, आपसी समन्वय तथा अनुभवों के आदान-प्रदान को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।


सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न यह भेंट दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, समन्वय और विकासोन्मुखी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। 


यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा।

इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने फिल्म सिटी के प्रस्तावित मास्टर प्लान का किया अवलोकन

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन अवसर पर पर्यटन विभाग को मिले 4 प्रस्ताव

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए।

गदर फिल्म के निर्माता श्री अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन श्री राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन श्री नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से श्री आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक ब्लॉक जैसी सुविधाएं होंगी।

फिल्म शूटिंग, फेस्टिवल और रोजगार के नए अवसर

उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में न्यूटन, जहानाबाद, कौन प्रवीण तांबे, द ग्रेट इंडियन मर्डर, ग्राम चिकित्सालय जैसी फिल्मों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग हो चुकी है, जिससे राज्य में वाणिज्यिक फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को नए अवसर प्राप्त होंगे। फिल्म फेस्टिवल, अवॉर्ड शो एवं अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी। इसके साथ ही राज्य के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार होगा तथा फिल्म टूरिज्म के साथ सामान्य पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गुणवत्ता और मानक ही आत्मनिर्भर भारत की पहचान - मुख्यमंत्री  साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में मानकों का पालन पारदर्शिता, गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा वस्तुओं को मानक चिन्ह प्रदान कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा रही है और इसके माध्यम से मिलावट व नकली वस्तुओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लगी है।


मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित मानक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनों को गुणवत्ता शपथ दिलाते हुए मानकीकृत उत्पादों को बढ़ावा देने और बीआईएस के प्रयासों में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मानकों की स्थापना में विशेष योगदान देने वाले मानक क्लबों, संस्थाओं और मेंटर्स का सम्मान किया। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था देशभर में गुणवत्ता की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एक समय था जब सोने जैसी धातुओं की शुद्धता का पता लगाना कठिन था, लेकिन आज हर उपभोक्ता बीआईएस हॉलमार्क देखकर ही आभूषण खरीदता है। बीआईएस का हॉलमार्क अब उपभोक्ता भरोसे का प्रतीक बन चुका है।


उन्होंने बताया कि बीआईएस द्वारा बोतलबंद पानी, हेलमेट, खिलौने, गहनों से लेकर करीब 22 हजार वस्तुओं को मानक चिन्ह प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच मानक चिन्हों के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मानकों की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण के कारण आज देश के गांव और कस्बों में बने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित जनों से मानक चिन्हों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि “विकसित भारत का संकल्प उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती से ही पूरा होगा।” उन्होंने कहा कि गुणवत्ता ही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि विश्व मानक दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं और समाज में मानकीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह हमारे वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रयासों को सराहने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकास कर रहा है और गुणवत्ता सुधार अब केवल नीति नहीं, बल्कि एक संकल्प बन चुका है।

 बघेल ने कहा कि “जागो ग्राहक जागो” का संदेश उपभोक्ताओं को सजग और जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को समाज में आगे बढ़ाएं, ताकि उपभोक्ता संरक्षण और अधिक सशक्त हो सके।

भारतीय मानक ब्यूरो रायपुर शाखा कार्यालय के निदेशक श्री एस. के. गुप्ता ने कहा कि बीआईएस का प्रत्येक मानक उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को समर्पित है। उन्होंने बताया कि उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और ब्यूरो इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

 गुप्ता ने ब्यूरो द्वारा संचालित गतिविधियों और विभिन्न उत्पादों के मानकीकरण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीआईएस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में निर्मित हर उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।

मुख्यमंत्री ने मानक महोत्सव में विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित मानक महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) तथा अन्य संस्थानों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने मानक स्थापना से जुड़ी गतिविधियों और संस्थाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।

सिपेट रायपुर के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि संस्था प्रदेश के युवाओं को लघु एवं दीर्घकालीन कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है, साथ ही उद्योगों को गुणवत्ता परामर्श और तकनीकी सलाह भी उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री ने सिपेट की पहल की सराहना की और इसे उद्योग-शिक्षा समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

बीआईएस की रायपुर शाखा द्वारा लगाए गए स्टॉल में उपभोक्ता जागरूकता संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधियों ने बताया कि बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से उपभोक्ता स्वयं आईएसआई, एचयूआईडी और हॉलमार्क युक्त आभूषणों की प्रमाणिकता जांच सकते हैं।

ऐप के जरिए उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें दर्ज करने और आईएसआई मुहर के दुरुपयोग की सूचना देने की सुविधा भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को उपभोक्ता सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

शैक्षणिक संस्थानों के नवाचारी स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र

मानक महोत्सव में स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा लगाए गए नवाचार आधारित स्टॉल सभी के आकर्षण का केंद्र बने। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित नवाचारों का अवलोकन किया और उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।

गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बिरकोनी के विद्यार्थियों ने रक्तचाप जांचने की मशीन और मिट्टी की नमी मापने की मशीन तैयार की। पंडित आर. डी. तिवारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल के छात्रों ने “एक्सप्लोरर रोबोट” प्रस्तुत किया, जो अंधेरे और दुर्गम स्थानों में रास्ता खोजने में सक्षम है। यह रोबोट खदानों और औद्योगिक स्थलों पर उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

वहीं गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल अंडा के विद्यार्थियों ने स्मार्ट ट्रेन का मॉडल तैयार किया, जो विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से चर्चा की, उनके नवाचारी कार्यों की जानकारी ली और उनकी रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा —“युवाओं की सोच में जब गुणवत्ता और नवाचार जुड़ता है, तभी भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर होता है।”

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुणवत्ता सिर्फ उद्योग या उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन के हर पहलू का संस्कार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मानक केवल नियम नहीं, राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों, संस्थाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे “क्वालिटी को क्वांटिटी से पहले रखें” और छत्तीसगढ़ को मानकीकरण, नवाचार और पारदर्शिता में देश का अग्रणी राज्य बनाएं। उन्होंने कहा —“जब हर नागरिक गुणवत्ता को अपना धर्म समझेगा, तभी सच्चे अर्थों में विकसित भारत का स्वप्न साकार होगा।”

इस अवसर पर एनआईटी रायपुर के निदेशक श्री एन. व्ही. रमन्ना राव, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष  सतीश थोरानी, इस्पात प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक श्री ए. के. चक्रवर्ती, कैट के अध्यक्ष  परमानंद जैन, छत्तीसगढ़ स्टील रिरोलर्स निर्माता संघ के अध्यक्ष श्री संजय त्रिपाठी और छत्तीसगढ़ ज्वेलर्स संघ के अध्यक्ष श्रीकमल सोनी उपस्थित थे।

बाढ़ पीड़ितों को राशन-ईलाज के साथ अब जरूरी दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू, मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित अमल

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रायपुर, बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।

स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन पर्व पर प्रदेशवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन पर्व के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और परस्पर सौहार्द की मंगलकामना करते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता, समर्पण और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन का त्यौहार भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है, जिसमें बहनें अपने भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रक्षा-सूत्र बांधती हैं, वहीं भाई भी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं। रक्षाबंधन पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को सशक्त करने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पारंपरिक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, प्रेम, करुणा और दायित्वबोध की भावना को भी उजागर करता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर पर समाज में सौहार्द्र, भाईचारा और महिला सम्मान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए संकल्प लें।

मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से प्रदेश की बेटियों, बहनों और मातृशक्ति को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पावन पर्व सभी नागरिकों के जीवन में प्रेम, उमंग और एक नई ऊर्जा का संचार करेगा।


प्रदेश में बुनकरों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण हेतु किए जा रहे हैं विशेष प्रयास - मुख्यमंत्री

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रायपुर- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ बुनकर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने सभी प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री ने बुनकर समाज की सराहना करते हुए कहा कि  हथकरघा कला हमारी समृद्ध विरासत है, जो प्रदेश को एक विशिष्ट पहचान दिलाती है और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाती है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बुनकर समाज अपने श्रम, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राज्य का गौरव बढ़ा रहा है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों की समृद्धि, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। कच्चा माल सुलभ कराने से लेकर लागत कम करने और विपणन की बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने तक, हर मोर्चे पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुनकरों की आत्मनिर्भरता ही उनकी रचनात्मक उड़ान को नई ऊँचाई दे सकती है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए "वोकल फॉर लोकल" के मंत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय हमारे पारंपरिक उत्पादों और हुनर को प्रोत्साहन देने का है। हथकरघा उद्योग केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जिसे बुनकर समाज आज भी सहेजे हुए है।

इस अवसर पर समाज के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बुनकरों द्वारा निर्मित करघा (कपड़ा बुनने की पारंपरिक मशीन) की प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी यह भेंट न केवल आपके सम्मान और भावनाओं का प्रतीक है, बल्कि सृजन, परंपरा और हमारे प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रतीक है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार बुनकर समाज के हर संभव सहयोग के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और उनके सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय बुनकरों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण का होगा। इस अवसर पर बुनकर समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री महेश देवांगन, श्री पुरुषोत्तम देवांगन, श्री धनेश देवांगन, श्री गजेंद्र देवांगन सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे।


बस्तर के बच्चों का स्वर्णिम भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से  छत्तीसगढ़ विधानसभा में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले की सुदूरवर्ती पाँच ग्राम पंचायतों के बच्चों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना और राजधानी रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ बस्तर के कोने-कोने तक पहुँचाने हेतु कृतसंकल्पित है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के बच्चों से की आत्मीय मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से सौहार्दपूर्ण बातचीत करते हुए कहा कि इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से आपको राजधानी रायपुर को निकट से देखने-समझने का अवसर मिला है। इसी तरह राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में भी तीव्र गति से विकास कर रही है। उन्होंने बताया कि सुदूर अंचलों में अब सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो रहे हैं, और जहां-जहां ये कैंप पहुँचते हैं, वहाँ चौतरफा विकास के द्वार खुलते हैं। अब अधिकांश स्थानों पर शासकीय राशन दुकानों की स्थापना हो चुकी है और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँच रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में बस्तर पूरी तरह से नक्सलमुक्त क्षेत्र होगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से मुस्कराते हुए पूछा — "बस्तर के शेर बच्चों ने रायपुर के जंगल सफारी में शेर देखा या नहीं?" इस मजाकिया अंदाज़ पर बच्चों सहित उपस्थित सभी लोग ठहाके लगाकर हँस पड़े।

श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। बस्तर के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर रही है, ताकि क्षेत्र के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायकगण श्री ईश्वर साहू एवं श्री सुशांत शुक्ला भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले की पाँच सुदूर ग्राम पंचायतों—पालाचलमा, पोटकपल्ली, एलमागुंडा, ताड़मेटला एवं गोलापल्ली—के 100 स्कूली बच्चे राजधानी रायपुर के दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर आए हैं। भ्रमण के दौरान इन बच्चों को मंत्रालय, जंगल सफारी, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया गया। विदित हो कि नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर के नक्सल प्रभावित पाँच जिलों के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।


मोर आवास-मोर अधिकार : ‘साय सरकार’ की पहल रंग लाई, बीजापुर में आवास प्लस सर्वे से जुड़ें 30 हजार परिवार

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 रायपुर : मोर आवास मोर अधिकार योजना के तहत् राज्य के बीजापुर जिले में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक जिले में 30 हजार से अधिक परिवार आवास प्लस सर्वे में शामिल हो चुके हैं। जिससे उन्हें स्थाई आवास की दिशा में एक नई आश मिली है।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2018 में तैयार की गई आवास प्लस की सूची में छूटे हुए पात्र परिवारों को सर्वे में शामिल करने मोर दुवार - साय सरकार थीम पर प्रदेश भर में महाअभियान चलाया गया। जिले में कुल 30 हजार 186 परिवार इस सर्वे में शामिल हुए है। इस सर्वे की महत्वपूर्ण बात यह है कि 2018 में जहां 117 ग्राम पंचायतों में ही सर्वे किए गए थे, वहीं इस बार जिले में कुल 170 ग्राम पंचायतों में से 165 ग्राम पंचायतों में सर्वे कार्य पूर्ण किया गया है। पहुंच विहीन ग्राम पंचायतें जो दशकों से माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पूर्व में किये गए सर्वे में छूट गए थे। उन क्षेत्रों में भी जिला प्रशासन की ठोस रणनीति की बदौलत पहली बार वंचित परिवार का सर्वे कर पात्र परिवारों को शामिल करने में सफलता मिली है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के जिला समन्वयक गंभीर सिंह परिहार ने बताया कि कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में जरूरत मंद वंचित परिवार तक पहुंचने आवास प्लस सर्वे 2.0 की कार्ययोजना बनाई गई। जिला प्रशासन की विशेष पहल पर निरंतर मॉनिटरिंग एवं नियमित समीक्षा से बड़ी संख्या में परिवार सर्वे में शामिल हुए हैं। मोर दुवार साय सरकार थीम पर प्रदेश भर में 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सर्वेक्षण विशेष पखवाड़ा चलाये जाने का शासन स्तर से निर्णय था, सर्वे करने की अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित थी। तय समय-सीमा में सर्वे से वंचित परिवारों को जोड़ने हेतु जिला स्तर से पत्र प्रेषित कर पुनः आवास प्लस ऐप को चालू करवाने हेतु राज्य शासन को पत्र प्रेषित किया। जिसे स्वीकार करते हुए भारत सरकार द्वारा 16 जून से 26 जून तक सर्वे तिथि को बढ़ाया गया।

जिला प्रशासन की सक्रियता और समर्पित कार्यप्रणाली के चलते यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी पात्र परिवारों को उनका हक मिल सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर में 8 लाख के इनामी माओवादी डिप्टी कमांडर के न्यूट्रलाइज होने पर सुरक्षाबलों को दी बधाई

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के बीजापुर जिले में माओवादियों की पीएलजीए बटालियन के 8 लाख के इनामी डिप्टी कमांडर सोढ़ी कन्ना को सुरक्षा बलों द्वारा न्यूट्रलाइज किए जाने पर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, सटीक रणनीति और जनसहभागिता की सराहना की है।


उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने का मिशन निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार इस अभियान में पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुटी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह कार्रवाई हमारे वीर सुरक्षाबलों के पराक्रम और सुनियोजित अभियानों का जीवंत उदाहरण है। सुरक्षाबलों की निरंतर और निर्णायक कार्रवाइयों ने नक्सल संगठन की रीढ़ तोड़ दी है। आज नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार पूरी दृढ़ता के साथ यह अभियान जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राज्य के हर क्षेत्र में लोकतंत्र, विश्वास और प्रगति की विजय सुनिश्चित होगी।

लोगों को बेसब्री से इंतजार है अगले बरस के बस्तर पंडुम का

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 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में बस्तर में तेजी से शांति लौटी है। नक्सलवादी हिंसा के चलते बस्तर की असल पहचान गुम हो गई थी, यह पहचान इसके सुंदर प्राकृतिक परिवेश के साथ ही अनुपम सांस्कृतिक जनजातीय धरोहर को लेकर भी है यह सुंदर संस्कृति अपने को उत्सव अर्थात पंडुम के माध्यम से प्रकट करती है। साय सरकार ने बस्तर की असल पहचान को देश-दुनिया में भव्यता से सामने लाने बस्तर पंडुम के आयोजन का निर्णय लिया।


 
बस्तर पंडुम 2025 बस्तर की जनजातीय परंपराओं, कला और जीवनशैली को दुनिया के सामने लाने वाला एक भव्य उत्सव है। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर पूरी प्रखरता से ले जाने में सफल रहा। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और बस्तर के लोगों की भागीदारी ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। इस आयोजन के समापन समारोह में दंतेवाड़ा में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने घोषणा की कि अगले वर्ष से बस्तर पंडुम 12 श्रेणियों में आयोजित होगा, जिसमें देशभर के आदिवासी जिलों से कलाकार भाग लेंगे।
 
बस्तर पंडुम 2025 न केवल बस्तर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। इस आयोजन से बस्तर के स्थानीय लोगों को अपनी परंपराओं और कला को दिखाने का मंच मिला और साथ ही देश-विदेश से आए पर्यटकों, शोधकर्ताओं और संस्कृति प्रेमियों को बस्तर की अनूठी संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिला। आयोजन के वृहत स्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बस्तर संभाग के कोने-कोने से आये कलाकारों  ने इसमें हिस्सा लिया और अपनी अनूठी कला से देश दुनिया का परिचय कराया। इस आयोजन में बस्तर संभाग के 7 जिलों के 32 जनपद पंचायतों के अंतर्गत 1,885 ग्राम पंचायत शामिल हुए। बस्तर की संस्कृृति के सात विधाओं में लगभग 27,000 प्रतिभागियों ने अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन किया। बस्तर के शहरी क्षेत्र के अंतर्गत एक नगरनिगम, 8 नगर पालिका, 12 नगर पंचायत भी इस आयोजन मंे सम्मिलित हुए।
 
बस्तर संभाग के सात जिलों सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर में यह आयोजन भव्य रूप से हुआ। इस आयोजन ने बस्तर के जनजातीय समाज की पहचान, गौरव और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रूप में सामने रखा। इस उत्सव में बस्तर की संस्कृति की सात प्रमुख विधाओं जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प और चित्रकला, पेय पदार्थ और पारंपरिक व्यंजनों का भव्य प्रदर्शन किया गया। समापन के अवसर पर ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, असम और मध्यप्रदेश के कलाकारों ने भी अपने नृत्य-संगीत का प्रदर्शन किया।
 
यह सातों विधाएं बस्तर को जानने के लिए एक पर्दा खोलती हैं और इसके माध्यम से आप बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति के विस्मय लोक में प्रवेश करते हैं। जनजातीय नृत्य को लें, यह सामूहिकता का परिचय देने वाले नृत्य हैं। चाहे मिलजुलकर शिकार करना हो अथवा देवी-देवताओं को प्रसन्न करने सुंदर आंगिक अभिव्यक्ति करनी हो, जनजातीय नृत्य अपने अनूठे रूप में सामूहिकता के बोध के साथ बस्तर के लोक विश्वासों से परिचित कराते हैं।
 
बस्तर का संसार शांति प्रिय है। अद्भुत सौंदर्य दृष्टि रखता है इसके चलते आभूषणों और वेशभूषा की समृद्ध परंपरा यहां नजर आती है। बस्तर पंडुम के माध्यम से यह अनोखा संसार भी सामने आया। बस्तर की सांस्कृतिक यात्रा इसके हाट-बाजारों का अवलोकन किये बिना पूरी नहीं होती। इन हाट बाजारों में बस्तर के खानपान और महुआ, लांदा-सल्फी जैसे पेय पदार्थ भी होते हैं। चापड़ा चटनी से लेकर बोड़ा जैसे खाद्य सामग्री बस्तर की खानपान परंपरा को विशिष्ट बनाती है। इन खानपान की परंपराओं का सुंदर नजारा भी बस्तर पंडुम में दिखा।
 
बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन जनपद, जिला और संभाग स्तर पर तीन चरणों में हुआ । संस्कृति विभाग द्वारा इस आयोजन के लिए बस्तर के सात जिलों में जनपद व जिला स्तरीय आयोजनों और कलाकारों को प्रोत्साहन देने हेतु कुल 5 करोड़ रुपये की राशि दी गई। ग्राम पंचायत स्तर पर 1,885 ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये प्रति पंचायत की दर से 1 करोड़ 85 लाख रुपये दिए गए। नगर पंचायतों को 25 हजार रुपये, नगर पालिकाओं को 50 हजार रुपये और नगर निगम को 1 लाख रुपये की राशि दी गई। जनपद स्तर पर सात विधाओं के प्रत्येक विजेता दल को 10 हजार रुपये एवं संभाग स्तर पर प्रथम पुरस्कार 50 हजार, द्वितीय 30 हजार, तृतीय 20 हजार और सांत्वना पुरस्कार 10 हजार रुपये दिए गए। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रत्येक दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और 5 हजार रुपये यात्रा भत्ता दिया गया।
 
इस आयोजन ने न केवल जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त किया बल्कि स्थानीय कलाकारों को मंच और सम्मान भी प्रदान किया। बस्तर पंडुम अब बस्तर की बोली, वाद्ययंत्र, व्यंजन और संस्कृति की तरह भारत की समृद्ध विरासत का हिस्सा बन गया है। अब हर साल बस्तर की जनजातीय संस्कृति से अभिभूत होने वाले लाखों लोगों को इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
 
 हीरा देवांगन, संयुक्त संचालक

मुंगेली जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बसे ग्राम बिजराकछार में पहुँचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब

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रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तीसरे चरण में आज मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के सुदूर और दुर्गम ग्राम बिजराकछार में आयोजित समाधान शिविर में पहुँचे। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस इलाके में पहली बार मुख्यमंत्री का आगमन होते ही ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह दिखा। यह इलाका आदिवासी और बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल है और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ महतारी एवं सरस्वती माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं और किसानों ने पारंपरिक खुमरी के साथ मुख्यमंत्री का गजमाला से अभिनंदन किया। समाधान शिविर में मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने समाधान शिविर में आत्मीयता के साथ ग्रामीणों से मुलाकात की और जनसमस्याओं को सुना। उन्होंने डिंडोरी में नए कॉलेज की स्थापना, खुड़िया में पीएचसी का उन्नयन एवं लोरमी में छात्रावास के निर्माण की ऐतिहासिक घोषणाएँ कीं।

मुंगेली जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बसे ग्राम बिजराकछार में पहुँचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

सुशासन तिहार के तृतीय चरण अंतर्गत आयोजित समाधान शिविर में क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिजराकछार, बोईरहा, खुड़िया, महामाई, निवासखार, सुरही, कटामी, लमनी, छपरवा, अचानकमार, दरवाजा, कारीडोंगरी, डोंगरीगढ़, झिरिया क्लस्टर के रूप में शामिल की गई थीं। मुख्यमंत्री ने क्लस्टर की 14 ग्राम पंचायतों के हितग्राहियों से संवाद कर शासन की योजनाओं की जानकारी ली और उनकी समस्याएं सुनीं।

मुख्यमंत्री  साय ने समाधान शिविर में हितग्राहियों को सामग्री वितरण कर लाभान्वित किया। उन्होंने 5 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, 5 को राशन कार्ड, नोनी सुरक्षा योजना के 20 हितग्राहियों को बॉन्ड पत्र, सहकारिता विभाग के अंतर्गत 6 हितग्राहियों को 5 लाख 55 हजार रुपये का चेक, 33 हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबी और स्वीकृत पत्र, महिला स्व सहायता समूहों को चक्रीय निधि और 3 हितग्राहियों को लखपति दीदी प्रमाण पत्र, मनरेगा के तहत 23 हितग्राहियों को जॉब कार्ड, तेंदूपत्ता संग्रहण परिवार की मेधावी विद्यार्थी को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। इस अवसर पर वन विभाग की ओर से अचानकमार जंगल सफारी के लिए गांव की महिला स्व-सहायता समूह को सफारी गाड़ी की चाबी भी प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार को लगभग डेढ़ वर्ष हो गए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई अधिकांश  गारंटियों को पूरा किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार बनते ही 13 दिसंबर को हुई पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई।  उन्होंने कहा कि 15 मई तक चल रहे आवास सर्वे में जिन लोगों को अभी तक आवास नहीं मिला है, उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और एकमुश्त राशि उनके खातों में स्थानांतरित की जा रही है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत जिन माताओं के नाम अभी तक शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी जल्द ही जोड़ा जाएगा। इस योजना से लाभ प्राप्त कर माताएं सुकन्या योजना में धनराशि जमा कर रही हैं।  उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता की खरीदी 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से की जा रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ दर्शन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारते हुए योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। 5 लाख 60 हजार से अधिक भूमिहीन मजदूरों को किसान सम्मान योजना का लाभ दिया गया है। सरकार भ्रष्टाचार की संभावनाओं  को नवाचार और तकनीक के माध्यम से समाप्त कर रही है तथा सभी कार्यों को ऑनलाइन किया जा रहा है। भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की एक-एक गारंटी को धरातल पर उतारने का कार्य पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से कर रहे हैं। हमारी सरकार जनता से किए गए हर वादे को गंभीरता से लेते हुए उसे पूरा करने में जुटी है। आज मुझे एक सांसद के रूप में आप सभी की सेवा करने का गौरव प्राप्त हो रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले हमने वादा किया था कि सबसे पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवासहीन परिवारों को घर उपलब्ध कराएंगे। हमारी सरकार ने इस वादे को प्राथमिकता दी और सरकार बनते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सबसे पहले प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी गरीब भूखा न रहे। इसी दिशा में हर ज़रूरतमंद को नियमित रूप से चावल उपलब्ध कराया जा रहा है, चाहे वह वनांचल में हो या दूरस्थ अंचलों में। आज हर घर में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, और सभी को स्वच्छ पीने का जल सुनिश्चित कराया जा रहा है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से हम माताओं और बहनों का सम्मान कर रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत उन्हें हर माह एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनका आत्मबल और आर्थिक स्वतंत्रता दोनों में वृद्धि हो रही है।

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तीसरे चरण में आज मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के सुदूर और दुर्गम ग्राम बिजराकछार में आयोजित समाधान शिविर में पहुँचे

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज इस सुदूर वनांचल क्षेत्र बिजराकछार में पधारे हैं। वे सभी महातारियों को 1,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का बेटा, आदिवासी समाज के बीच स्नेह और दुलार लेकर स्वयं आप सभी से मिलने आया है। उन्होंने कहा कि अचानकमार क्षेत्र बैगा आदिवासी समाज का क्षेत्र है। इस क्षेत्र में पहले कई समस्याएँ रही हैं, लेकिन नई सरकार के गठन के बाद से यहाँ की जनता को मूलभूत सुविधाएँ मिल रही हैं। समाधान शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की एक-एक गारंटी को साय सरकार पूर्ण रूप से क्रियान्वित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीण उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्य में समाधान शिविरों के माध्यम से आमजनों की मांगों एवं समस्याओं का निराकरण लगातार जारी है। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुंगेली जिले में कुल 1 लाख 29 हजार 573 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1 लाख 29 हजार 565 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। समाधान शिविर बिजराकछार क्लस्टर अंतर्गत 7 हजार 917 मांगों व 53 शिकायतों सहित कुल 7 हजार 970 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 7 हजार 964 आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जा चुका है। सबसे अधिक पीएम आवास के 1 हजार 977 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवास प्लस 2.0 अंतर्गत सर्वे कर 1 हजार 469 हितग्राहियों का नया नाम जोड़ा गया है। इसके साथ ही 110 भूमि सुधार कार्य, 20 डबरी निर्माण की स्वीकृति और 25 नवीन जॉब कार्ड बनाए गए हैं। 116 नवीन राशन कार्ड प्रदान करने के साथ 61 नाम जोड़ने व काटने, 2 श्रम कार्ड, 142 महतारी वंदन योजना का नया पंजीयन, 31 पेंशन हेतु पंजीयन और पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 23 नया पंजीयन किया गया है।


जो सरकार अच्छा काम करती है वह आम जनता के बीच जाने से नहीं कतराती: मुख्यमंत्री  साय

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 रायपुर :  सुशासन तिहार के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का उड़न खटोला बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम आमागोहन में उतरा। वनांचल के आदिवासी ग्राम में मुख्यमंत्री  साय को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह और खुशी का माहौल था। वे चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर अपने राज्य के मुखिया को एक झलक देखने और उन्हें सुनने के लिए घण्टो डटे रहे। मुख्यमंत्री साय ने समाधान शिविर में जहाँ ग्रामीणों से संवाद किया वहीं मुख्यमंत्री ने समाधान पेटी में डाले गए आवेदनों की निराकरण की स्थिति भी जानी। उन्होंने सुशासन तिहार की सार्थकता को बताते हुए कहा कि आज सुशासन तिहार के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सरकार आपके गाँव में आई है। हमने बीते डेढ़ वर्षों में राज्य के लोगों के हित में कार्य किया है। जो सरकार अच्छा काम करती है उनकी ही हिम्मत होती है जनता के बीच जाने की। सुशासन तिहार एक तरह से हमारा रिपोर्ट कार्ड भी है और हमारी सरकार के द्वारा किए गए कार्यों का आंकलन करने का अवसर भी। इसके माध्यम से सरकार योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन की स्थिति भी जान रही है।

मुख्यमंत्री  साय

सुशासन तिहार के तीसरे चरण के तहत बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के अंतर्गत दूरस्थ आदिवासी ग्राम आमागोहन के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री  साय शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी के आशीर्वाद से राज्य में हमारी सरकार बनी और डेढ़ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में लोकसभा,नगरीय निकाय,नगर पंचायत में हमारी सरकार बनी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार ने मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वादों को पूरा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शपथ लेते ही अगले दिन से 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दुर्ग और अम्बिकापुर में भी राज्यवासियों को 3-3 लाख पीएम आवास दिये। इसके अलावा पीएम जनमन आवास और नक्सल क्षेत्रों में आत्म समर्पित परिवारों को आवास दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आवास प्लस में जिनका नाम है उनको भी आवास दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों का वादा पूरा कर 31 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी और 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का निर्णय लिया। दो वर्ष से बकाया धान बोनस राशि भी दी। उन्होंने कहा कि 70 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वन्दन योजना की राशि उनके खाते में देकर आर्थिक समृद्धि और महिला सशक्तिकरण का द्वार खोला। जिनका नाम छूट गया है उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है,आने वाले दिनों में छूटे हुए हितग्राहियों का नाम भी जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले हितग्राहियों के हित में निर्णय लेते हुए प्रति मानक बोरा की राशि 4 हजार से 5500 रुपये किया गया। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही रामलला दर्शन योजना प्रारंभ कर हितग्राहियों को रामलला का दर्शन कराया है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने बड़े-बुजुर्गों की इच्छाओं को पूरा करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री तीर्थ योजना को प्रारंभ किया है। इस योजना से तीर्थ यात्रा के इच्छुक परिवार अन्य तीर्थ स्थल का लाभ उठा पाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने 24 अप्रैल से ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ की है। इस योजना से सभी ग्राम पंचायत जुड़ेंगे और ग्रामीणों को गाँव में ही बैंक जैसी सुविधाएं उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्र में किसी भी योजना के हितग्राहियों को राशि निकालने में सुविधा होगी। वही जाति, निवास सहित अन्य दस्तावेज भी मिल पाएंगे। अभी 1460 पंचायत में यह प्रारंभ की गई है। इससे ग्रामीणों को बैंक तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के साथ कार्यवाही भी कर रही है। उन्होंने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री के साथ सरकार ने नामांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ की है। इससे कोई अधिकारी नामान्तरण के नाम पर किसी को घुमा नहीं पायेगा। एक घण्टे से कम समय में नामांतरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी को पूरा करने वाली यह सरकार सुशासन की दिशा में कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी दयानन्द, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सुर्यवंशी,कलेक्टर, एसपी आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने बेलगहना में कॉलेज,आमागोहन में विद्युत सब स्टेशन और सामुदायिक भवन की घोषणा की

मुख्यमंत्री  साय ने आमागोहन के समाधान शिविर में आई मांग को ध्यान रखकर बेलगहना में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने आमागोहन सहित आसपास के ग्रामों में लो वोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए 33 केव्ही का विद्युत सब स्टेशन और विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की।

समाधान शिविर में पहुँचे बिलासपुर सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन लाल साहू ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से प्रदेश के कोने-कोने में शिविर का आयोजन कर आवेदन लिए गए। मुख्यमंत्री जी हर छोटे छोटे गाँव में जा रहे हैं। गाँव की समस्याओं का निराकरण भी हो रहा है। यह सौभाग्य है कि सुशासन तिहार के अंतर्गत वे बिलासपुर जिले के अंतिम छोर के आदिवासी क्षेत्र के गाँव आमागोहन आये। इसके लिए मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार बनने के कुछ दिनों के भीतर ही मोदी की गारंटी को पूरा किया गया है। अब वे योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी लेने गाँव-गांव जा रहे हैं। उन्होंने बेलगहना में उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज,आमागोहन में विद्युत सब स्टेशन सहित अन्य मांग भी रखी।

शासन की योजनाओं से जीवन में आया बदलाव

समाधान शिविर में पीएम आवास, महतारी वंदन योजना, पीएम सम्मान निधि के किसानों ने योजना का लाभ उठाकर जीवन में आए बदलाव को बयां किया। पीएम आवास की हितग्राही छोटे लाल ने बताया कि पहले वे खपरैल वाले मिट्टी के घर में रहते थे। इससे साँप,बिच्छु का खतरा बना रहता था। अब पक्का मकान बनने से बारिश के दिनों में होने वाली समस्या दूर हो गई है। महतारी वंदन योजना की हितग्राही श्रीमती विमला बाई पुरी ने बताया कि उन्हें मार्च 2024 से महतारी वन्दन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपनी नतनी वामिका पुरी के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना में किया है ताकि भविष्य में इस राशि का उपयोग पढ़ाई के लिए हो सके। पीएम जनमन अंतर्गत लाभान्वित हितग्राही दिलेशरी खुसरो ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनका आयुषमान कार्ड बना है। इससे 5 लाख तक का उपचार हो पायेगा।

दसवीं-बारहवीं के मेधावी बच्चों को सम्मानित कर किया प्रोत्साहित, दी शुभकामनाएं

आमागोहन के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने 10वी-12वी बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने दसवीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली महिमा पटेल, स्नेहा सेन, बारहवीं की वर्षा पाण्डेय को सम्मानित कर उन्हें भविष्य की शुभकामनाएं दी।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने पीएम आवास के हितग्राही छतौनी लाल,नरबदिया बाई,समरीत बाई को आवास की चाबी सौंपी। उन्होंने बिहान के महिला समूहों, सहकारिता, उद्यान,राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री और राशि का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री को छात्र दीपिका और देवी सिंह खुसरो ने हाथ से बनाई मुख्यमंत्री की पोट्रेट भी भेंट की।

2265 में 2212 आवेदन का किया गया निराकरण

समाधान शिविर आमागोहन क्लस्टर में कुल 2265 आवेदन प्राप्त हुए,जिसमे से 2212 का निराकरण कर दिया गया है। इस क्लस्टर में 11 गाँव आमागोहन, सोनपुरी, तुलुप,नगोई, नवगांव सोनसाय,मोहली, खोंगसरा, डाँड़बछाली, टांटीधार, बिटकुली शामिल है।

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